इन तारीखों में होंगे उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव
यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल कहे जा रहे उपचुनावों का सेट तैयार हो गया है. सभी सीटों पर एक साथ 13 नवंबर को वोटिंग होगी और 23 नवंबर को मतगणना के साथ नतीजे घोषित हो जाएंगे. चुनाव आयोग ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश की दस विधानसभा सीटों में से नौ सीटों पर उपचुनाव का घोषणा कर दिया. अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर फिलहाल उपचुनाव नहीं होगा. इसका कारण अभी सामने नहीं आया है. जिन सीटों पर वोटिंग होगी उनमें मैनपुरी की करहल, अलीगढ़ की खैर, बिजनौर की मीरापुर, प्रयागराज की फूलपुर, गाजियाबाद की गाजियाबाद, मिर्जापुर की मझवां, अम्बेडकरनगर की कटेहरी, संभल की कुंदरकी और कानपुर की सीसामऊ सीट है.

लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस पार्टी के इण्डिया गठबंधन से हारने के बाद बीजेपी के पास 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले माहौल बनाने का उपचुनाव एक मौका है. बीजेपी ने इसके लिए तैयारियां भी काफी समय पहले से प्रारम्भ कर दी हैं. सभी सीटों पर तीन-तीन मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है. सीएम योगी आदित्यनाथ स्वयं लोकसभा चुनाव के बाद सभी दस सीटों पर दौरे कर चुके हैं.
सपा ने दस में से छह सीटों पर प्रत्याशियों का घोषणा कर दिया है. पहली बार उपचुनाव के मैदान में आ रही बीएसपी भी मिल्कीपुर समेत दस में से पांच सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर चुकी है. बीजेपी के प्रत्याशियों का घोषणा भी एक दो दिन में होने की आसार है. बीजेपी दस में से नौ सीटों पर स्वयं उतरने की तैयारी में है. एक सीट मीरापुर जयंत चौधरी की पार्टी रालोद को दी जा सकती है.
लोकसभा चुनाव में भाजपा को सबसे अधिक हानि उत्तर प्रदेश में ही हुआ था. बीजेपी उत्तर प्रदेश की 80 में से पिछली बार 62 सीटें जीती थी. इस बार उसे 33 पर ही जीत मिली. सहयोगी रालोद ने दो और अपना दल ने एक सीट जीती. इससे एनडीए 36 सीटें जीत सका. समाजवादी पार्टी अकेले इससे अधिक 37 सीटें जीत गई. कांग्रेस पार्टी को छह सीटों पर जीती मिली थी.
उपचुनाव का रिज़ल्ट यह तय करेगा कि सपा-कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में मिली जीत एक तुक्का था या भाजपा को आगे भी मुश्किलें झेलनी होंगी. उपचुनाव में भाजपा के सामने चुनौती इसलिए भी अधिक है क्योंकि लोकसभा चुनाव के दौरान इन नौ में से पांच सीटों पर समाजवादी पार्टी को बढ़त मिली है.
सपा-भाजपा की क्या है रणनीति
भाजपा ने हर सीट पर तीन-तीन मंत्रियों को मैदान में उतारा है. अयोध्या की मिल्कीपुर और मैनपुरी की करहल सीट पर चार-चार मंत्री उतारे गए हैं. बीजेपी का बल फिलहाल हिन्दुत्व और विकास कार्यों पर ही वोटिंग कराना है. वहीं, समाजवादी पार्टी एक बार फिर पीडीए के फार्मूले पर काम कर रही है. दस में छह सीटों पर उतारे गए प्रत्याशी भी पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज से हैं.
भाजपा के सामने अधिक चुनौती
उपचुनाव में बीजेपी के सामने चुनौती अधिक मानी जा रही है. सपा-भाजपा दोनों के पास पांच चार महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव के समय उपचुनाव वाली सीटों पर पड़े वोटों को देखें तो समाजवादी पार्टी भारी दिखाई देती है. दस में से छह सीटों पर समाजवादी पार्टी ने बीजेपी पर बढ़त बनाई थी.
पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बीजेपी के पास पांच-पांच सीटें थीं. लोकसभा चुनाव में विधायक से सांसद बने सभी विधायक (प्रवीण पटेल को छोड़कर) अपनी सीटों पर बढ़त हासिल करने में सफल हुए. फूलपुर से सांसद बने बीजेपी विधायक प्रवीण पटेल सिर्फ़ अपनी सीट पर पिछड़ गए थे.
इन विधायकों के इस्तीफे से रिक्त हुई सीटें
मैनपुरी की करहल सीट समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के सांसद बनने से खाली हुई है. इसी तरह अयोध्या की मिल्कीपुर सीट समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद, अम्बेडकरनगर की कटेहरी सीट समाजवादी पार्टी के लालजी वर्मा, संभल की कुंदरकी सीट समाजवादी पार्टी के जियाउर्रहमान बर्क के सांसद बनने से रिक्त हुई.
अलीगढ़ की खैर सीट बीजेपी के अनूप प्रधान वाल्मीकि, बिजनौर की मीरापुर सीट रालोद के चंदन चौहान, प्रयागराज की फूलपुर सीट बीजेपी के प्रवीन पटेल, गाजियाबद की सीट बीजेपी के अतुल गर्ग, मिर्जापुर की मझवां सीट निषाद पार्टी के विनोद बिंद के इस्तीफे से रिक्त हुईं है. कानपुर की सीसामऊ सीट समाजवादी पार्टी विधायक इरफान सोलंकी को सजा के कारण खाली हुई है.

