बसपा और सपा बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की तैयारी में जुटी
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि वोटर लिस्ट और बूथ स्तर पर काम करने वालों को ही विधायकी का टिकट दिया जाएगा. उधर, मुख्य कॉर्डिनेटर के पद की कमान संभालने के साथ ही बीएसपी सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने संगठन को मजबूती
।
उत्तर प्रदेश के मुखिया की कुर्सी पर बैठने के लिए सपा और बसपा ने अभी से 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी प्रारम्भ कर दी है. बीएसपी और समाजवादी पार्टी दोनों ही बीजेपी को मात देने के लिए बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है. अमित शाह के बूथ मैनेजमेंट की रणनीति ने ही विपक्षी दलों को मात दी है. भाजपा के बूथ मैनेजमेंट केफार्मूले को अब विपक्षी दल भी अपना रहे हैं. दोनों ही दल भाजपा के बूथ मैनेजमेंट का कितना तोड़ निकाल पाए इसका निर्णय भी अगले वर्ष होने वाले पंचायत चुनाव में हो जाएगा. एक तरह से संगठन कितना मजबूत हुआ, इसका लिटमस टेस्ट आनें वाले पंचायत चुनाव ही होगा क्योंकि दोनों ही दल वर्तमान में गांवों में फोकस किए हैं. समाजवादी पार्टी पीडीए पर चर्चा आयोजन को लेकर गांव गांव घूम रही है तो बीएसपी भी ग्रामीण क्षेत्रों में चौपाल लगा रही है.
बात सबसे पहले सपा की
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश की 403 विधानसभा सीट में से 108 विधानसभा सीट पर प्रभारी नियुक्त किया है. यह वो विधानसभा सीटें हैं जहां पहले समाजवादी पार्टी के विधायक हुआ करते थे. इन सीटों पर समाजवादी पार्टी कम अंतर के वोटों से हारी. अब उन सीटों पर दोबारा बूथवार समीक्षा की जा रही है. उन सभी 108 विधानसभा क्षेत्रों में प्रभारी नियुक्त करने के साथ ही जोन, सेक्टर और बूथ प्रभारियों के साथ बैठक की जा रही है. प्रभारी को रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश कार्यालय में जमा करने के लिए बोला गया है ताकि पता चल सके कि जहां कम वोटों से हार हुई, चूक कहां और किस स्तर से हुई.
हटाए जाएंगे निष्क्रिय पदाधिकारी
समाजवादी पार्टी की बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की मासिक बैठक लगातार चल रही है. जिलाध्यक्ष सुजीत यादव लक्कड़ ने साफ किया है कि जोन, सेक्टर और बूथ से जुड़े जो भी पदाधिकारी बीते तीन महीने से बैठक में नहीं आए हैं, उन्हें निष्क्रिय मानते हुए उनके जगह पर नए कार्यकर्ता नियुक्त किए जाएंगे.
गुटबाजी से पाना होगा पार
सपा को जीत का स्वाद चखने के लिए गुटबाजी से पार पाना होगा. हाल के दिनों में विभिन्न मुद्दों पर हुए धरना प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के बड़े चेहरों में गुटबाजी दिखी. बड़े प्रदर्शन में कई चेहरे गायब थे. पीडीए पर चर्चा के दौरान भी जनता के बीच से कई चेहरे गायब दिखे. भाजपा के अंदर भी गुटबाजी है लेकिन बड़े कार्यक्रम में सभी चेहरे साथ साथ दिखते हैं. समाजवादी पार्टी को कार्यकर्ताओं को जोड़ने के लिए सभी को साथ लेकर चलना होगा.
आकाश के रंग में रंगेगी नई टीम
हाल के दिनों में आरक्षण के मामले पर बीएसपी ने अपनी ताकत का एहसास कराया था. भाजपा के बाद बीएसपी में ही कार्यकर्ताओं का हुजूम दिखा था. बीएसपी की बड़ी चुनौती अपने बेस वोट को दोबारा पाने की है. मायावती ने एक बाद फिर अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी की मुख्य धारा में ले आई हैं. मुख्य कॉर्डिनेटर बनने के साथ ही आकाश आनंद ने पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से लेकर राजधानी लखनऊ, मिर्जापुर, झांसी और प्रयागराज में अपनी नयी टीम तैयार की. बात वाराणसी की करें तो यहां मंडल स्तर पर तीन लोगों दिनेश चंद्र गौतम, रामचंद्र गौतम और चिकित्सक विनोद कुमार को प्रभार सौंपा गया है. मंडल स्तर पर तैनात प्रभारियों को बूथ स्तर पर काम करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. पार्टी हाईकमान ने साफ कर दिया है कि पार्टी में निष्क्रिय लोगों को हटाकर युवाओं की नयी टीम तैयार करें.
भीम आर्मी बनी खतरा
बहुजन समाज पार्टी के लिए इस समय उत्तर प्रदेश में चंद्रशेखर की भीम आर्मी खतरा बनती जा रही है. दलित युवाओं में सांसद चंद्रशेखर का काफी क्रेज है. युवा दलित तेजी से भीम आर्मी से जुड़ रहा है, शायद यही वजह रही कि बीएसपी सुप्रीमो को आकाश आनंद को पार्टी में वापस लेने के साथ ही बड़ी जिम्मेदारी भी देनी पड़ी. हालांकि वाराणसी में बीते दिनों हुए प्रदर्शन में भीम आर्मी में युवाओं की जो टीम थी, आकाश आनंद उन्हें अपनी तरफ कैसे लाते हैं, भविष्य में पता चलेगा. आकाश ने अभी पूर्वांचल की मिट्टी को भी ठीक से नहीं देखा है. लेकिन परिवर्तन की बयार में जिस तरह उन्होंने पूर्वांचल के दो जरूरी मंडल वाराणसी और प्रयागराज में नयी टीम खड़ी की है आने वाले समय में बीएसपी को इसका कितना लाभ होगा देखना दिलचस्प होगा क्योंकि समाजवादी पार्टी के पीडीए कार्ड ने शहर से लेकर देहात में हलचल मचा रखी है. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को सिद्धांतों की बात कहते हुए जिस तरह समाजवादी पार्टी चल रही है उसके लिए बीएसपी को कड़ी मेहनत करनी होगी.

