राष्ट्रीय

आखिर प्रियंका ने वायनाड को ही क्यों चुना…

कांग्रेस ने रायबरेली और वायनाड सीट को लेकर जैसे ही निर्णय का घोषणा किया तो रायबरेली से लेकर वायनाड तक कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ता उत्सव में डूब गए और आतिशबाजी होने लगी. कांग्रेस पार्टी ने बड़ा निर्णय करते हुए घोषणा किया कि राहुल गांधी केरल की वायनाड लोकसभा सीट छोड़ेंगे और उत्तर प्रदेश के रायबरेली से सांसद बने रहेंगे. राहुल की स्थान अब प्रियंका गांधी वायनाड से चुनाव लड़ेंगी. कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बोला कि वैसे रायबरेली सीट से गांधी-नेहरू परिवार का पुराना नाता है इसलिए राहुल रायबरेली सीट से सांसद बने रहेंगे और प्रियंका गांधी वायनाड के लोगों को राहुल की कमी नहीं खलने देंगी.

Priyanka gandhi 1

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इंदिरा गांधी की दक्षिण के रास्ते हुई थी सत्ता में वापसी

बता दें कि गांधी परिवार का दक्षिण हिंदुस्तान से चुनाव लड़ने का लंबा इतिहास है. आरंभ पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने की थी जब उन्होंने 1978 में चिकमंगलूर से चुनाव जीता था. इसके बाद 1980 में मेडक से इंदिरा गांधी सांसद बनीं थी. आपातकाल के बाद रायबरेली सीट से जब इंदिरा गांधी का कमबैक करना कठिन लग रहा था उस समय कर्नाटक की चिकमंगलूर सीट ने उनके सियासी जीवन के लिए संजीवनी का काम किया. 1978 के उपचुनाव में उनके लिए एक सुरक्षित सीट तलाशी गई. ये सीट थी कर्नाटक की चिकमंगलूर सीट. मौजूदा सांसद डीबी गौड़ा से सीट खाली करवाई गई, यहां इंदिरा के सामने चुनौती मुख्यमंत्री वीरेंद्र पाटिल से भिड़ने की थी.

कहा जाता है इस उपचुनाव के प्रचार के लिए इंदिरा गांधी स्वयं 17 से 18 घंटे तक प्रचार किया. चुनाव का नतीजा कांग्रेस पार्टी के पक्ष में आया और इंदिरा गांधी ने 77 हजार वोटों से जीत हासिल की और उनके विपक्ष में खड़े 26 उम्मीदवारों की जमानत बरामद हो गई थी.

बेल्लारी से सांसद बनी थीं सोनिया गांधी

इंदिरा गांधी के बाद सोनिया गांधी 1999 में कर्नाटक के बेल्लारी से सांसद बनीं. हालांकि बाद में उन्होंने ये सीट छोड़ दी थी. राहुल गांधी 2019 और 2024 में केरल की वायनाड सीट से सांसद बने और अब प्रियंका गांधी वायनाड से चुनावी राजनीति में एंट्री कर रही हैं. राहुल के रायबरेली सीट रखने और प्रियंका को वायनाड से चुनाव लड़ाने का निर्णय कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ा निर्णय है क्योंकि प्रियंका का एक ओर चुनावी डेब्यू हो रहा है. दूसरा यदि वो चुनाव जीत जाती हैं तो दोनों भाई बहन पहली बार संसद में मिलकर भाजपा का मुकाबला करेंगे. प्रियंका लंबे समय से राजनीति में एक्टिव तो हैं लेकिन चुनावी राजनीति में पहली बार कदम बढ़ा रही हैं. अब तक वो मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी की चुनाव लड़ने में सहायता करते आई हैं. इसके साथ उनके वायनाड से जीतने पर कांग्रेस पार्टी उत्तर और दक्षिण हिंदुस्तान के बीच अच्छा बैलेंस भी बना सकती है.

राहुल-प्रियंका पर भाजपा हमलावर

उधर, राहुल के रायबरेली सीट रखने और प्रियंका को वायनाड से चुनाव लड़ाने पर भाजपा ने कांग्रेस पार्टी पर परिवारवाद का इल्जाम लगाया है. उत्तर प्रदेश के पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने बोला कि कांग्रेस पार्टी को पता है कि राहुल ने रायबरेली सीट छोड़ी तो दोबारा चुनाव जीत नहीं पाएंगे. उधर, भाजपा नेता अजय आलोक ने राहुल पर वायनाड से भागने का इल्जाम लगाया.

‘राहुल से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी होगी मजबूत’

राहुल गांधी ने बोला कि वायनाड और रायबरेली में से किसी एक को चुनना उनके लिए सरल नहीं था. उन्होंने रायबरेली को चुना है लेकिन वो वायनाड को भूलेंगे नहीं. राहुल के साथ प्रियंका गांधी ने भी बोला कि रायबरेली और वायनाड के लोगों की सेवा अब दोनों भाई-बहन मिलकर करेंगे. कांग्रेस पार्टी दरअसल राहुल के रायबरेली सीट रखने के साथ आगे की रणनीति पर काम कर रही है. रायबरेली सीट गांधी परिवार की परंपरागत सीट है. इस सीट पर राहुल के दादा फिरोज गांधी, दादी इंदिरा गांधी और मां सोनिया गांधी चुनाव लड़ चुकी हैं. उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष अजय राय ने बोला कि राहुल गांधी के रायबरेली सीट रखने से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी मजबूत होगी. 2027 के विधानसभा चुनाव समेत आगे कांग्रेस पार्टी और इण्डिया गठबंधन अच्छा मुकाबला करेगी.

उधर राहुल के विरुद्ध LDF से चुनाव लड़ने वाली एनी राजा ने प्रियंका गांधी को टिकट दिए जाने को उनकी पार्टी का अंदरूनी निर्णय कहा और बोला कि उस सीट से प्रियंका के विरुद्ध लेफ्ट से कौन लड़ेगा ये गठबंधन तय करेगा.

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