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कौन मारेगा बाजी, उपराष्ट्रपति पद के लिए शुरू हुआ चुनाव, जानें कैसे होता है मतदान…

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए राधाकृष्णन को उम्मीदवार घोषित किया है. चुनाव 9 सितंबर को होंगे और उसी दिन मतगणना भी होगी. पार्टी के संसदीय बोर्ड ने अपने गठबंधन सहयोगियों और विपक्षी दल के साथ चर्चा के बाद, उपराष्ट्रपति चुनाव को सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए सर्वसम्मति से फैसला लिया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि वाले राधाकृष्णन तमिलनाडु के एक वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं. नड्डा ने ओबीसी नेता और दो बार लोकसभा सदस्य रह चुके राधाकृष्णन को इस कानूनी पद पर सर्वसम्मति से चुने जाने की अपील करते हुए बोला कि बीजेपी नेताओं ने पिछले हफ्ते विपक्षी दलों से बात की थी और आगे भी करते रहेंगे. यदि एक से अधीक उम्मीदवार होते हैं तो उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव कराया जाता है.

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कैसे होता है चुनाव

हालाँकि उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच साल का होता है, लेकिन संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़ा देने के बाद यह पद रिक्त हो गया था. उपराष्ट्रपति का चुनाव संविधान के अनुच्छेद 64 और 68 के प्रावधानों द्वारा शासित होता है. चुनाव आयोग राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952 के अनुसार उपराष्ट्रपति के चुनावों को अधिसूचित करता है.  हिंदुस्तान के उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्यों वाले निर्वाचक मंडल द्वारा आयोजित अप्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से होता है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक अगुवाई प्रणाली द्वारा एकल संक्रमणीय मत द्वारा होगा और इस चुनाव में मतदान गुप्त मतदान द्वारा होगा. जरूरी बात यह है कि इस प्रक्रिया के दौरान सांसद किसी भी पार्टी व्हिप से बाध्य नहीं होते हैं. चुनाव प्रक्रिया राष्ट्रपति चुनाव के समान ही होती है, लेकिन निर्वाचक मंडल अलग होता है. राष्ट्रपति चुनाव में, मनोनीत सदस्य निर्वाचक मंडल का हिस्सा नहीं होते. इसके अलावा, उपराष्ट्रपति के चुनाव में राज्यों की कोई किरदार नहीं होती, जबकि राष्ट्रपति चुनाव में राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य निर्वाचक मंडल का हिस्सा होते हैं.

पात्रता मानदंड क्या हैं?

भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए पात्र होने के लिए, उम्मीदवार को भारतीय नागरिक होना चाहिए, कम से कम 35 साल का होना चाहिए, और राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए योग्य होना चाहिए. उन्हें किसी भी फायदा के पद पर नहीं होना चाहिए. नामांकन को वैध बनाने के लिए, इसे कम से कम 20 प्रस्तावकों और 20 अनुमोदकों द्वारा समर्थित होना चाहिए, जो निर्वाचक मंडल के निर्वाचक हों. उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच साल का होता है, लेकिन वह अपने उत्तराधिकारी के निर्वाचित होने तक इस अवधि से आगे भी पद पर बने रह सकते हैं.

क्या है नंबर गेम?

यदि इण्डिया ब्लॉक अपना उम्मीदवार नहीं उतारता है तो राधाकृष्णन निर्विरोध हिंदुस्तान के अगले उपराष्ट्रपति चुने जाएंगे. हालांकि, इसकी आसार कम है. इस स्थिति में, एनडीए द्वारा चुने गए सीपी राधाकृष्णन और इण्डिया ब्लॉक द्वारा उपराष्ट्रपति पद के लिए चुने गए उम्मीदवार के बीच सीधा मुकाबला होगा. उपराष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाएगा, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य (निर्वाचित और मनोनीत दोनों) शामिल होंगे. मतदान गुप्त मतदान के माध्यम से होगा और उपराष्ट्रपति चुनाव में डाले गए प्रत्येक मत का मूल्य समान होगा, अर्थात 1 (एक).

यदि सीपी राधाकृष्णन इण्डिया ब्लॉक के उम्मीदवार के विरुद्ध चुनाव लड़ते हैं तो उनके उपराष्ट्रपति चुनाव जीतने की आसार अधिक होगी. कुल मिलाकर, निर्वाचक मंडल में वर्तमान में 782 सांसद हैं. फिलहाल लोकसभा में एक और राज्यसभा में पाँच सीटें खाली हैं. इसलिए, उपराष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए, उम्मीदवार को कुल मतों (392 मतों) के आधे से ज़्यादा मत प्राप्त करने होंगे, बशर्ते सभी अपने मताधिकार का प्रयोग करें. एनडीए के पास 427 सदस्यों का सीधा समर्थन प्राप्त है. इसमें लोकसभा के 293 और राज्या के 134 सदस्य हैं. वहीं विपक्ष के साप लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर 355 सांसद हैं. हालांकि अभी तक 133 सांसद को किसी भी पक्ष में नहीं देखा जा रहा है.

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