राष्ट्रीय

उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे से उनके दादर स्थित आवास पर की मुलाकात

प्रतीकात्मक इशारों से सियासी रणनीति की ओर परिवर्तन का संकेत देते हुए, शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने बुधवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे से उनके दादर स्थित आवास पर मुलाकात की, जिससे बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों से पहले संभावित गठबंधन की नींव रखी जा सके. बिना किसी पूर्व सूचना के, उद्धव, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और विधान पार्षद अनिल परब सुबह राज ठाकरे के आवास शिवतीर्थ पहुँचे और उनसे तथा मनसे के वरिष्ठ नेताओं बाला नंदगांवकर और संदीप देशपांडे से लगभग ढाई घंटे तक बंद कमरे में वार्ता की.

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बैठक से जुड़े नेताओं ने इसे विशुद्ध रूप से सियासी बताया, जिसमें 227 सदस्यीय नगर निकाय के लिए सीटों के बंटवारे पर विस्तृत वार्ता हुई. सूत्रों के अनुसार, मनसे ने लगभग 90 से 95 सीटें मांगी हैं, हालाँकि शिवसेना (यूबीटी) के पदाधिकारियों ने बोला कि निर्वाचन क्षेत्र स्तर की वार्ता के माध्यम से इस आंकड़े को तर्कसंगत बनाया जाएगा. महाराष्ट्र गवर्नमेंट द्वारा मराठी भाषी बहुल राज्य में हिंदी थोपे जाने के आरोपों के बीच कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए ‘तीन-भाषा’ फार्मूले पर अपने विवादास्पद आदेश को वापस लिए जाने के बाद, उद्धव और राज पांच जुलाई को मुंबई में अपनी ‘जीत’ का उत्सव मनाने के लिए मंच पर एक साथ आए थे.
जुलाई के अंत में राज उद्धव ठाकरे को जन्मदिन की शुभकामना देने के लिए उपनगरीय बांद्रा स्थित उनके आवास मातोश्री पर आए थे. हालांकि राज ने 2005 में अविभाजित शिवसेना छोड़ दी थी और इसके लिए उद्धव को उत्तरदायी ठहराया था लेकिन 2024 के विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टियों की हार ने अब तक प्रतिद्वंद्वी समझे जाने वाले दोनों भाईयों को संबंध सुधारने के लिए प्रेरित किया है. राज्य में धन-संपन्न बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) समेत आनें वाले क्षेत्रीय निकाय में चुनावों के मद्देनजर दोनों पार्टियों ने गठबंधन बनाने के पर्याप्त संकेत दिए हैं लेकिन अभी तक औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की गई है. यदि ऐसा होता है तो बीजेपी उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी होगी.

शिवसेना (उबाठा) प्रमुख और मनसे अध्यक्ष के बीच हुई हालिया बैठक के बारे में पूछे जाने पर बीजेपी की मुंबई इकाई के प्रमुख और विधायक अमित साटम ने बुधवार को बोला कि नागरिकों को सियासी नेताओं के बीच पारिवारिक बैठकों की तुलना में विकास की अधिक चिंता है. साटम ने संवाददाताओं से कहा, बात यह नहीं है कि कौन किससे मिल रहा है और उनके पारिवारिक संबंध कैसे हैं बल्कि यह है कि अटल सेतु, कोस्टल रोड, वर्ली और आसपास के इलाकों में बीडीडी चॉल का पुनर्विकास किसने करवाया और पूरे मुंबई में सीसीटीवी कैमरों का विशाल नेटवर्क किसने स्थापित किया. ये प्रमुख मामले हैं और मुंबईवासी इसी आधार पर वोट देंगे.

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