दो देशों को एक साथ घेरता है नागालैंड का ये गाँव

आपको ये जानकर आश्चर्य होगी कि लोंगवा में अभी भी एक राजा का शासन है, जिसे लोकल भाषा में अंग बोला जाता है। सबसे खास बात ये है कि इनकी एक-दो नहीं बल्कि 60 बीवियां हैं। अंग का घर हिंदुस्तान और म्यांमार की सीमा के बीच में स्थित है। अंग के घर का आधा हिस्सा हिंदुस्तान में है, जबकि दूसरा हिस्सा म्यांमार में है। हालांकि, पूरे गांव पर अंग का नियंत्रण है। यही नहीं, अंग म्यांमार और अरुणाचल प्रदेश तक फैले कोन्याक के 60 गांवों पर शासन करते हैं।
लोंगवा में एक्स्प्लोर करें ये स्पॉट्स
चूंकि लोंगवा कई मायनों में खास है, जिसकी वजह से यहां टूरिस्ट्स भी आते हैं। प्रकृति इस गांव पर काफी मेहरबान है, जिसकी वजह से टूरिस्ट्स अपनी भागदौड़ भरी जीवन से ब्रेक लेकर कुछ फुर्सत के पल बिताने के लिए यहां आते हैं। यदि आपको प्रकृति के बीच रहना पसंद है तो लोंगवा गांव आपके लिए एक परफेक्ट स्पॉट है। आप यहां शिलाई झील, डोयांग नदी, नागालैंड साइंस सेंटर और हांगकांग बाजार जैसे स्पॉट्स को एक्स्प्लोर कर सकते हैं।
कैसे पहुंचे लोंगवा?
नागालैंड के लोंगवा गांव तक पहुंचने के लिए आप असम या नागालैंड से बस, ट्रेन या शेयरिंग टैक्सी को बुक कर सकते हैं। यदि आप बस से ट्रैवल कर रहे हैं तो असम के जोरहाट से बस ले सकते हैं। जो मोन से लगभग 161 किलोमीटर दूर है। आप असम के सोनारी या सिमलुगुरी से मोन तक बस भी ले सकते हैं। बता दें कि लोंगवा गांव मोन जिले में ही पड़ता है। एक बार मोन पहुंच जाएंगे तो यहां से सरलता से आप लोंगवा पहुंच सकते हैं।
अगर आप ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं तो आप असम के भोजू रेलवे स्टेशन तक ट्रेन ले सकते हैं, फिर सोनारी के रास्ते मोन तक जा सकते हैं। आप नागालैंड के दीमापुर रेलवे स्टेशन से लोंगवा गांव तक बस भी ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त आप असम के शिवसागर जिले से लोंगवा गांव तक सुबह-सुबह साझा कार ले सकते हैं। लेकिन यदि आप स्वयं ड्राइव कर रहे हैं तो असम के मोन शहर से लोंगवा गांव तक ड्राइव कर सकते हैं, जिसमें लगभग 3-4 घंटे लगते हैं। यह सड़क चाय के बागानों और पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरती है।

