अमेरिका में राहुल गांधी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा सरकार पर जमकर बोला हमला
नई दिल्ली : कांग्रेस पार्टी नेता राहुल गांधी अमेरिका के दौरे पर हैं. उन्होंने यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीजेपी गवर्नमेंट पर जमकर धावा बोला. इस दौरान वो आरएसएस पर भी हमलावर रहे. लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस पार्टी सांसद राहुल गांधी ने कहा, चुनाव से तीन महीने पहले हमारे सभी बैंक खाते सील कर दिए गए थे… हम इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि अब क्या करना है. मैंने बोला देखेंगे, देखते हैं हम क्या कर सकते हैं… और हम चुनाव में उतर गए.

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, चुनावों के बाद कुछ तो बदल गया है. कुछ लोगों ने बोला कि डर नहीं लगता अब, डर निकल गया अब. मेरे लिए यह दिलचस्प है कि बीजेपी और प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने इतना डर फैलाया, छोटे कारोबारियों पर एजेंसियों का दबाव बनाया, सब कुछ सेकंड में गायब हो गया. उन्हें यह डर फैलाने में सालों लग गए और वे कुछ ही सेकंड में गायब हो गया. संसद में, मैं पीएम को सामने देखता हूं और मैं आपको बता सकता हूं कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का विचार, 56 इंच का सीना, ईश्वर से सीधा संबंध, यह सब अब समाप्त हो गया है, यह सब अब इतिहास है.
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आरएसएस पर कहा, आरएसएस का बोलना है कि कुछ राज्य अन्य राज्यों से कमतर हैं, कुछ भाषाएं दूसरी भाषाओं से पीछे हैं, कुछ धर्म दूसरे धर्मों के बराबर नहीं हैं, और कुछ समुदाय दूसरे समुदायों से कमतर हैं… हर राज्य का अपना इतिहास, परंपरा है… आरएसएस की विचारधारा है कि तमिल, मराठी, बंगाली, मणिपुरी जैसी भाषाएं पिछड़ी हैं… यही लड़ाई है… ये लोग (आरएसएस) हिंदुस्तान को नहीं समझते.
राहुल गांधी ने कहा, चुनावों से पहले हम इस बात पर बल देते रहे कि संस्थानों पर कब्जा कर लिया गया है. हमारे पास निष्पक्ष खेल का मैदान नहीं है. शिक्षा प्रबंध पर आरएसएस का कब्जा है. मीडिया और जांच एजेंसियों पर कब्जा है. हम बार-बार कह रहे थे लेकिन लोग समझ नहीं पा रहे थे… मैंने संविधान उठाकर दिखाना प्रारम्भ किया और जो मैंने बोला था वह अचानक लोगों को समझ आया कि संविधान ही राष्ट्र की वास्तविक ताकत है. यदि संविधान नहीं रहेगा तो राष्ट्र का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा.
गरीब लोगों ने गहराई से समझा कि यह संविधान की रक्षा करने वालों और इसे नष्ट करने वालों के बीच की लड़ाई है. जाति आधारित जनगणना का मामला भी बड़ा हो गया. ये चीजें अचानक एक साथ आने लगीं. मुझे नहीं लगता कि निष्पक्ष चुनाव में बीजेपी 246 के करीब पहुंच सकती है.
उनके पास बहुत अधिक पैसा था. उन्होंने हमारे बैंक खातों को सील कर दिया था… चुनाव आयोग उनकी मर्जी से काम कर रहा था. पूरे अभियान को इस तरह से तैयार किया गया था ताकि नरेंद्र मोदी पूरे राष्ट्र में अपना काम कर सकें. जहां वे कमजोर थे, वहां राज्यों में चुनाव को अलग ढंग से डिजाइन किया गया था और जहां वे मजबूत थे, वहां अलग ढंग से. मैं इसे एक स्वतंत्र चुनाव नहीं मानता. मैं इसे एक नियंत्रित चुनाव मानता हूं

