देखते ही देखते आम से खास हो गईं यूपी की ये 20 सीटें
Important Lok Sabha Seats of UP: यूपी में तो वैसे 80 लोकसभा सीटें हैं, लेकिन 20 अधिक सीटें ऐसी हैं जो देखते ही देखते आम से खास हो गईं. पीएम नरेंद्र मोदी, स्मृति ईरानी, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की वजह से ये सीटें आज राष्ट्र में चर्चाओं में रहती हैं और इनके रिज़ल्ट पर सभी की निगाह होती है. पीएम मोदी की वजह से वाराणसी, स्मृति ईरानी से अमेठी, अखिलेश से आजमगढ़ और कनौज सीट हर चुनावों में चर्चाओं के केंद्र पर रहती है. नरेंद्र मोदी और स्मृति ईरानी के चुनाव लड़ने की स्थिति तो साफ हो चुकी है, लेकिन समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने पर स्थिति अभी तक साफ नहीं हो पाई है.

वाराणसी पर दुनियांभर की नजर
पूर्व सीएम कमलापति त्रिपाठी यहां से साल 1980 में कांग्रेस पार्टी से सांसद बने. साल 2009 में बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी यहीं से जीते. इनके चुनाव लड़ने तक कोई खास चर्चा इस सीट की नहीं हुई, लेकिन नरेंद्र मोदी साल 2014 में पहला चुनाव यहां से लड़े और राष्ट्र के पीएम बने. दूसरी बार साल 2019 में चुनाव लड़े और फिर पीएम बने. उनके दो चुनाव लड़ने और जीतकर पीएम बनने के बाद वाराणसी की पहचान ऐसी बनी की आज यहां के चुनाव पर दुनियां भर की नजर रहती है. राष्ट्र के सबसे खास सीटों में इसकी गिनती होती है. पीएम मोदी तीसरी बार वाराणसी से ही लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं.
मुलायम परिवार की बनी पहचान
समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और मुखिया अखिलेश यादव ने कुछ भिन्न-भिन्न सीटों पर चुनाव लड़कर उसे आम से खास बनाते हुए गढ़ बना दिया. स्थिति यह हो गई कि कुछ सीटों की पहचान मुलायम परिवार के रूप में होने लगी. आज भी इन सीटों पर मुलायम परिवार के सदस्य ही घूम-फिर कर चुनाव लड़ते हैं. संभल: मुलायम सिंह यादव यहां से 1998 और 1999 में दो बार सांसद चुने गए. यहां से भाई प्रो। रामगोपाल भी 2004 में सांसद चुने गए. मैनपुरी से मुलायम 1996, 2004, 2009, 2014 और 2019 में सांसद चुने गए. आजमगढ़ से मुलायम सिंह यादव 2014 और अखिलेश 2019 में चुनाव जीते. कन्नौज से मुलायम सिंह यादव 1999 में जीते. आगे चलकर यहीं से अखिलेश यादव 2004, 2009 और डिंपल यादव 2014 चुनाव जीतकर सांसद बनी. यह सीट आज मुलायम परिवार के रूप में जानी जाती है.
भाजपा की पहचान बनी
भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी बलरामपुर (अब श्रावस्ती) से 1957 और 1967 में जीते. उन्होंने इसके बाद लखनऊ संसदीय सीट को अपना सियासी क्षेत्र बनाया और 1991, 1996, 1998 1999 और 2004 में जीते. बीजेपी से राजनाथ सिंह 2014 और 2019 में जीते. उनके आने के बाद राष्ट्र में चाहे जिस पार्टी की लहर रही हो, लेकिन लखनऊ से बीजेपी को जीत मिलती रही है. राष्ट्र के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पिछले दो चुनावों से यहां जीत रहे हैं. तीसरी बार वह मैदान में हैं. राजनाथ सिंह गाजियाबाद से 2009 में सांसद चुने गए और वीके सिंह 2014 और 2019 में बने.
इन्होंने इसे बनाया खास
– गोरखपुर सीट सीएम योगी आदित्यनाथ के नाम से जानी जाती है. वह स्वयं यहां से 1998, 1999, 2004, 2009, 2014 में जीतकर सांसद बन चुके हैं
– बिजनौर: मायावती यहां से 1989 में और अंबेडकरनगर से भी मायावती चुनाव 1998, 1999 और 2004 में जीती. इटावा से बीएसपी संस्थापक कांशीराम 1991 जीते
– रामपुर: आजम खां वैसे तो 2019 में सांसद बने, लेकिन उनसे इसकी पहचान है
– बागपत: चौधरी चरण सिंह 1977, 1980 और 1984 में सांसद बने. उनके पुत्र चौधरी अजित सिंह 1989, 1991, 1996, 1999, 2004 और 2009 में सांसद चुने गए
– मथुरा: जयंत चौधरी आरएलडी 2009 में सांसद चुने गए. बीजेपी की हेमामालिनी साल 2014 और 2019 में चुनी गईं
– आगरा: राज बब्बर समाजवादी पार्टी से साल 1999 और 2004 में सांसद बने और साल 2019 में सत्यापाल सिंह बघेल सांसद बने
– ऑवला: बीजेपी की मेनका गांधी 2009 में सांसद चुनी गईं. सुल्तानपुर: बीजेपी से वरुण गांधी 2014 और मेनका गांधी 2019 में चुनाव जीती. मेनका पीलीभीत से छह और वरुण दो बार सांसद चुने जा चुके हैं
– रायबरेली: इंदिरा गांधी 1967, 1971, 1980, सोनियां गांधी 2004, 2009, 2014 और 2019 में जीती
– अमेठी: राजीव गांधी 1981, 1984, 1989, 1991 में जीते, राहुल गांधी 2004, 2009 और 2014 में जीते. बीजेपी की स्मृति ईरानी 2019 में जीती. संजय गांधी भी यहां से 1980 में चुनाव जीत चुके हैं
– फतेहपुर: जनता दल विश्वनाथ प्रताप सिंह 1989 और 1991 में जीते
– फूलपुर: जवाहर लाल नेहरू 1952, 1957 और 1962 में जीते. बीजेपी के केशव प्रसाद मौय 2014 में सांसद चुने गए. वीपी सिंह साल 1971 में सांसद रहे
– इलाहाबाद- लाल बहादुर शास्त्री 1957 और 1962, मुरली मनोहर जोशी बीजेपी 1996, 1998 और 1999 और वीपी सिंह 1980 और अमिताभ बच्चन 1984 में जीते

