क्या सरकार बंद कर देगी मुफ़्त राशन बांटना…
जयपुर। देश के कई राज्यों में सरकारें निःशुल्क की योजनाएं चला रही हैं लेकिन इनसे राज्य के बजट को बड़ा खतरा है। 16वें वित्त आयोग ने इस मामले पर विचार करने की बात कही है। सोलहवें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने बोला कि वित्त आयोग अपनी रिपोर्ट में राज्यों और केंद्र द्वारा चलाई जा रही निःशुल्क योजनाओं पर विचार करेगा। उन्होंने बोला कि विभिन्न राज्यों और शायद केन्द्र के द्वारा… यह जो पर्सनल फायदा दिये जा रहे हैं उनका वित्तीय स्थिति पर बहुत गहरा असर पड़ता है इसलिये वित्त आयोग को यह भी ध्यान देना होता है कि राष्ट्र में व्यापक आर्थिक और वित्तीय स्थिरता बनी रहे। इसपर निश्चित रूप से वित्त आयोग विचार करेगा।

अरविंद पनगढ़िया ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘व्यक्तिगत फायदा प्रदान करने वाली योजनाएं, जो राज्य और शायद केंद्र द्वारा भी दी जाती हैं, इनका वित्त पर गहरा असर पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए आयोग को यह भी देखना है कि राष्ट्र में व्यापक आर्थिक और वित्तीय स्थिरता बनी रहे। यह हमारे अधिकार क्षेत्र में आता है।’’
वित्तीय स्थिति का आकलन जारी
उन्होंने आगे कहा, ‘‘इसलिए वित्त आयोग निश्चित रूप से इसपर विचार करेगा… क्या कह पायेंगे कुछ? कुछ कह पाएंगे या नहीं कह पायेंगे और क्या कहेंगे उसमें अभी समय लगेगा। उस स्थिति में पहुंचते हुए छह-सात महीने लगेंगे।’’ राष्ट्र में 16वें वित्त आयोग के गठन के बाद आयोग राज्यों की वित्तीय स्थिति का आकलन कर रहा है। राज्यों और केंद्र गवर्नमेंट से विचार-विमर्श के बाद आयोग अपनी सिफारिशें देगा। इससे पहले आयोग के सदस्यों ने सीएम भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, प्रेमचंद बैरवा सहित राज्य गवर्नमेंट के अन्य ऑफिसरों से वार्ता की। बैठक के बाद पनगढ़िया ने कहा, ‘‘राज्य गवर्नमेंट ने केंद्र से करों में मौजूदा 41 फीसदी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 फीसदी हिस्सेदारी मांगी है।’’
उन्होंने बोला कि गवर्नमेंट ने राज्य की भौगोलिक स्थिति, क्षेत्रफल और विशेष परिस्थितियों को देखते हुए राज्यों के बीच हिस्सेदारी के मानकों में भी परिवर्तन की मांग की है। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि बैठक में प्रस्तुतीकरण देते हुए कहा गया कि क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान राष्ट्र का सबसे बड़ा राज्य है और राज्य का दो-तिहाई क्षेत्र रेगिस्तान है। राष्ट्र की 21 फीसदी बंजर भूमि राजस्थान में है और यहां पर पानी की बड़ी कमी है और राज्य इसलिये भी ‘यूनिक’ है क्योंकि इसकी करीब 1,071 किलोमीटर अंतर्राष्ट्रीय सीमा है।
राजस्थान गवर्नमेंट ने बोला कि राज्य में जनसंख्या घनत्व कम होने के कारण लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बुनियादी ढांचे पर अधिक खर्च करना पड़ता है। राजस्थान की 75 फीसदी जनसंख्या गांवों में रहती है। वहीं, यहां कुल जनसंख्या में एससी-एसटी की जनसंख्या भी 31 फीसदी है और राज्य में पानी बड़ी परेशानी है।
राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग पर पनगढ़िया ने कहा, ‘‘अभी इस बारे में कुछ नहीं बोला जा सकता। अभी हमने चार राज्यों का दौरा किया है। हमें 24 और राज्यों का दौरा करना है। उसके बाद ही इस बारे में कुछ बोला जा सकता है।’’

