सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के बारे में दिया यह बयान
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बोला कि कार्य ही विधायिका में आपकी यात्रा को बहुत बढ़िया और स्मरणीय बनाएगा. कार्यकाल इस अर्थ में महत्व नहीं रखता कि कितना लंबा कार्य कर रहे हैं, बल्कि जरूरी यह है कि कितने कारगर ढंग से आपने छाप छोड़ी है. उत्तर प्रदेश की दृष्टि से आप छह से सात लाख और उत्तराखंड में साढ़े तीन से चार लाख लोगों की जनसंख्या का नेतृत्व कर रही हैं. यह सौभाग्य लाखों में किसी एक को प्राप्त हो रहा है, इसलिए विधायिका के मंच से हमें भी अपने कार्यों से ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना है, जो औरों के लिए प्रेरणादायी बन सके. विधायिका में आपकी उपस्थिति तभी कारगर हो पाएगी, जब आप आमजन और धरातल से जुड़े मुद्दों को रख पाएंगे. विधायिका के मंच पर कही गई आपकी बात आने वाले समय के लिए धरोहर बनती है.

मुख्यमंत्री ने बुधवार को यूपी और उत्तराखंड विधान मंडल की स्त्री सदस्यों के सम्मेलन में शिरकत की. उन्होंने दोनों अध्यक्षों के प्रति आभार जताते हुए बोला कि यह पल मेरे लिए आह्लादित करने वाला है. मेरा दोनों प्रदेशों से जुड़ाव है, क्योंकि यूपी मेरी कर्मभूमि और उत्तराखंड जन्मभूमि है. ऋतु खंडूरी की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी देश के लिए सरेंडर की है. उनके परिवार से अनुभव और विरासत की अद्भुत परंपराएं जुड़ी हैं.
उन्होंने बोला कि यूपी राष्ट्र की सबसे बड़ी विधानसभा है. यह पिछले ढाई-तीन साल के अंदर इनोवेशन और नए-नए प्रयोगों के लिए जानी जा रही है. उत्तर प्रदेश विधानसभा ने ई-विधान को सफलतापूर्वक लागू कर इसे पेपरलेस किया है. पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी में इन बातों को हम सिर्फ़ बोल ही नहीं सकते, बल्कि उसका अनुभव भी कर सकते हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा ने अनेक फील्ड से जुड़े जानकारों को मंच दिया. सामान्यतः विधानसभा में लोग दलीय प्रतिबद्धता से जुड़े होते हैं, इसलिए कॉमन सहमति नहीं बन पाती है, लेकिन अधिवक्ताओं, अभियांत्रिकी, चिकित्सकों, विज्ञान बैकग्राउंड या भिन्न-भिन्न पक्षों के प्रतिनिधि के साथ ग्रुप में बैठते हैं तो दलीय प्रतिबद्धता से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के बारे में सोचते हैं.
सीएम योगी ने बोला कि प्रगतिशील राष्ट्रों में स्त्रियों का अगुवाई विधायिका में 10 प्रतिशत भी नहीं है. उत्तराखंड में 10 प्रतिशत से थोड़ा ऊपर है. यूपी विधानसभा में यह फीसदी 14 से 15 प्रतिशत है. अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया है, उत्तराखंड में भी इसमें वृद्धि होगी. हिंदुस्तान दुनिया का सबसे बड़ा और प्राचीन लोकतंत्र है. यह हमारे रग-रग में बसा हुआ है. भारतीय लोकतंत्र ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सबको स्वतंत्रता दी है. आधुनिक लोकतंत्र दुनिया में बाद में आया होगा, लेकिन हिंदुस्तान में लोकतंत्र और गणतंत्र की आरंभ ईस्वी से 600 साल पूर्व वैशाली से प्राप्त होती है. हिंदुस्तान में 1952 में पहला चुनाव हुआ तो पुरुष के साथ स्त्रियों को भी मत देने का अधिकार प्राप्त हुआ था. इंग्लैंड में हमसे बाद में मिला. आधुनिक और अन्य राष्ट्रों में स्त्रियों को मताधिकार की ताकत हिंदुस्तान से बहुत बाद में मिली. इस मुद्दे में हिंदुस्तान दुनिया से बहुत आगे है.
उन्होंने बोला कि नर-नारी मिलकर समाज की प्रबंध का संचालन करते हैं और इसकी आरंभ परिवार से होती है. सिर्फ़ गवर्नमेंट के बहाने कोई स्कीम बहुत सफल हो जाए, यह मुश्किल है. इसके लिए समाज को भी सहभागी बनना पड़ेगा. 10 साल के अंदर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हुए कार्य अद्भुत हैं. हर घर में नारी गरिमा के प्रतीक शौचालय बने. 4 करोड़ परिवारों को आवास मिला, उसमें भागीदारी स्त्रियों को मिली. 10 करोड़ से अधिक रसोई गैस के कनेक्शन से स्त्रियों को काफी राहत मिली. राष्ट्र के अंदर नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी पारित हो चुका है. 2029 के बाद हर चुनाव (विधानसभा और संसद) में भी एक तिहाई से अधिक अगुवाई स्त्रियों का होने जा रहा है यानी 14-15 प्रतिशत से बढ़कर यह 33 से 50 प्रतिशत पहुंच सकता है.
सीएम योगी ने बोला कि हमारे यहां 56 प्रतिशत महिलाएं ब्लॉक प्रमुख, 70 प्रतिशत जिला पंचायत अध्यक्ष जीती हैं. क्षेत्रीय निकाय चुनाव, ग्राम प्रधानों में स्त्रियों का अगुवाई बहुत अच्छा है. वे बहुत अच्छा कार्य भी कर रही हैं. विधायिका में स्त्रियों का अगुवाई तब कारगर होगा, जब वे अपने विवेक से फैसला लेकर समाज से जुड़ी योजनाओं में संवेदना का परिचय देंगी. आज महिलाएं हर फील्ड में अगुवाई कर रही हैं. विधायिका में जाने के लिए समाज जीवन के बारे में भी निकट से देखें. कोई पक्ष कमजोर या खराब नहीं होता, उसके बारे में देखने का नजरिया अत्यंत अर्थ रखता है.
मुख्यमंत्री ने बोला कि उत्तर प्रदेश पहले से ही काफी जरूरी रहा है. राष्ट्र की संविधान सभा में 15 में से चार सदस्य यूपी (तब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड एक) के थे. इसमें चार सदस्य कमला चौधरी, सुचेता कृपलानी, बेगम एजाज रसूल, पूर्णिमा बनर्जी थीं. इन लोगों ने संविधान निर्माण की प्रक्रिया में भागीदार बनकर जरूरी किरदार का निर्वहन किया था. स्त्री जैसे घर को व्यवस्थित रूप से संचालित करती हैं, वैसे ही ग्राम पंचायत, क्षेत्रीय निकाय, विधानसभा, लोकसभा में जाकर भी महिलाएं विकास के जरिए उदाहरण प्रस्तुत करें.
सीएम ने उत्तर प्रदेश के अंदर ग्राम पंचायत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए गए कार्यों को गिनाया और कहा कि इससे भी रोजगार का सृजन किया गया. एक गांव कम से कम पांच से सात लोगों को रोजगार मौजूद करा सकता है. स्त्री स्वयंसेवी समूह को सतर्क कर ड्रोन दीदी, बीसी सखी आदि के माध्यम से ग्राम पंचायत को स्वाबलंबी बनाएंगे तो अगल-बगल के गांव भी सीखेंगे. हर विधानसभा क्षेत्र में एक या दो क्षेत्र को उदाहरण बनाइए. आरंभ एक से होगी, लेकिन उदाहरण सबके लिए होगा. गवर्नमेंट और समाज जुड़ेगा तो आदर्श मॉडल बनाने में सफल हो पाएंगे.

