नए खतरे की आहट! पंजाब की ‘आप’ सरकार के खिलाफ खड़ा हुआ ये संगठन
पंजाब रोडवेज ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (पीआरटीसी) के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर पंजाब की भगवंत मान गवर्नमेंट के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है.

बरनाला बस स्टैंड के पास शनिवार को कर्मचारियों ने आम आदमी पार्टी (आप) की गवर्नमेंट के विरुद्ध जोरदार प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों को नहीं माना गया, तो आने वाले समय में एक बड़ा संघर्ष प्रारम्भ किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से भगवंत मान गवर्नमेंट की होगी.
इस अवसर पर पीआरटीसी वर्कर्स यूनियन के प्रधान आजाद जसमेर सिंह ने बोला कि कर्मचारी उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में मुकदमा जीत चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें अभी तक ड्यूटी पर नहीं लगाया गया है.
उन्होंने इल्जाम लगाया कि प्रदेश के सीएम भगवंत मान के आश्वासन देने के बावजूद भी पीआरटीसी कर्मचारियों को ड्यूटी पर बहाल नहीं किया गया है.
उन्होंने बोला कि पहले अकुशल मजदूरों को हर माह सात तारीख को वेतन मिल जाता था, लेकिन अब उन्हें दो किस्तों में और 25 तारीख तक वेतन दिया जा रहा है. जसमेर सिंह ने मांग की कि गवर्नमेंट सभी यात्रियों के लिए निःशुल्क यात्रा की सुविधा जारी रखे, लेकिन पीआरटीसी को उसका बकाया भुगतान समय पर किया जाए ताकि कर्मचारियों को नियमित वेतन मिल सके.
उन्होंने यह भी इल्जाम लगाया कि गवर्नमेंट की ढिलाई के चलते पीआरटीसी रोडवेज भारी घाटे में चल रही है. उन्होंने बोला कि गलत परमिट पर चलने वाली बसों को बंद करने का गवर्नमेंट ने वादा किया था, लेकिन पटियाला सहित कई क्षेत्रों में ऐसी गैरकानूनी बसें अब भी चल रही हैं. संगठन ने पहले इन्हें बंद करवाया था. लेकिन, बसें फिर से प्रारम्भ हो गईं. उन्होंने गवर्नमेंट से इस दिशा में कठोर कदम उठाने की मांग की.
पीआरटीसी 2,511 यूनिट के डिपो अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह ने बोला कि स्वतंत्र यूनियन भाइयों द्वारा प्रारम्भ किए गए इस संघर्ष को पीआरटीसी 2,511 का पूरा समर्थन प्राप्त है. उन्होंने गवर्नमेंट से अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने, ठेका प्रथा खत्म करने और किलोमीटर बसों को बंद करने की मांग की.
उन्होंने कहा कि पीआरटीसी 2,511 की तीन दिवसीय बैठक 20, 21 और 22 मई को आयोजित की जाएगी. यदि गवर्नमेंट इस बैठक में कोई निवारण नहीं निकालती, तो संघर्ष और तेज किया जाएगा.
गुरप्रीत सिंह ने मांग की कि 18 सालों से भी कम वेतन पर काम कर रहे ठेकेदार कर्मचारियों को पीआरटीसी सेवा नियमों के मुताबिक स्थायी किया जाए. इसके साथ ही विभाग में नयी बसें प्रारम्भ की जाएं और ठेका प्रणाली को पूरी तरह से खत्म किया जाए.

