साक्षी मलिक ने महिला दिवस को लेकर कही ये बड़ी बात
भारत की मशहूर स्त्री पहलवान साक्षी मलिक ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से वार्ता के दौरान स्त्री दिवस के मौके पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने न सिर्फ़ अपने पर्सनल अनुभवों को उजागर किया, बल्कि समाज में बदलते परिवेश और स्त्रियों की किरदार पर भी प्रकाश डाला. ओलंपिक मेडलिस्ट साक्षी मलिक का मानना है कि स्त्रियों के संघर्ष और सहयोग को सिर्फ़ एक दिन तक सीमित नहीं करना चाहिए.

साक्षी मलिक का बोलना है कि स्त्रियों को किसी एक खास दिन, जैसे 8 मार्च को मनाया जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय स्त्री दिवस तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए. उनके अनुसार, प्रत्येक दिन स्त्री दिवस होना चाहिए. उन्होंने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि एक स्त्री अपने जीवन में कई तरह के संघर्षों का सामना करती है.
साक्षी ने कहा, “जब मैंने कुश्ती प्रारम्भ की थी, तब मुझे बहुत कम संसाधनों के साथ तैयारी करनी पड़ी थी. इन कठिनाइयों के बावजूद मैंने न सिर्फ़ अपने करियर में कामयाबी हासिल की, बल्कि मां बनने के बाद भी अपने कार्यों को संतुलित किया. एक मां के पास कई जिम्मेदारियां होती हैं और वह इन सभी को एक साथ संभाल सकती है. इसलिए, स्त्रियों के सहयोग को प्रत्येक दिन सम्मान मिलना चाहिए.”
साक्षी ने बोला कि पहले हरियाणा में लड़के और लड़कियों के बीच बहुत भेदभाव होता था. लेकिन अब इसमें काफी परिवर्तन आया है. उन्होंने अपने मेडल जीतने के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उनकी कामयाबी ने समाज की सोच को बदलने में सहायता की. स्त्री खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर फिल्में बनीं, जिसके बाद लोग अपनी बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित हुए. आज लड़कियां हर क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं, चाहे वह खेल हो या कोई अन्य क्षेत्र. साक्षी ने हाल के ओलंपिक का उदाहरण दिया, जहां हरियाणा की मनु भाकर ने इतिहास रचकर यह साबित कर दिया कि लड़कियां किसी से कम नहीं हैं.
साक्षी का मानना है कि यदि कोई स्त्री अपने लक्ष्य को लेकर दृढ़ संकल्पित, केंद्रित और अनुशासित है, तो वह कुछ भी हासिल कर सकती है. उन्होंने स्त्री खिलाड़ियों के सामने आने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया.
उन्होंने कहा, “महिला खिलाड़ी का खेल करियर बहुत छोटा होता है. हम इतना लंबा नहीं खींच पाते हैं क्योंकि बहुत सारी चीजें सोचनी पड़ती हैं. मेरा स्त्री खिलाड़ियों को यही संदेश है कि बिना डरे और घबराए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें. हमने भी अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाया, उसके विरुद्ध लड़ना सीखा और आंदोलन भी किया. मैं यही कहूंगी कि आप किसी भी क्षेत्र में हों, कार्य करते रहिए. राष्ट्र के लिए अच्छा कार्य करते रहें.”
हालांकि उन्होंने कुश्ती छोड़ दी है, लेकिन वह खेल से जुड़ी रहना चाहती हैं. बच्चों को सिखाना चाहती हैं. अभी वह अपने कुछ महीनों की बच्ची की देखभाल के साथ-साथ फिटनेस पर भी ध्यान दे रही हैं.
महिला खिलाड़ियों को संदेश देने पर साक्षी ने कहा, “आप अपना लक्ष्य तय कीजिए और ईमानदारी से उस पर कार्य कीजिए. आप 100 फीसदी कामयाबी हासिल करेंगे. मैंने अपने जीवन में यही अनुभव किया है.“

