सीएम योगी के एक वार से धराशायी हो जाएगा सपा का पीडीए फार्मूला, जानें किसने दिया आइडिया…

दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक राजनीति में अखिलेश यादव ने अपनी अलग रणनीति के साथ बड़ी छाप छोड़ी थी. अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक यानी पीडीए की राजनीति के जरिए समाजवादी पार्टी को न केवल 37 सीटों पर जीत दिला दी. वहीं, कांग्रेस पार्टी भी 6 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही जो पिछले 10 वर्ष में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था. अखिलेश यादव की इस रणनीति से भाजपा का न केवल ‘अबकी बार 400 पार’ का सपना टूटा था बल्कि 2014 के बाद पहली बार बीजेपी को सोचने पर विवश होना पड़ा था.
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले 2026 में लिटमस टेस्ट
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव अप्रैल-2026 में हो सकते हैं. हालांकि पंचायत चुनाव में उम्मीदवार पार्टी के सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ते लेकिन इन चुनावों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले लिटमस टेस्ट भी बताया जा रहा है. इस बीच पंचायती राज मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी को ऐसा फार्मूला दे दिया जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ी हलचल पैदा कर सकता है. उल्लेखनीय है कि ओपी राजभर ने पंचायत चुनाव से पहले आरक्षण में कोटा प्रबंध को लागू करने की मांग की ताकि वंचित जातियों को भी आरक्षण का असली फायदा मिल सके. ओपी राजभर का बोलना है कि मौजूदा आरक्षण प्रबंध में कुछ चुनिंदा जातियां ही फायदा ले रही हैं, जबकि सैकड़ों जातियां अब भी हाशिये पर हैं.
क्या है ओम प्रकाश राजभर का प्लान?
आपको बता दें कि ओम प्रकाश राजभर ने सीएम से सामाजिक इन्साफ समिति की रिपोर्ट को जल्द लागू करने की भी मांग की है. उल्लेखनीय है कि 2002 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने ओबीसी के आरक्षण में बंटवारे की योजना बनायी थी. राजनाथ सिंह का मकसद था कि जिन पिछड़ी जातियों के लोगों को आरक्षण का अधिक फायदा मिला है उन्हें अब कम फीसदी आरक्षण दिया जाए इस समिति की रिपोर्ट के मुताबिक ओबीसी के आरक्षण आरक्षण का सबसे अधिक फायदा यादव और कुर्मी वर्ग के लोगों को मिला है. समिति ने यादव, कुर्मी, चौरसिया और पटेल जाति के लोगों को 27 फीसदी में से 7 फीसदी आरक्षण देने की वकालत की थी. साथ ही अति पिछड़ा वर्ग 9 फीसदी और सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग 11 फीसदी आरक्षण देने का प्रस्ताव पारित किया था.
बीजेपी के लिए हर हाल में लाभ का सौदा
अगर योगी गवर्नमेंट उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावों में इस फार्मूले को लागू करती है तो भाजपा को हानि कम लाभ अधिक होगा. जहां भाजपा को यादव और कुर्मी समाज की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है वहीं ओबीसी में शामिल गैर यादव और गैर कुर्मी जातियों का वोट भाजपा की तरफ शिफ्ट हो सकता है. वहीं अखिलेश यादव की स्थिति ठीक उस आदमी की तरह हो जाएगी जिसके ‘आगे कुआं पीछे खाई हो’. यदि समाजवादी पार्टी इस फार्मूले को सपोर्ट करती है तो यादव मतदाता नाराज होंगे. जो पार्टी के कोर वोटर हैं वहीं यदि अखिलेश यादव इस फार्मूले का विरोध करते हैं तो पीडीए में दरार पड़ना तय हैं यांनी गैर यादव और गैर कुर्मी जातियों के विरोध का सामना करना पड़ेगा. यानि भाजपा को हर हाल में लाभ होना तय है.

