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हमें ऐसे व्यक्तियों की आवश्यकता है जो भारतीय मानसिकता के साथ अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य हो : मोदी

Seoul Conference: पीएम मोदी ने शुक्रवार को बोला कि हिंदुस्तान एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है और इस गति को बनाए रखने के लिए राष्ट्र को विभिन्न क्षेत्रों के ऐसे नेताओं की आवश्यकता है, जिनका दृष्टिकोण वैश्विक हो लेकिन मानसिकता भारतीय हो.Download 11zon 2025 02 21t140006. 221

राजधानी के हिंदुस्तान मंडपम में ‘स्कूल ऑफ अल्टीमेट लीडरशिप’ (सोल) सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में पीएम ने बोला कि इस तरह के अंतर्राष्ट्रीय संस्थान सिर्फ़ एक विकल्प नहीं हैं, बल्कि जरूरत हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘हमें ऐसे व्यक्तियों को तैयार करने की जरूरत है जो भारतीय मानसिकता के साथ अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य की समझ रखते हों. इन नेताओं को रणनीतिक फैसला लेने, संकट प्रबंधन और भविष्य की सोच में उत्कृष्टता प्राप्त करनी चाहिए. वैश्विक बाजार में और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए, हमें ऐसे नेताओं की जरूरत है जो वैश्विक व्यापार की गतिशीलता को समझते हैं. यह सोल का काम है.

 

मोदी ने ‘वैश्विक सोच और क्षेत्रीय परवरिश’ वाले विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं की वकालत करते हुए बोला कि हमें ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो हर क्षेत्र में हिंदुस्तान के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को दर्शाए, चाहे वह नौकरशाही हो या कारोबार या कोई अन्य क्षेत्र. उन्होंने बोला कि हर क्षेत्र में नेतृत्व की आवश्यकता है जो राष्ट्र के हितों को विश्व मंच पर पेश करते हुए वैश्विक जटिलताओं और जरूरतों का निवारण ढूंढ सके.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘भारत एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है और यह गति हर क्षेत्र में तेज हो रही है. इस विकास को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए, हमें विश्व स्तरीय नेताओं की जरूरत है. सोल संस्थान इस बदलाव में गेम-चेंजर हो सकते हैं. इस तरह के अंतर्राष्ट्रीय संस्थान सिर्फ़ एक विकल्प नहीं हैं, बल्कि जरूरत हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्र निर्माण के लिए नागरिकों का विकास महत्वपूर्ण है, आदमी निर्माण से देश निर्माण, जन से जगत…किसी भी ऊंचाई को प्राप्त करना है, तो शुरुआत जन से ही प्रारम्भ होता है. हर क्षेत्र में बेहतरीन नेतृत्व का विकास बहुत महत्वपूर्ण है और यह समय की मांग है.” मोदी ने बोला कि सोल की स्थापना ‘विकसित भारत’ की विकास यात्रा में एक बहुत जरूरी और बड़ा कदम है.

उन्होंने बोला कि आज हर भारतीय, 21वीं सदी के ‘विकसित भारत’ के लिए दिन-रात काम कर रहा है और ऐसे में 140 करोड़ लोगों के राष्ट्र में भी हर क्षेत्र में और जीवन के हर पहलू में उत्तम से उत्तम नेतृत्व की आवश्यकता है. पीएम ने बोला कि प्रगति का लक्ष्य रखने वाले किसी भी राष्ट्र को न सिर्फ़ प्राकृतिक संसाधनों बल्कि मानव संसाधनों की भी जरूरत होती है और 21 वीं सदी में राष्ट्र को ऐसे संसाधनों की जरूरत है जो नवाचार और कौशल को कारगर ढंग से आगे बढ़ा सकें.

इस संदर्भ में उन्होंने गुजरात का उदाहरण दिया और बोला कि प्राकृतिक संसाधनों की कमी के कारण अलग राज्य के रूप में इसके भविष्य को लेकर प्रश्न उठते रहे हैं. उन्होंने बोला कि हालांकि, राज्य आज अपने नेताओं के कारण बहुत अच्छा कर रहा है. उन्होंने बोला कि यहां हीरे की खदान नहीं है, लेकिन दुनिया में 10 में से नौ हीरे गुजराती के हाथों से गुजरते हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘हर क्षेत्र में कौशल की जरूरत होती है और नेतृत्व विकास कोई अपवाद नहीं है. इसमें नयी क्षमताओं की आवश्यकता है. हमें वैज्ञानिक रूप से नेतृत्व विकास में तेजी लानी चाहिए और सोल इस बदलाव में जरूरी किरदार निभाएगा.

उन्होंने बोला कि आने वाले समय में जब कूटनीति से लेकर प्रौद्योगिकी नवोन्मेष तक एक नए नेतृत्व को आगे बढ़ाएंगे तो सारे क्षेत्रों में हिंदुस्तान का असर कई गुना बढ़ेगा.

उन्होंने कहा, ‘‘यानी एक तरह से हिंदुस्तान का पूरा दृष्टिकोण और भविष्य एक मजबूत नेतृत्व वाली पीढ़ी पर निर्भर होगा, इसलिए हमें वैश्विक सोच और क्षेत्रीय संस्कारों के साथ आगे बढ़ना है.

सम्‍मेलन में मुख्य भाषण भूटान के पीएम दासो शेरिंग तोग्बे का हुआ. दो दिन के इस सम्‍मेलन में राजनीति, खेल, कला, मीडिया, आध्‍यात्‍म, लोकनीति, व्‍यापार और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी हस्तियां अपनी कामयाबी की गाथा साझा करेंगी.

 

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