अयोध्या में नारी सशक्तिकरण का बड़ा कदम, महिलाओं को दी गई वाहन चालन की जानकारी
ड्राइविंग ट्रेनिंग एण्ड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट-उदया चौराहा-अयोध्या में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के जरिए स्त्रियों को वाहन चालन की जानकारी दी गई.

अयोध्या में नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट के निर्देश मुताबिक 100 स्त्रियों को मिशन शक्ति 5.0: ‘ड्राइविंग माय ड्रीम्स’ से जोड़ा गया है. इसके अनुसार अयोध्या में “नारी शक्ति मिशन अभियान” के अनुसार स्त्रियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल ते
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ड्राइविंग ट्रेनिंग एण्ड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट-उदया चौराहा-अयोध्या में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) ऋतु सिंह ने स्त्रियों को फोर-व्हीलर ड्राइविंग की बुनियादी जानकारी दी. कहा कि आज की स्त्री हर क्षेत्र में मर्दों के बराबर कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है.
आरटीओ अयोध्या मंडल (प्रशासन) ऋतु सिंह ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य स्त्रियों में आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें सड़क सुरक्षा तथा वाहन संचालन के मूल सिद्धांतों से परिचित कराना है.
उन्होंने स्त्रियों को यह सिखाया कि गाड़ी को स्टार्ट कैसे किया जाता है, चाबी ठीक ढंग से लगाने का तरीका क्या होता है, साइड मिरर का इस्तेमाल किस प्रकार किया जाता है और ब्रेक, एक्सीलेरेटर और क्लच के ठीक संतुलन को कैसे बनाए रखा जाए.
इस मौके पर उन्होंने बोला कि स्त्रियों को अब किसी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. वे स्वयं अपनी ड्राइवर बन सकती हैं, अपने सपनों को स्वयं दिशा दे सकती हैं. प्रशिक्षण में भाग लेने वाली स्त्रियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता दिखाई और बोला कि इस तरह के अभियान से उन्हें न केवल ड्राइविंग की जानकारी मिली है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है.
कार्यक्रम के दौरान “जागरूकता जागरण अभियान” भी चलाया गया, जिसमें सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक नियमों और आत्मरक्षा के तरीकों पर भी प्रकाश डाला गया.
आरटीओ (प्रशासन) ऋतु सिंह ने यह भी कहा कि आगे आने वाले चरणों में अधिक से अधिक स्त्रियों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि हर स्त्री आत्मनिर्भर बन सके और “नारी से नारायणी” की भावना साकार हो सके.
ड्राइविंग सिम्युलेटर पर स्त्रियों की उत्सुकता अभियान के दौरान स्त्रियों ने ड्राइविंग ट्रेनिंग एण्ड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट कार्यालय में लगाए गए ड्राइविंग सिम्युलेटर पर वाहन संचालन की तकनीक को निकट से सीखा.
ऋतु सिंह और प्रशिक्षक ने कहा कि सिम्युलेटर की सहायता से सड़क की असली स्थिति जैसी अनुभूति होती है, जिससे स्त्रियों को वाहन चलाने का आत्मविश्वास मिलता है. महिलाएं स्टीयरिंग संभालते हुए सड़क पर वाहन चलाने की प्रक्रिया को समझती दिखीं हर स्त्री के चेहरे पर आत्मनिर्भरता की झलक साफ झलक रही थी.
इस दौरान मौजूद आरटीओ ,आरआई राजीव कुमार, प्रशिक्षक ने सिम्युलेटर मशीन की सहायता से ड्राइविंग का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया, जिसे देखकर महिलाएं उत्साहित नजर आईं.
रोड संकेत चिह्नों की पहचान पर भी प्रशिक्षण प्रशिक्षण के दौरान स्त्रियों को रोड संकेत चिह्नों (Traffic Signs) की पहचान और उनके अर्थ समझाए गए. प्रशिक्षकों ने कहा कि सड़क पर लगे संकेत चिह्न किसी भी चालक के लिए “मूक संदेशवाहक” की तरह होते हैं, जो सुरक्षा, दिशा और अनुशासन की जानकारी देते हैं. स्त्रियों को कहा गया कि गोल लाल बॉर्डर वाले संकेत प्रतिबंध (जैसे “नो एंट्री”, “स्पीड लिमिट”) को दर्शाते हैं.
त्रिकोणीय संकेत सावधानी के लिए होते हैं (जैसे “स्लिपरी रोड”, “स्कूल आगे”, “मोड़ आगे”). आयताकार नीले संकेत सूचना देने के लिए होते हैं (जैसे “पार्किंग”, “हॉस्पिटल”, “बस स्टॉप”). स्त्रियों ने उत्साहपूर्वक सभी संकेतों की पहचान की और बोला कि अब वे ट्रैफिक नियमों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगी.
महिलाओं को दी गई जरूरी हेल्पलाइन नंबर की जानकारी वूमेन पावर लाइन 1090,पुलिस इमरजेंसी सेवा 112, स्त्री हेल्पलाइन 181,,चाइल्ड लाइन 1098,एम्बुलेंस सेवा 108, स्वास्थ्य सेवा 102,साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और 1090 – स्त्री पावर लाइन (महिलाओं के लिए हेल्पलाइन) 181 – स्त्री हेल्पलाइन (महिलाओं के लिए इमरजेंसी सहायता) 112 – इमरजेंसी सेवा (पुलिस, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस के लिए),1076 – मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए शिकायतें और सुझाव),1930 – साइबर सुरक्षा हेल्पलाइन (साइबर अपराधों के लिए सहायता).

