Pakistan Hafiz Saeed Release: हाफिज सईद की रिहाई की तैयारी क्यों करने लगा विभाग, क्या है सच्चाई…
Pakistan Hafiz Saeed Release: भारत और पाक के बीच मौजूदा समय में जबरदस्त तनाव देखा जा रहा है। दोनों राष्ट्रों के बीच रॉकेट्स, मिसाइलों और ड्रोन के जरिए हमले हो चुके हैं, जिससे हालात और भी गंभीर हो गए हैं। इसी बीच इस बढ़ते तनाव की एक बड़ी वजह आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा का मुखिया हाफिज सईद बनकर उभरा है। मुंबई 2008 आतंकवादी हमलों का मास्टरमाइंड और अमेरिका द्वारा वांछित इस आतंकी ने अब लाहौर उच्च न्यायालय में अपनी सजा को कम करने या समाप्त करने की गुहार लगाई है

हाफिज सईद को 2019 में आतंकवादी फंडिंग के मामलों में गुनेहगार ठहराकर पाक गवर्नमेंट ने कारावास में डाल दिया था। यह कदम फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट से पाक को निकालने के प्रयासों के अनुसार उठाया गया था। उसे लाहौर की कोट लखपत कारावास में रखा गया है, हालांकि समय-समय पर ऐसी खबरें भी आती रही हैं कि वह वास्तव में कारावास में नहीं, बल्कि किसी सुरक्षित स्थान पर रखा गया है।
अब हाफिज सईद और जमात-उद-दावा के कई अन्य सदस्यों ने लाहौर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है, जिसमें उन्होंने अपनी सजा को रद्द करने की मांग की है। यह याचिका उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय खंडपीठ, जिसमें जस्टिस शाहबाज रिजवी और जस्टिस तारिक महमूद बाजवा शामिल हैं, को सौंपी गई है। हालांकि, इस याचिका पर सुनवाई की कोई साफ तिथि अब तक घोषित नहीं की गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हिंदुस्तान और पाक के बीच पहले से ही युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। जानकारों का मानना है कि यह याचिका पाकिस्तानी फौज के दबाव में दाखिल करवाई गई हो सकती है। संभव है कि पाक एक बार फिर हाफिज सईद जैसे आतंकवादियों के जरिए अपने आतंकवादी नेटवर्क को पुनर्जीवित करने की प्रयास कर रहा हो।
गौरतलब है कि अमेरिका ने हाफिज सईद पर 10 मिलियन $ (करीब 83 करोड़ रुपये) का पुरस्कार घोषित कर रखा है, इसके बावजूद वह लंबे समय तक पाक में खुलेआम घूमता रहा। सिर्फ़ FATF के दबाव में आकर पाक ने उसे कारावास में डालने का नाटक किया था।
अब देखना यह होगा कि पाक की अदालतें इस याचिका पर क्या रुख अपनाती हैं और क्या हाफिज सईद को फिर से खुला छोड़ने की कोई षड्यंत्र रची जा रही है। यह मुद्दा न सिर्फ़ पाक की आतंकवादी नीति पर प्रश्न खड़े करता है, बल्कि दक्षिण एशिया में शांति के लिए एक गंभीर खतरा भी बन सकता है।

