VIP कैदियों के लिए क्या होते हैं जेल के कायदे, कानून और सुविधाएं, जानिए
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल तिहाड़ कारावास में भेज दिए गए हैं। वहां अभी वह 15 अप्रैल तक रहेंगे, उसके बाद न्यायालय की सुनवाई में ये तय होगा कि उन्हें इसी कारावास में बरकरार रखा जाएगा या फिर रिहा कर दिया जाएगा। केजरीवाल को घर से बना खाना खाने की अनुमति है, जो रोज उनके लिए आएगा।इसके अतिरिक्त डायबिटीक रोगी होने के कारण उन्हें दवाइयां लेने के साथ शुगरफ्री चाय भी कारावास में दी जाएगी। ये तो नहीं मालूम कि कारावास में उनका स्टेटस वीआईपी कैदी का है या लेकिन कारावास का मेन्युअल कहता है कि कोई मंत्री यदि आर्थिक क्राइम के मामलों में कारावास में बंद है तो उसे वीआईपी कैद बताया जा सकता है। कारावास नियमावली ये भी बताती है कि कारावास में अंडरट्रायल कैदियों के लिए नियम कायदे हैं।

जानते हैं कि ये नियम कायदे क्या हैं। आमतौर पर जब भी कोई विधायक, सांसद, मंत्री या बड़ा उद्योगपति कारावास में जाता है और यदि वह आर्थिक क्राइम के मामलों में अंडरट्रायल है तो स्वयं के सुपीरियर या वीआईपी होने की बात कहते हुए उन सुविधाओं की मांग करता है, जो कारावास में मैन्युअल में उन्हें अलग से दी गई हैं।
सवाल – सुपीरियर क्लास होता क्या है?
– सुपीरियर क्लास के भीतर आने वाली सुविधाओं में बंदी को एक मेज, एक चौकी, अखबार, सोने के लिए लकड़ी का तख्त, दरी, कॉटन की चादर, मच्छरदानी, एक जोड़ी चप्पल, कूलर, बाहर का खाना, कारावास के अदंर भी खाना अलग से बनवाया जा सकता है आदि की सुविधाएं दी जाती हैं। वहीं एक आम बंदी को खाने के लिए एक प्लेट और एक गिलास दिया गया है। सोने के लिए दरी, कम्बल दिया जाता है। उन्हें रहने के लिए अलग छोटी सेल दी जाती हैं। यदि वह किताबें पढ़ने की मांग करें तो वो भी उपलब्ध कराई जाती है।
सवाल – वीआईपी कैदी कौन होते हैं?
– कैदियों को उनकी सामाजिक स्थिति और आर्थिक प्रोफ़ाइल के आधार पर ‘वीआईपी स्थिति’ के लिए आवेदन करने का अधिकार है। आम तौर पर वीआईपी कैदी के लिए पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री, संसद सदस्य (एमपी), राज्य विधायक के सदस्य, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष / उप-वक्ताओं, मौजूदा सांसद / विधायकों और न्यायिक मजिस्ट्रेट को चुना जाता है। ज्यादातर गुनेहगार राजनेताओं के लिए यह विशेष स्थिति प्राप्त करना बेहतर रहने-खाने की प्रबंध कर लेने का प्रवेश द्वार है।
सवाल – कैसी होती हैं वीआईपी सेल, क्या है उनका उद्देश्य?
– हिंदुस्तान में जेलों में वीआईपी सेल का उद्देश्य हमेशा अन्य कैदियों से वीआईपी अभियुक्तों की रक्षा करना और कारावास के बाकी हिस्सों से अलग करना है। गवर्नमेंट इन सेलों की अधिक सुरक्षा और बेहतर रख-रखाव पर खर्च करती है।
भारतीय संविधान के कारावास अधिनियम के मुताबिक, किसी भी कारावास अधिकारी को कैदी को कुछ बेचने या इसके इस्तेमाल की इजाजत देने से फायदा प्राप्त नहीं होना चाहिए। इसी तरह, कारावास की आपूर्ति के लिए किसी भी अनुबंध में अधिकारी को कोई दिलचस्पी नहीं होनी चाहिए; न ही वह कारावास की ओर से या किसी कैदी से संबंधित किसी भी चीज की बिक्री या खरीद से कोई फायदा प्राप्त करेगा।
सवाल – क्या केजरीवाल बाहर से खरीदकर कोई सामान मंगवा सकते हैं?
– कारावास अधिनियम इसकी इजाजत नहीं देता। वह कहता है कि यदि कैदी कोई सामान प्राप्त करता है, पास रखता है या इधर से उधर करता है तो अधिनियम इसे दंडनीय क्राइम मानता है। कई मामलों की सूचना मिली थी जिसमें कैदियों को सेल टेलीफोन का इस्तेमाल करते पाया गया था। कानूनी इसकी स्वीकृति नहीं देता है। हालांकि जेलों का प्रशासन राज्य सरकारों के अधीन आता है, यह कारावास अधिनियम है जिसकी नियम पुस्तिका के रूप में पालन किया जाता है।
सवाल – मॉडल कारावास मैनुअल क्या है?
– प्रत्येक राज्य में कारावास कानून, नियम और विनियमों को बदलने का अधिकार रखने वाले राज्य गवर्नमेंट के साथ अपने कारावास मैनुअल हैं। गृह मंत्रालय ने समिति की सिफारिशों के आधार पर 2003 में मॉडल कारावास मैनुअल तैयार किया था, जिसे जेलों के प्रबंधन और कैदियों के उपचार को नियंत्रित करने वाले कानूनों की समीक्षा के लिए स्थापित किया गया था। मैनुअल यह सुनिश्चित करती है कि कैदियों की “मूलभूत न्यूनतम आवश्यकताएं” जो मानव जीवन की गरिमा के अनुकूल हैं, उन्हें मिलनी चाहिएं। लेकिन यह सख्त जेल काट रहे राजनेताओं या अभिनेताओं को अलग से कोई छूट नहीं देता।
सवाल – वो कैदी जिन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट मिला?
– पूर्व तमिलनाडु के सीएम जयललिता की गिरफ्तारी ऐसा ही एक मुद्दा है। असमान संपत्ति मुद्दे में दोषी, जयललिता ने बैंगलोर सेंट्रल कारावास में वीआईपी सेल में रहीं। कारावास में पांच अन्य वीआईपी सेल कोशिकाएं भी हैं। इन वीआईपी जेलों में एक बार कर्नाटक के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा और जी जनार्दन रेड्डी और एसएन कृष्णिया सेटी जैसे अन्य पूर्व मंत्री भी रहे हैं।
पंजाब में, बीबी जागीर कौर, जिन्हें उनकी बेटी के किडनैपिंग के लिए गुनेहगार ठहराया गया था, को कपूरथला कारावास में शाही इलाज मिला। एक वीडियो फुटेज से पता चला कि कारावास ऑफिसरों ने कारावास में आने पर उसे शुभकामना देने के लिए कैसे पहुंचे। 2जी घोटाले के गुनेहगार कनिमोझी या राष्ट्रमंडल खेलों के घोटाले के अपराधियों को भी वीआईपी इलाज मिला था।
अमर सिंह को तिहाड़ कारावास में वीआईपी कैदियों की सबसे अच्छी देखभाल मिली थी। माना जाता है कि घर से पके हुए भोजन और यूरोपीय शौचालय तक मिला था। चारा घोटाले के मुद्दे में गुनेहगार होने के बावजूद लालू प्रसाद यादव को तिहाड़ कारावास में वीआईपी कैटेगरी का ट्रीटमेंट मिला। सिनेस्टार सलमान खान को भी घर से खाना खाने की अनुमति थी। उन्हें ऑफिसरों के साथ कुर्सी पर भी बैठे देखा गया जबकि अधिकारी खड़े थे।
सवाल – क्या इन पर कभी प्रश्न भी उठे हैं?
– 2014 में दिल्ली की तिहाड़ कारावास के सिक्योरिटी वार्ड में बंद 175 कैदी सात दिनों तक भूख स्ट्राइक पर रहे थे। कारावास के आईजी और पुलिस कमिश्नर को भेजी कम्पलेन में कैदियों ने इल्जाम लगाया कि कारावास ऑफिसरों द्वारा पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला, गोपाल कांडा, उत्तर प्रदेश के बाहुबली सांसद धनंजय कुमार और मनु शर्मा जैसे वीवीआईपी कैदियों को घूस लेकर वीवीआईपी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सवाल – क्या विशेषाधिकार के अनुसार पैसा देकर सुविधाएं पाई जा सकती हैं?
– तिहाड़ कारावास में कैद सहारा इण्डिया परिवार प्रमुख सुब्रत राय ने 57 दिनों के विशेषाधिकारों के लिए 31 लाख रुपये का भुगतान किया था। इनमें एक वातानुकूलित कमरा, पश्चिमी शैली के शौचालय, मोबाइल फोन, वाई-फाई और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएं शामिल थीं। रॉय की कंपनी का बिल एक दिन में 54,400 रुपये आया था। क्योंकि उन्होंने न्यायालय में बोला था कि यदि उन्हें ये सुविधाएं कारावास में नहीं मिलीं तो उनके प्रतिदिन के कारोबार पर असर पड़ेगा।
सवाल – क्या दूसरे कैदियों की तरह केजरीवाल की ड्यूटी भी कारावास के किसी काम में लगाई जाएगी, या उनसे मेहनत कराई जाएगी?
– नहीं, उनके साथ ऐसा नहीं होता, एक तो वह अभी न्यायालय ये सजा याफ्ता कैदी नहीं हैं। दूसरे उनका स्तर विशेषाधिकार कैदी का है, लिहाजा अभी उनसे वहां मेहनत का कोई काम नहीं कराया जा सकता है और ना ही उनकी ड्यूटी कारावास के किसी काम में लगाई जा सकती है।

