बसपा ने तैयारियां शुरू करने में नहीं की देरी, भाजपा की तर्ज पर कर रही है काम…
लखनऊ : यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए बीएसपी ने अपनी तैयारियां प्रारम्भ कर दी है। बीजेपी की तर्ज पर अब बसपा भी बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जोड़ने का काम करेगी। राजधानी लखनऊ से लेकर मंडल और जिला स्तर तक फोकस किया जा रहा है। एक बूथ पर 5 यूथ अभियान प्रारम्भ करने की योजना बना रही है। लोकसभा चुनाव 2024 में बीएसपी को यूपी में खाता नहीं खुला। अब 2027 में यूपी विधानसभा चुनाव है। इससे पहले बीएसपी अब बूथ स्तर तक अपने संगठन को मजबूत करना चाहती है।

दरअसल, 2012 के बाद से बीएसपी सत्ता की कुर्सी की दूर से है। इसी को लेकर बीएसपी अभी से तैयारियों में जुट गई है। बसपा ने तय किया है कि जब तक बूथ स्तर पर चीजों को मजबूत नहीं किया जाएगा तब तक हालात बेहतर नहीं होंगे। वरिष्ठ सियासी समीक्षक विजय उपाध्याय का मानना है कि बसपा के लिए यह समय काफी मुश्किलों भरा है और उसको तय करना होगा की कैडर बेस पर काम करने वाली इस पार्टी के लिए अब सब कुछ बूथ ही तय करेगा।
सपा क्यों बोलने से बच रही?
उधर, सपा इस पूरे मुद्दे पर खुलकर बोलने से बचती हुई नजर आती है, क्योंकि सपा को पता है कि दलित वोट बैंक पर उसकी नजर है और 2024 के लोकसभा चुनाव में काफी हद तक दलित वोट बैंक उनकी तरफ आया भी था।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमिक जमाई का बोलना है यूपी में जो मुख्य लड़ाई है वह आरएसएस और भाजपा के विरुद्ध है। यह लड़ाई सपा सबसे मजबूती से लड़ रही है। इण्डिया ब्लॉक के सभी साथी इस पूरी मुहिम में सपा के साथ हैं। पूरा प्रदेश भाजपा की गवर्नमेंट ने चौपट कर दिया है। बीजेपी का कोई मिनिस्टर यदि टेलीफोन करता है तो एक एसएचओ बात तक नहीं सुन रहा है।
आकाश आनंद के पार्टी में सक्रिय होने के बाद बसपा में तेजी देखी गई थी, लेकिन बीच में मुद्दा इसलिए ठंडा हो गया, क्योंकि आकाश आनंद को मायावती ने स्वयं किनारे लगा दिया, लेकिन एक बार फिर से बसपा इस बात को तय करने में लगी हुई है कि यदि 2027 की विधानसभा चुनाव में अपने अस्तित्व को बचाना है तो बूथ पर काम करना ही होगा।

