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जब Pakistan से गिले-शिकवे दूर करने के लिए तैयार थे मनमोहन…

29 सितंबर 2013 को हिंदुस्तान और पाक के तत्कालीन प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त देश महासभा के मौके पर न्यूयॉर्क के एक होटल में केवल एक घंटे से अधिक समय तक मुलाकात की. हाई-प्रोफाइल बैठक के दौरान, दोनों प्रधान मंत्री शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए कश्मीर क्षेत्र में हमलों को रोकने पर सहमत हुए. दोनों ने एक-दूसरे के राष्ट्र की यात्रा का निमंत्रण भी स्वीकार किया. मई में शरीफ के निर्वाचित होने के बाद यह उनकी पहली आमने-सामने की मुलाकात थी. जैसा कि मनमोहन सिंह ने 26 दिसंबर को नयी दिल्ली के एक हॉस्पिटल में आखिरी सांस ली.

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पाकिस्तान पर मनमोहन सिंह का रुख़
पूर्व डिप्टी एनएसए और उनके तत्कालीन करीबी सहयोगी पंकज सरन ने गुरुवार को बोला कि प्रधान मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, मनमोहन सिंह ने पाक के साथ “किसी प्रकार की शांति” स्थापित करने की “बहुत प्रयास की. लेकिन यह काम नहीं आया. हिंदुस्तान के आर्थिक सुधारों के वास्तुकार सिंह का 92 साल की उम्र में गुरुवार रात यहां मृत्यु हो गया. सरन ने सिंह के मृत्यु को बहुत दुर्भाग्यपूर्ण” कहा और उन्हें एक बुद्धिजीवी, विश्व स्तर का अर्थशास्त्री, बल्कि “विनम्रता का प्रतीक आदमी बताया. पूर्व डिप्टी एनएसए ने याद करते हुए बोला कि वह सर्वसम्मति बनाने वाले, बहुत ही सरल आदमी थे, उन्होंने कभी भी पीएम बनने की आशा नहीं की थी, लेकिन उन्होंने 10 वर्ष तक सेवा की.
1982 बैच के आईएफएस अधिकारी सरन ने पहले रूस में हिंदुस्तान के दूत के रूप में काम किया था. उन्होंने बांग्लादेश में राष्ट्र के उच्चायुक्त सहित हिंदुस्तान और विदेशों में विभिन्न पदों पर भी कार्य किया. उन्हें 2018 में उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के रूप में नियुक्त किया गया था. मनमोहन सिंह हमेशा एक महान श्रोता, बुद्धिजीवी, विश्व स्तर के अर्थशास्त्री थे, व्यापक रूप से सम्मानित थे.

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