राष्ट्रीय

आज कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा इस मामले में सीधे स्पीकर से भिड़े

विधानसभा में प्रश्न का लिखित उत्तर पढ़ा जाए या नहीं इस पर आज गवर्नमेंट के मंत्री सुमित गोदारा बहस में उलझ गए. स्पीकर ने इसी सत्र के पहले दिन यह प्रबंध दे दी थी कि सदन में पूछे जाने वाले लिखित प्रश्नों के उत्तर पढ़े हुए माने जाएंगे और विधायक सीधे पूरक प्रश्न पूछेंगे. लेकिन बुधवार को संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने भी इस प्रबंध का विरोध किया था. आज कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा इस मुद्दे में सीधे स्पीकर से ही भिड़ गए. उन्होंने यह कहते हुए स्पीकर की प्रबंध पर प्रश्न खड़े कर दिए कि ऐसे तो सब लिखा हुआ ही है फिर पढ़ने की क्या आवश्यकता है. मजे की बात यह है कि प्रतिपक्ष इस मुद्दे में स्पीकर का पक्ष लेता नजर आया.

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नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने गोदारा को बीच में टोकते हुए बोला कि आप स्पीकर की प्रबंध पर प्रश्न नहीं उठा सकते. इस पर गोदारा तैश में आ गए और कहे कि हम सदन का हिस्सा नहीं हैं क्या? हमको भी बोलने का अधिकार है. इसके बाद सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों तरफ से हंगामा होने लगा.

स्पीकर कहे कल मेरे पास कोई क्यों नहीं अया

 

स्पीकर ने दोनों पक्षों को शांत रहने के लिए कहा. उन्होंने गोदारा से बोला कि इस मुद्दे में प्रबंध दी जा चुकी है. इसलिए इस पर बहस नहीं होनी चाहिए. बुधवार को इसी मामले पर सदन में करीब 8 मिनट तक हंगामा होता रहा. स्पीकर ने बोला कि कल जब मैंने बोला था कि जिसे इस प्रबंध पर विरोध हो वह मेरे चैंबर में आकर मुझसे मिल सकता है. कल कोई भी नहीं आया. इसका मतलब किसी को इस प्रबंध से विरोध नहीं है. फिर आज इस मुद्दे में हंगामा क्यों किया जा रहा है.

 

 

इस प्रश्न पर हुआ हंगामा

 

प्रश्नकाल में आज भाजपा विधायक ललित मीना ने खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग से जुड़ा प्रश्न पूछा कि पांच वर्षों में राशन डीलरों के खिलाफ कितनी शिकायतें मिली हैं?

 

क्या गवर्नमेंट 100 क्विंटल गेहूं से अधिक गबन के आरोपी राशन डीलर्स को निलंबित कर नए राशन डीलर्स की नियुक्ति करने पर विचार रखती है?

मंत्री सुमित गोदारा इसका उत्तर देने के लिए खड़े हुए, लेकिन स्पीकर ने मंत्री को यह कहते हुए बैठा दिया कि इसका उत्तर पहले ही प्रश्नकर्ता के पास पहुंच चुका है. उन्होंने ललित मीणा से बोला कि आप पूरक प्रश्न करिए. इस पर गोदारा कहे कि प्रश्न करने वाले उत्तर सुनना चाहते हैं इसलिए उत्तर पढ़ने देना चाहिए. स्पीकर ने साफ इंकार कर दिया और बोला कि इस पर पहले ही प्रबंध दी जा चुकी है. इसके बाद सदन में जोरदार बहस और हंगामा हो गया.

बुधवार को भी 8 मिनट तक इस पर चली बहस

 

लिखित उत्तर पढ़ा माना जाए या नहीं इस पर बुधवार को भी सदन में पूरे 8 मिनट तक बहस चलती रही. इस पर स्पीकर वासुदेव देवनानी ने बोला कि सोमवार को सदन की स्वीकृति से तय कर चुका है कि प्रश्न का लिखित उत्तर सदस्यों के पास आ गया फिर उस लिखित उत्तर को सदन में पढ़ने की जरूरत नहीं है. उस उत्तर को पढ़ा हुआ माना जाना चाहिए.

जोगाराम और दिलावर ने भी किया था विरोध

 

बुधवार को स्पीकर की प्रबंध का संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने भी विरोध किया था. पटेल ने बोला था कि जब उत्तर सदन में नहीं पढ़ा जाता तो मंत्री का उत्तर रिकॉर्ड पर नहीं आता है. ऐसी स्थिति में लिखित उत्तर पढ़ा जाना चाहिए. इस पर देवनानी उत्तर दिया था कि लिखित उत्तर सभी सदस्यों के पास पहुंचता है. साथ में ऐसे में लिखित उत्तर नहीं पढ़ने से समय की बचत भी होती है. स्पीकर वासुदेव जब फिर से यह प्रबंध दे रहे थे तो शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी बहस में कूद पड़े. उन्होंने बोला कि बहस में लिखित उत्तर पढ़ना महत्वपूर्ण होना चाहिए. जोगाराम पटेल ने सदन के नियमों की पुस्तक दिखाते हुए बोला कि इसमें भी लिखित उत्तर पढ़ने का उल्लेख है.

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