वनडे मैचों में दो नई गेंदों के इस्तेमाल के नियम को बदलने पर विचार कर रही है आईसीसी
नई दिल्ली। सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के जिस नियम को ‘खतरे की घंटी’ बताते रहे हैं, आईसीसी ने उसे बदलने की तैयारी कर ली है। वर्ल्ड क्रिकेट में शीघ्र ही कुछ नियम बदले दिखेंगे। इनमें वनडे मैचों में दो नयी गेंद का नियम भी शामिल है। इस नियम को बदलने की वजह तेज गेंदबाजों को रिवर्स स्विंग का मौका देना है। अभी दो नयी गेंद होने से रिवर्स स्विंग के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं। 1990 और 2000 के दशक में रिवर्स स्विंग तेज गेंदबाजों का बड़ा हथियार थी, जिससे अच्छे-अच्छे बैटर गच्चा खा जाते थे। पाक के वसीम अकरम और वकार यूनुस की जोड़ी का जादू सिर चढ़कर बोलता था और उनकी सबसे बड़ी ताकत रिवर्स स्विंग ही थी।

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) वनडे मैचों में दो नयी गेंदों के इस्तेमाल के नियम को बदलने पर विचार कर रही है। यह ऐसा विचार है, जिससे वनडे क्रिकेट मैच की पूरी सूरत ही बदल सकती है। अभी वनडे मैचों में एक पारी में दो गेंद का इस्तेमाल होता है। दोनों गेंद दो भिन्न-भिन्न छोर से प्रयोग की जाती हैं। इस तरह एक गेंद का इस्तेमाल अधिकतम 25 ओवर होता है।
पूरी तरह समाप्त नहीं होगा 2 गेंद का नियम
क्रिकबज के अनुसार आईसीसी की क्रिकेट कमेटी ने इस बारे में अपनी सिफारिश भेजी है। हालांकि, नए नियम में भी दो गेंद रहेंगी लेकिन इनका इस्तेमाल बदल जाएगा। प्रस्तावित नियम के अनुसार पहले 25 ओवर तक दोनों छोर से भिन्न-भिन्न गेंदों से बॉलिंग की जाएगी। इसके बाद एक गेंद अंपायर के पास जमा करानी होगी और बाकी 25 ओवर का खेल दूसरी गेंद से होगा। किस गेंद को जमा कराना है और किससे बाकी का खेल होना है, इसे तय करने का निर्णय बॉलिंग टीम के पास होगा।
एक गेंद से कम से कम 37 ओवर का खेल
इसका मतलब यह है कि अब एक गेंद से 12 या 13 ओवर का खेल होगा। दूसरी गेंद से 37 या 38 ओवर फेंके जाएंगे। ऐसा होने से तेज गेंदबाजों के पास रिवर्स स्विंग कराने का मौका होगा। गेंद पुरानी होने से स्पिनरों के लिए भी अधिक मौके बनेंगे। इस नियम को बदलने में सौरव गांगुली की बड़ी किरदार रहने वाली है। गांगुली आईसीसी की क्रिकेट कमेटी के चेयरमैन हैं।
अब दूर होगी सचिन की चिंता
क्रिकेट के जानकार 2 गेंदों के नियम की आलोचना करते रहे हैं। सचिन तेंदुलकर ने खतरे की घंटी या आपदा की रेसिपी कहते रहे हैं। सचिन ने कुछ वर्ष पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर बोला था, ‘वनडे क्रिकेट में दो नयी गेंदें रखना आपदा का परफेक्ट नुस्खा है क्योंकि इससे रिवर्स स्विंग का मौका ही नहीं रह जाता। हमने लंबे समय से रिवर्स स्विंग नहीं देखी है, जो डेथ ओवर्स का एक जरूरी हिस्सा है।’ ब्रेट ली भी तेंदुलकर की बात का समर्थन कर चुके हैं। अब सौरव गांगुली की अध्यक्षता वाली क्रिकेट कमेटी ने सचिन की चिंता दूर करने की ठान ली है। इस कमेटी की इस सिफारिश पर जिम्बाब्वे में चल रही आईसीसी मीटिंग में चर्चा होने की आशा है।
60 सेकंड से अधिक अंतर होने पर मिलेगी सजा
गांगुली की अध्यक्षता वाली कमेटी ने टेस्ट मैचों में धीमे ओवर रेट की परेशानी का निजात भी निकाला है। कमेटी ने सिफारिश की है कि टेस्ट मैचों में दो ओवरों के बीच अधिकतम 60 सेकंड का अंतर होना चाहिए। इस नियम को पूरी गंभीरता से फॉलो कराने के लिए इन-गेम क्लॉक्स का इस्तेमाल प्रारम्भ किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त अंडर-19 वर्ल्ड कप को टी20 फॉर्मेट में कराने का प्रस्ताव भी दिया गया है। अभी यह टूर्नामेंट केवल वनडे फॉर्मेट में होता है।

