लखनऊ की कारसेवक पूनम त्रिवेदी ने सुनाई अयोध्या गोलीकांड की कहानी
लखनऊ : अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का प्रथम चरण पूरा हो गया है। 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम होना है। प्राण प्रतिष्ठा में अब केवल 21 दिन ही बाकी हैं। ऐसे में यूपी की राजधानी लखनऊ में आज हम बात करने वाले हैं राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी इकलौती स्त्री कारसेवक पूनम त्रिवेदी जो उस समय केवल 26 वर्ष की थीं और आज 60 वर्ष के ऊपर हो चुकी हैं।

गौरतलब है कि पूनम त्रिवेदी राम मंदिर आंदोलन के समय दुर्गा वाहिनी की अध्यक्ष थी और 2 नवंबर 1990 को अयोध्या में उपस्थित थी जब अयोध्या में कारसेवकों पर पुलिस ने गोलियां बरसाई। जिसमें 40 लोगों की मृत्यु हो गई थी।
सफल रहा मंदिर आंदोलन मगर…
प्राण प्रतिष्ठा के बारे में जब पूनम त्रिवेदी से बात की गई तो वह बहुत भावुक हो गईं और उन्होंने बोला कि राम मंदिर आंदोलन आज सफल हो गया। अब उन सभी लोगों की आत्मा को शांति मिलेगी जिन्होंने अपने प्राण इसमें त्याग दिए, उस आंदोलन को आज आखिरी रूप मिल चुका है। वह कहती हैं कि सबसे दुख की बात यह है की प्राण प्रतिष्ठा देखने के लिए आज उनके साथ के कई लोग उपस्थित नहीं हैं जिन्होंने इस राम मंदिर आंदोलन में जरूरी किरदार निभाई थी।
जब चली गोली तब वहां…
पूनम त्रिवेदी ने बोला कि जब कारसेवकों पर पुलिस ने गोली चलाई थी उस समय वह वहां से काफी दूर थीं क्योंकि वह दुर्गा वाहिनी की अध्यक्ष थीं, ऐसे में उनके ऊपर स्त्रियों और लड़कियों को जोड़ने की जिम्मेदारी थी। इसीलिए जब गोली चली तब वह अयोध्या के ही एक क्षेत्र में स्त्रियों और लड़कियों को बाबरी मस्जिद तक चलने के लिए जागरुक कर रही थीं। इसी दौरान जब गोली चली तो वह भाग कर वहां पहुंची तो देखा कि चारों ओर खून ही खून फैला हुआ था और कई लोगों के मृत शरीर पड़े थे।
प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए मिला निमंत्रण
पूनम त्रिवेदी ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण उन्हें मिला है। वह इसमें जरूर जायेंगी और यदि नहीं भी जा सकीं तो अपने घर के पास उपस्थित मंदिर में स्त्रियों और लड़कियों को जोड़कर भजन कीर्तन करेंगी और ईश्वर राम के आगमन की खुशी में दीपक जलाएंगी।

