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सफेद कपड़ों में लोगों की बात करने वाले अमरमणि त्रिपाठी ने आखिर किया क्या था,जानिए पूरा सच

Madhumita Shukla Murder Case: अतीत में किए गए गुनाह की सजा में कारावास मिली लेकिन वर्तमान में अच्छे आचरण का पुरस्कार मिला और मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में सजा काट रहे  उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री रहे अमरमणि त्रिपाठी को कारावास से रिहाई मिल गई है उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट ने अच्छे आचरण का हवाला देकर उन्हें और उनकी पत्नी को पूरी सजा काटने से पहले ही रिहा करने का आदेश दिया सफेद कपड़ों में लोगों की बात करने वाले अमरमणि त्रिपाठी ने आखिर किया क्या था कि उन्हें सजा मिली इसके लिए थोड़ा पीछे चलना होगा

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2003 की गर्मी का महीना था लखनऊ के पेपरमिल कॉलोनी में लोग आम दिनों की तरह अपने कामकाज में व्यस्त थे लेकिन न्यूज चैनलों पर एक पट्टी फ्लैश हुई जिस पर लिखा था कि कवियित्री मधुमिता की हत्या गोली मारकर हत्या वैसे तो मर्डर की खबरें आमतौर आती रहती है जिसे चैनल ब्रेक करते रहते हैं हालांकि यहां मुद्दा थोड़ा अलग निकला, एक पट्टी और फ्लैश हुई कि आरोपी कोई और नहीं बल्कि अमरमणि त्रिपाठी हैं जो माननीय थे गवर्नमेंट की कुर्सी की शोभा भी बढ़ा चुके थे अमरमणि त्रिपाठी के साथ साथ मधुमणि त्रिपाठी, रोहित चतुर्वेदी और संतोष राय का नाम सामने आया इस हत्याकांड के बाद राजनीति गरमा गई

अमरमणि पर लगे थे संगीन आरोप

जैसे जैसे इस काण्ड में जानकारियां सामने आती गईं सफेद कपड़े के चद्दर में लिपटी काली करतूत सामने आ रही थी पुलिसिया जांच में पता चला कि मधुमिता के कविता पाठ से अमरमणि त्रिपाठी इस हद तक प्रभावित हुए कि वो दिल दे बैठे धीरे धीरे मिलना जुलना प्रारम्भ हुआ और दोनों अघोषित तौर पर पति पत्नी की तरह रहने लगेकविता पाठ की दूरी शारीरिक नजदीकी में सिमटी और मधुमिता के पेट में उनका बच्चा पलने लगा लेकिन इस तरह की खबरें आखिर छिपती कहां है गुजरते समय के साथ जब यह समाचार अमरमणि त्रिपाठी की पत्नी मधुमणि के कानों तक पहुंची तो वो बर्दाश्त नहीं कर सकीं मधुमिता को रास्ते से हटाने की योजना पर वो काम करने लगी ठीक समय और ठीक स्थान की तलाश पूरी होते ही मधुमिता के वजूद को हमेशा हमेशा के लिए समाप्त कर दिया

मुलायम गवर्नमेंट को झुकना पड़ा

लखनऊ का मधुमिता शुक्ला काण्ड के समय सूबे में मुलायम की गवर्नमेंट थी, इस घटना के बाद राजनीति गरम हुई और विपक्ष के दबाव के आगे मुलायम को झुकना पड़ा अमरमणि त्रिपाठी जो उनकी गवर्नमेंट के हिस्सा थे उन्हें त्याग-पत्र देना पड़ा लेकिन मधुमिता के परिवार के लिए कानूनी लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाना सरल नहीं था क्योंकि अमरमणि त्रिपाठी केवल खद्दरधारी नेता नहीं थे बल्कि बाहुबली थी मधुमिता मुकदमा को कमजोर करने के लिए उन्होंने पूरजोर प्रयास कि लेकिन पीड़ित परिवार भी ठान चुका था कि सजा दिला कर रहेंगे अनेक दांवपेंचों के इस्तेमाल के बाद भी अमरमणि त्रिपाठी सजा पाने से बच नहीं सके और कारावास जाना पड़ा

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