कृष्ण जन्मभूमि विवाद में मुस्लिम पक्ष को लगा बड़ा झटका
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय को वापस लेने का आह्वान किया है. हम हाई कोर्ट के समक्ष पुनर्विचार याचिका को पुनर्जीवित करने की स्वतंत्रता के साथ वर्तमान विशेष अनुमति याचिका का निपटारा करते हैं.

सुप्रीम न्यायालय ने मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद टकराव से संबंधित 15 मुकदमों को समेकित करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एक नयी याचिका को खारिज कर दिया है. न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय को वापस लेने का आह्वान किया है. हम हाई कोर्ट के समक्ष पुनर्विचार याचिका को पुनर्जीवित करने की स्वतंत्रता के साथ वर्तमान विशेष अनुमति याचिका का निपटारा करते हैं.
समिति के वकील ने बोला कि 11 जनवरी के आदेश को वापस लेने का आवेदन हाई कोर्ट के समक्ष लंबित है. उन्होंने न्यायालय से एक विशिष्ट तिथि पर आवेदन को हाई कोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश देने का निवेदन किया. हालाँकि, पीठ ने ऐसा कोई भी आदेश पारित करने से इनकार कर दिया. 11 जनवरी को, हाई कोर्ट ने इन्साफ के भलाई में निर्देश दिया कि हिंदू वादी द्वारा दाखिल एक आवेदन पर 15 मुकदमों को समेकित किया जाए. हिंदू वादी ने हाई कोर्ट के समक्ष आवेदन में बोला कि 25 सितंबर, 2020 को सिविल न्यायधीश (सीनियर डिवीजन), मथुरा के समक्ष मूल केस दाखिल किए जाने के बाद, 13.37 एकड़ भूमि के संबंध में कई अन्य मुकदमे दाखिल किए गए थे.
उच्च कोर्ट ने आदेश दिया था कि ये मुकदमे समान प्रकृति के हैं. इन मुकदमों में कार्यवाही की जा सकती है और सामान्य साक्ष्य के आधार पर मुकदमों का निर्णय एक साथ किया जा सकता है. न्यायालय का समय बचाने के लिए, होने वाले खर्च को बचाया जा सकता है. पक्षों के लिए, और परस्पर विरोधी निर्णयों से बचने के लिए मुकदमों को एक-दूसरे के साथ समेकित करना इन्साफ के भलाई में समीचीन प्रतीत होता है.

