उत्तर प्रदेश

83 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्नल विजय सिंह का हृदय गति रुकने से हुआ निधन

लखनऊ के कमांड हॉस्पिटल में 83 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्नल विजय सिंह का बुधवार को दिल गति रुकने से मृत्यु हो गया. गुरुवार को सुल्तानपुर के कुड़वार घाट पर सैन्य सम्मान के साथ उनका आखिरी संस्कार किया गया.

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अयोध्या से आए सिख रेजिमेंट के कर्नल अमित भागी ने उनके बड़े पुत्र सेवानिवृत्त कर्नल संजय सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया. कर्नल विजय सिंह ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपना पराक्रम दिखाया था. वे राष्ट्रपति पदक से सम्मानित थे.

एक किसान परिवार से आने वाले विजय सिंह ने इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट से आरंभ की. बाद में वे कर्नल पद तक पहुंचे. 1987 में उन्होंने श्रीलंका भेजी गई भारतीय शांति सेना बटालियन का नेतृत्व किया. सेवानिवृत्ति के बाद वे अपने गांव फत्तेपुर लौट आए. यहां वे क्षेत्र के युवाओं को सेना में भर्ती के लिए प्रेरित करते रहे. उनका पूरा परिवार राष्ट्र की सेवा में समर्पित है. बड़े पुत्र संजय सिंह ग्रुप कैप्टन से सेवानिवृत्त हैं. उनकी पत्नी अंजली सिंह वर्तमान में ब्रिगेडियर हैं. छोटे पुत्र दिग्विजय सिंह आर्मी कोर में कर्नल के पद पर सेवारत हैं.

मृतक सैनिक के बड़े पुत्र सेवानिवृत्त कैप्टन संजय सिंह बताते हैं, हमारे पिता जमीन से जुड़े हुए थे. गांव में रहकर उन्होंने पढ़ाई की. छह वर्ष की जब उनकी उम्र थी तब उनकी माता गुजर गई, 21 वर्ष की उम्र में उनके पिता का मृत्यु हो गया. उसके बाद से उन्होंने सब कुछ स्वयं किया है. सेना में वे अधिकारी बने, इस पूरे एरिया में लोग उन्हें साहेब कहते थे. क्योंकि वो इकलौते ऑफिसर थे पूरे क्षेत्र में.

बड़े संघर्ष से उनकी जीवन बीती, बड़े सारे लोगों को उन्होंने खोया और बड़े सारो को पाया है. 1971 वार में उन्होंने हिस्सा लिया, राष्ट्रपति की तरफ से उन्हें विशेष सेवा मेडल मिला है. हमारे पिता ने हम लोगों को मोटीवेशन दिया शायद उसी वज़ह से हम लोग एक ठीक मुकाम पर पहुंच गए हैं. मेरा भाई आर्मी में कर्नल है, मैं ग्रुप कैप्टन से सेवानिवृत्त हुआ. मेरी वाइफ एयर फोर्स में चिकित्सक हैं ब्रिगेडियर रैंक पर. कम से कम गांव के आसपास के 100 परिवार फ़ौज में आए होंगे.

 

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