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बीजेपी रवनीत सिंह बिट्टू के खिलाफ केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने दी प्रतिक्रिया

 

बेंगलुरु, . केंद्रीय राज्य मंत्री और बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू के विरुद्ध दर्ज हुई एफआईआर पर केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आईएएनएस से वार्ता में कहा, “रवनीत सिंह बिट्टू ने राहुल गांधी को लेकर जो भी बोला है, वो बात 200 प्रतिशत सच है. कोई देशभक्त राष्ट्र के बाहर जाकर गाली नहीं दे सकता है.Download 11zon 2024 09 20t111339. 423

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केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “इंदिरा गांधी के बारे में किसी सांसद ने कुछ बोला था तो तुरंत उसकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी. उस समय के तत्कालीन मंत्री कमलापति त्रिपाठी ने बोला था कि राष्ट्र के अंदर इंदिरा गांधी कांग्रेस पार्टी की लीडर हैं और राष्ट्र के बाहर वह हिंदुस्तान की लीडर हैं. आज वही स्थिति है, राष्ट्र के बाहर नरेंद्र मोदी भी हिंदुस्तान के लीडर हैं.

उन्होंने आगे कहा, “भारत, राष्ट्र और लोकतंत्र को गाली देने का काम कोई देशद्रोही ही कर सकता है. राहुल गांधी ने भी राष्ट्र को गाली दी है, उनकी भी सदस्यता रद्द होनी चाहिए.

गिरिराज सिंह ने कर्नाटक की कांग्रेस पार्टी गवर्नमेंट पर भी प्रश्न उठाए. उन्होंने कहा, “कर्नाटक की कांग्रेस पार्टी गवर्नमेंट यहां विकास के कोई काम नहीं कर रही है और सिर्फ़ मुसलमान तुष्टिकरण कर रही है. मुसलमान तुष्टिकरण करने वाले ये लोग जान लें कि जब तक राष्ट्र में सनातनी हैं, तब तक राष्ट्र में लोकतंत्र सुरक्षित है. कांग्रेस पार्टी का बस चले तो वह बांग्लादेशी घुसपैठियों का भी समर्थन कर दे. झारखंड इसका सीधा सा उदाहरण है, वहां 1952 में 44 प्रतिशत आदिवासी थे, मगर बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण उनकी संख्या 28 फीसदी रह गई है.

उन्होंने कांग्रेस पार्टी द्वारा ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर प्रश्न उठाए जाने पर भी पलटवार किया. उन्होंने कहा, “मल्लिकार्जुन खड़गे ने तो अपने दिल की बात बोल दी और बोला कि यदि 20 सीट अधिक आ गई होती तो वह नरेंद्र मोदी को कारावास में डाल देते. राहुल गांधी की मानसिकता दर्शाती है कि वह इंदिरा गांधी की तरह तानाशाह हैं. आज वो बोल रहे हैं कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ मोदी का एजेंडा है.

गिरिराज सिंह ने आगे कहा, “देश में जब भी चुनाव होता है तो लॉ एंड ऑर्डर की परेशानी पैदा हो जाती है. चुनाव में अधिक खर्चे होते हैं और इसमें राष्ट्र तथा गरीब का पैसा लगता है. क्या वर्ष 1967 से पहले राष्ट्र में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ नहीं था. यदि उस समय था तो क्या वह गलत था? आज राष्ट्र की आवश्यकता है, वन नेशन, वन इलेक्शन.

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