राष्ट्रीय

दो देशों को एक साथ घेरता है नागालैंड का ये गाँव

ट्रेवल डेस्क: नागालैंड में एक ऐसा गांव है जहां लोग खाना तो हिंदुस्तान में खाते हैं पर उनका बेडरूम म्यांमार में है क्या आप इस बात पर विश्वास करेंगे? बहुत से लोग इसका उत्तर न में देंगे पर ये बात सच है नागालैंड में लोंगवा नाम का एक गांव है, जहां लोग हिंदुस्तान में खाना खाते हैं और म्यांमार में बने अपने बेडरूम में सोते हैं यही नहीं, इस गांव की एक खास बात ये भी है कि यहां रहने वाले लोगों के पास दो राष्ट्र की नागरिकता हैदरअसल, लोंगवा गांव के बीच से होकर भारत-म्यांमार का बॉर्डर निकलता है यही कारण है कि यहां रहने वाले लोगों के पास इन दोनों राष्ट्रों की नागरिकता है
World heritage day 2022 18 sixteen nine
WhatsApp Group Join Now
ये लोग इन दोनों राष्ट्रों में मतदान देने के अतिरिक्त अपनी रोजीरोटी के लिए काम भी कर सकते हैं ये गांव कोन्याक नागा जनजाति का घर है फ्री मूवमेंट रिजीम (एफएमआर) के अनुसार लोंगवा में रहने वाले लोग बिना वीजा 60 पत्नियों वाले राजा का है शासन या पासपोर्ट के सीमा पार 16 किलोमीटर तक आराम से ट्रैवल कर सकते हैं

आपको ये जानकर आश्चर्य होगी कि लोंगवा में अभी भी एक राजा का शासन है, जिसे लोकल भाषा में अंग बोला जाता है सबसे खास बात ये है कि इनकी एक-दो नहीं बल्कि 60 बीवियां हैं अंग का घर हिंदुस्तान और म्यांमार की सीमा के बीच में स्थित है अंग के घर का आधा हिस्सा हिंदुस्तान में है, जबकि दूसरा हिस्सा म्यांमार में है हालांकि, पूरे गांव पर अंग का नियंत्रण है यही नहीं, अंग म्यांमार और अरुणाचल प्रदेश तक फैले कोन्याक के 60 गांवों पर शासन करते हैं

लोंगवा में एक्स्प्लोर करें ये स्पॉट्स
चूंकि लोंगवा कई मायनों में खास है, जिसकी वजह से यहां टूरिस्ट्स भी आते हैं प्रकृति इस गांव पर काफी मेहरबान है, जिसकी वजह से टूरिस्ट्स अपनी भागदौड़ भरी जीवन से ब्रेक लेकर कुछ फुर्सत के पल बिताने के लिए यहां आते हैं यदि आपको प्रकृति के बीच रहना पसंद है तो लोंगवा गांव आपके लिए एक परफेक्ट स्पॉट है आप यहां शिलाई झील, डोयांग नदी, नागालैंड साइंस सेंटर और हांगकांग बाजार जैसे स्पॉट्स को एक्स्प्लोर कर सकते हैं

कैसे पहुंचे लोंगवा?

नागालैंड के लोंगवा गांव तक पहुंचने के लिए आप असम या नागालैंड से बस, ट्रेन या शेयरिंग टैक्सी को बुक कर सकते हैं यदि आप बस से ट्रैवल कर रहे हैं तो असम के जोरहाट से बस ले सकते हैं जो मोन से लगभग 161 किलोमीटर दूर है आप असम के सोनारी या सिमलुगुरी से मोन तक बस भी ले सकते हैं बता दें कि लोंगवा गांव मोन जिले में ही पड़ता है एक बार मोन पहुंच जाएंगे तो यहां से सरलता से आप लोंगवा पहुंच सकते हैं

अगर आप ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं तो आप असम के भोजू रेलवे स्टेशन तक ट्रेन ले सकते हैं, फिर सोनारी के रास्ते मोन तक जा सकते हैं आप नागालैंड के दीमापुर रेलवे स्टेशन से लोंगवा गांव तक बस भी ले सकते हैं इसके अतिरिक्त आप असम के शिवसागर जिले से लोंगवा गांव तक सुबह-सुबह साझा कार ले सकते हैं लेकिन यदि आप स्वयं ड्राइव कर रहे हैं तो असम के मोन शहर से लोंगवा गांव तक ड्राइव कर सकते हैं, जिसमें लगभग 3-4 घंटे लगते हैं यह सड़क चाय के बागानों और पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरती है

Back to top button