West Champaren: बाघ के हमले में महिला की हुई मौत, जंगल में मिला सिर्फ एक अंग…
जिले के वनवर्ती क्षेत्रों में वन्य जीवों और इंसानों के बीच संघर्ष के मुद्दे बढ़ते ही जा रहे हैं। साल 2025 के शुरुआती महीनों से लेकर अबतक ऐसे दर्जनों मुद्दे सामने आ चुके हैं, जिनमें मानव और वन्य जीव के बीच हुए संघर्ष में एक दूसरे की मृत्यु भी दर्ज की गई है। मुख्य रूप से ज़िले के गौनाहा और रामनगर प्रखंड के वन वर्ती क्षेत्रों से ऐसे कई मुद्दे सामने आ चुके हैं, जिनमें जंगल के सबसे बड़े प्रीडेटर बाघ द्वारा इंसानों को अपना निवाला तक बनाया गया है। VTR के इस क्षेत्र में बाघ द्वारा चरवाहे पर हमले की घटना को अभी महीने दिन भी पूरे नहीं हुए कि एक और मुद्दा सामने आ गया है।

जंगल से निकल बाघ ने स्त्री को दबोचा
दरअसल, गुरुवार 11 सितंबर को रामनगर स्थित गोबर्धना के घने जंगलों से बाहर निकल एक बाघ ने सरेह में बकरी चरा रही एक वृद्ध स्त्री को अपना शिकार बना लिया। क्षेत्रीय लोगों की माने तो गुरुवार को शाम पांच बजे के आस पास स्त्री सरेह में बकरी चरा रही थी। इस दौरान पास के जंगल से एक बाघ निकलकर स्त्री की तरफ झपटा और उसकी गर्दन को जबड़े में दबोच कर क़रीब 200 मीटर तक घसीटता हुआ ले गया।
गर्दन दबोच जंगल के भीतर के गया बाघ
बाघ के इस हमले में स्त्री की मृत्यु हो गई है।सबसे भयावह बात यह है कि स्त्री की तलाश में जंगल की तरफ गए ग्रामीण और वन्य कर्मियों को केवल उसका फटा हुआ कपड़ा और एक पैर ही मिल पाया है। शेष शरीर गायब है। मिली जानकारी के अनुसार, स्त्री का कपड़ा और पैर जंगल में क़रीब 300 मीटर अंदर से बरामद किया गया है। वन क्षेत्र पदाधिकारी सत्यम शर्मा बताते हैं कि घटना की सूचना मिलते ही वनकर्मियों की टीम मौके पर भेजी गई है। बाघ का लोकेशन ट्रेस किया जा रहा है।
गायब है शरीर, केवल एक पैर हुआ बरामद
महिला के परिजनों की माने तो शाम करीब पांच बजे उमछी देवी सोनबरसा गांव से उत्तर, बोटहवा सेमर के पास द्वारदह नदी किनारे बकरी चरा रही थीं। इसी दौरान जंगल से बाघ निकला और उन पर झपट पड़ा। हमले में बाघ ने उमछी देवी को मार डाला और उन्हें खींचकर जंगल की ओर ले जाने लगा। ग्रामीणों के हल्ला करने के बाद बाघ मृतशरीर को जंगल की ओर ले गया। मौके से मृतका के फटे कपड़े और शरीर का एक पैर ही बरामद हो पाया है। गौर करने वाली बात यह है कि घटना स्थल से जंगल की दूरी महज 500 मीटर है। ऐसे में इस घटना से गांव में भय का माहौल है।
किसानों में डर का माहौल
बता दें कि जिले के कुछ प्रखंडों के कुछ गांव जंगल से सटे हुए हैं। ऐसे में किसानों को अपने खेतों में काम करते समय हमेशा खतरे का सामना करना पड़ता है। वे चाहते हैं कि प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम उठाए और वन्यजीवों के हमलों को रोकने के लिए उचित तरीका करे। जंगल में वन्य जीवों की बढ़ती हुई जनसंख्या पर्यावरण के लिए तो ठीक है, लेकिन उचित प्रबंधन न होने की वजह से इसका बुरा असर इंसानों पर पड़ रहा है। जिससे मानव और वन्य जीव के बीच का संघर्ष भी बढ़ रहा है।

