उत्तर प्रदेश

घोसी और गाजीपुर में पूरी ताकत लगा रखी है सुभासपा ने…

Lok Sabha Election 2024: जाति विशेष की राजनीति से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रियता दिखाने वाली पार्टियां चुनाव प्रारम्भ होने के साथ ही एक-दो जिलों अथवा एक-दो सीटों के छोटे दायरे में सिमट कर रह गई हैं. इस खास पाकेट केकोई गतिविधि नजर नहीं आ रही है. गठबंधन के अनुसार मिली इक्का-दुक्का सीटों पर ही इन दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है, जबकि इनके दावों को देखें तो सभी दल यह बताते हैं कि उनके दल का व्यापक जनाधार पूरे प्रदेश में है.

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ऐसे तीन प्रमुख दल इस समय बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं. इनमें से अपना दल (सोनेलाल) को दो तथा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को बीजेपी ने एक सीट पर अपने सिंबल पर प्रत्याशी उतारने का मौका दिया है. निषाद पार्टी को सिंबल पर चुनाव लड़ने का मौका नहीं दिया है. निषाद पार्टी को सिंबल पर चुनाव लड़ने के लिए कोई सीट नहीं मिली है.

मिर्जापुर और राबर्ट्सगंज के बाहर नहीं दिख रही अद (एस) की सक्रियता
भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी और 2022 विधानसभा चुनाव के बाद राज्य स्तरीय दल का दर्जा हासिल करने वाली पार्टी अपना दल (सोनेलाल) का दावा है कि प्रदेश की कुर्मी जाति बहुल 31 सीटों पर पार्टी का असर है. पूर्वांचल, मध्य उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में यह दल अपना बड़ा आधार बताता है. कुर्मी बिरादरी उत्तर प्रदेश में पटेल, वर्मा, सचान, कटियार, गंगवार, चौधरी, सिंह आदि उपनाम लगाती है. दल के नेताओं का दावा है कि उत्तर प्रदेश में इनकी जनसंख्या 8 से 10 प्रतिशत तक है. मौजूदा समय में इस दल के दो सांसद हैं. इस चुनाव में भी बीजेपी ने गठबंधन के अनुसार इस दल को दो सीटें दी है. दल को इस बार भी मिर्जापुर और राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट ही मिली हैं. इस दल ने अपनी पूरी ताकत इन्हीं दो सीटों पर लगा रखी है. इसके बाहर ये कहीं नजर नहीं आ रहे हैं.

लोकसभा चुनाव में पहली बार एनडीए का हिस्सा बने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) का दावा है कि 28 सीटों पर उनकी बिरादरी की तादाद निर्णायक स्थिति में है. इनमें से अधिकतर सीटें पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश में हैं. उत्तर प्रदेश में राजभर बिरादरी के लोग राजभर के अतिरिक्त भारद्वाज, रजवार, राजवंशी आदि उपनाम लिखते हैं. दल का दावा है कि पूर्वांचल में जनसंख्या 18 से 20 प्रतिशत उनके समाज से है. बीजेपी ने इस दल को घोसी लोकसभा अपने सिंबल पर लड़ने का मौका दिया है. पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर सहित सभी नेता इस समय घोसी और गाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में ही पूरी सक्रियता दिखा रहे हैं.

गोरखपुर और संतकबीरनगर में ही जुटी है निषाद पार्टी
तीसरी सहयोगी निषाद पार्टी गंगा, यमुना, सरयू आदि के किनारे की सभी लोकसभा क्षेत्रों में बिरादरी के व्यापक जनाधार का दावा करती है. यह पार्टी मझवार बिरादरी की राजनीति करती है. उत्तर प्रदेश में इस बिरादरी के लोग निषाद, बिंद, कश्यप आदि लगाते हैं. दल के नेता तो 30 लोकसभा सीटों पर व्यापक जनाधार और जनसंख्या 8 से 10 प्रतिशत बताते हैं. इस चुनाव में निषाद पार्टी के सिंबल से सीधे कोई प्रत्याशी नहीं है. दल के अध्यक्ष डा संजय निषाद के सांसद पुत्र प्रवीण निषाद को बीजेपी ने अपने सिंबल पर संतकबीरनगर से प्रत्याशी बनाया है. इस दल ने सारी गतिविधियां गोरखपुर और संतकबीरनगर तक सीमित रखा है.
तीनों दलों के नेता अपने पाकेट से बाहर तभी निकलते हैं, जब बीजेपी द्वारा किसी कार्यक्रम में उन्हें बुलाया जाता है. बताया जा रहा है कि चुनाव प्रचार जब मध्य उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल में बल पकड़ेगा, उस समय होने वाली बड़ी रैलियों में बीजेपी के मंच पर इन दलों के नेताओं को बुलाया जाएगा.

इंफो-
दलों के दावे
दल                 प्रभाव वाली सीटें                         आबादी

अपना दल (सोनेलाल)  ताकत कुर्मी बाहुल्य 31 सीटें                8 से 10%
सुभासपा            ताकत राजभर बाहुल्य 28 सीटें            4.5%
निषाद पार्टी        ताकत मझवार बाहुल्य 30 सीटें            8 से 10%

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