BJP की किस बेरुखी के चलते अजमेर में उमड़ा वसुंधरा राजे का दुख…
Vasundhara Raje News : क्या राजस्थान भाजपा में सबकुछ ठीक चल रहा है या अंदरखाने कोई खींचतान हो रही है? क्या वसुंधराराजे राजस्थान भाजपा में अकेली पड़ रही हैं? क्या राजे के समर्थकों ने पाला बदलना प्रारम्भ कर दिया है? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो राजस्थान की राजनीति में बीते दो दिन से चर्चा में है। इसके पीछे वजह राजे की ओर से दो दिन पहले रविवार को पूर्व मंत्री सांवरलाल जाट की मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में उनके गांव सिरोंज में दिया गया भाषण है। यहां राजे ने सांवरलाल जाट को स्वयं का सच्चा सिपाहसालार बताते हुए बोला था कि अब मौसम और आदमी कब बदल जाते हैं भरोसा नहीं। लोग राजनीति में आजकल नयी दुनिया बसा लेते हैं। एक चेहरे पर कई चेहरा लगा लेते हैं लेकिन सांवरलाल ऐसे नहीं थे।

अधिकतर समर्थक अब पाला बदल चुके हैं
खुद राजे का दर्द जिस तरह छलक रहा है उससे ये ही लग रहा है कि इन प्रश्नों में अधिक नहीं तो थोड़ा तो दम है। सांवरलाल राजे के भरोसेमंद और नजीदीकी नेताओं में से एक जाट नेता थे। अब प्रश्न यह कि राजे का ये दर्द क्यों झलका? वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के नतीजों तक करीब तीन दर्जन विधायक राजे के वफादारों में गिने जाते थे। लेकिन इनमें से अधिकांश अब पाला बदल चुके हैं या फिर राजे के साथ दूसरे नेताओं के खेमें में भी गिने जाने लगे हैं।
राजे के इस दर्द और नाराजगी की दो वजह है
इनमें जोधपुर, कोटा और अजमेर संभाग के कई विधायकों के नाम शामिल हैं। कुछ राजे समर्थक तो मंत्री बनने की आशा में राजे का साथ छोड़ सीएम भजनलाल शर्मा के कैंप में जा चुके हैं। इसी वजह से राजे ने पूर्व उप राष्ट्रपति भैंरो सिंह शेखावत और दिवंगत हो चुके अपने कुछ पुराने वफादार नेताओं का नाम लेते हुए बोला कि यदि शेखावत जिंदा होते तो आज वो मेरी सहायता करने से पीछे नहीं हटते। राजे के इस दर्द और नाराजगी की दो वजह है। सीएम की रेस में मात खाने के बाद राजे के अधिकांश समर्थकों को मंत्रीमंडल में स्थान नहीं मिली थी। वहीं राजे के समर्थक भी अपनी राजनीतिक जमानी बचाने और सत्ता में भागीदारी के लिए धीरे धीरे पाला बदलने लगे हैं।

