उत्तर प्रदेश

अयोध्या के देवी मंदिरों में भक्तों की उमड़ी भीड़

 

शारदीय नवरात्र के पहले दिन से ही रामनगरी अयोध्या के देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी है. सुबह चार बजे जैसे ही बड़ी देवकाली मंदिर का पट खोला गया और मंगला आरती संपन्न हुई, मंदिर परिसर “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा. श्रद्धालु दूर-दराज से

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मां बड़ी देवकाली को रघुवंशियों की कुलदेवी माना जाता है. मान्यता है कि भगवान राम के जन्म के बाद माता कौशल्या ने बाल्य हालत में उन्हें सबसे पहले अपनी कुलदेवी बड़ी देवकाली के दर्शन कराने के लिए यहां लाया था. यही कारण है कि नवरात्र जैसे पर्व पर यहां भक्तों की भीड़ हर साल कई गुना बढ़ जाती है.

 

अद्वितीय मंदिर: जहां पालने में विराजमान हैं बाल रूप राम

बड़ी देवकाली मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां भगवान राम पालने में लेटे हुए बाल रूप में विराजमान हैं. यह प्रतिमा दुनिया में अपनी तरह की एकमात्र मानी जाती है. भक्तों का विश्वास है कि बालक रूप में विराजमान भगवान का दर्शन करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और बच्चों के जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

प्रधान पुजारी सुनील पाठक बताते हैं – “यह मंदिर त्रेतायुगीन काल से जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि महाराज इक्ष्वाकु, जो भगवान राम के पूर्वज थे, उन्होंने इस मंदिर की स्थापना कराई थी. तभी से रघुवंश के सभी राजा यहां पूजन-अर्चन करते आए हैं.

 

एक ही शिला पर तीनों देवियां विराजमान

बड़ी देवकाली मंदिर की एक और खासियत यह है कि यहां एक ही शिला पर मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती विराजमान हैं. भक्त श्रद्धापूर्वक इन तीनों रूपों का दर्शन कर विधि-विधान से पूजन करते हैं. माना जाता है कि यहां मां की आराधना सर्वसिद्धि दायक है और सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है.

नवरात्र के पहले दिन मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना हुई. सुबह से ही मंदिर परिसर में “जय शैलपुत्री माता” के नारे गूंजते रहे.

रामायण और बड़ी देवकाली मंदिर का अटूट संबंध

धर्मग्रंथों के मुताबिक जब भगवान श्रीराम का जन्म हुआ तो माता कौशल्या ने सवा माह की हालत में बालक राम को लेकर बड़ी देवकाली पहुंचीं. उन्होंने अपने पुत्र के साथ यहां अनुष्ठान कर पूजा की और अपनी कुलदेवी के दर्शन कराए. तभी से परंपरा बनी कि संतान प्राप्ति के बाद माताएं अपने बच्चों को लेकर बड़ी देवकाली के दर्शन करने आती हैं.

पुजारी धनंजय पाठक कहते हैं –”आज भी सैकड़ों महिलाएं अपने नवजात बच्चों को लेकर यहां आती हैं. उनकी मान्यता है कि मां बड़ी देवकाली के आशीर्वाद से संतान स्वस्थ और दीर्घायु होती है.

 

भव्य मंदिर की प्राचीन स्थापत्य कला

मंदिर का स्थापत्य भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच लेता है. मुख्य प्रवेश द्वार पर दोनों ओर शेरों की विशाल मूर्तियां हैं, जो शक्ति और साहस का प्रतीक हैं. द्वार पार करने के बाद एक विशाल कुंड दिखाई देता है. गर्भगृह गोलाकार है और संगमरमर से निर्मित है. इसकी छत पर गुंबद बना है और उस पर माता का लाल ध्वज लहराता है.

मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती की प्रतिमाएं एक साथ विराजमान हैं. इनके दर्शन मात्र से भक्तों के मन में अद्भुत शांति और श्रद्धा का संचार होता है.

 

नवरात्र पर विशेष पूजा-अर्चना

नवरात्र के दौरान प्रत्येक दिन भिन्न-भिन्न स्वरूप की आराधना होती है. इस बार भी मां शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक नौ दिनों तक भक्त श्रद्धापूर्वक पूजन करेंगे.

सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खोले जाते हैं, उसके बाद मंगला आरती होती है. सात बजे पुनः आरती होती है. दोपहर को कपाट बंद रहते हैं और शाम आठ बजे आरती के बाद दिन का समाप्ति होता है.

आस्था के साथ सुरक्षा के इंतजाम

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पुख्ता व्यवस्था किए हैं. बड़ी देवकाली चौकी प्रभारी बृजेंद्र मिश्र ने कहा –”मंदिर परिसर और उसके आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. पुलिस और ट्रैफिक पुलिस लगातार नज़र कर रही है. ताकि भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न हो.

साथ ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए जलपान, चिकित्सा और रेस्टिंग की विशेष प्रबंध की गई है.

 

देश-विदेश से उमड़ रहे श्रद्धालु

नवरात्र के मौके पर न केवल अयोध्या और आसपास के जिलों से बल्कि राष्ट्र के कोने-कोने और विदेशों से भी भक्त यहां पहुंच रहे हैं. कई श्रद्धालु तो परिवार समेत यहां रुककर पूरे नवरात्र व्रत और अनुष्ठान करते हैं.

दिल्ली से आई श्रद्धालु रश्मि अग्रवाल ने बोला –”बड़ी देवकाली के दर्शन के बिना हमारी नवरात्रि अधूरी है. यहां आने से आत्मिक शांति मिलती है.

वहीं नेपाल से आए एक श्रद्धालु परिवार ने कहा कि वे हर वर्ष यहां आते हैं और मां बड़ी देवकाली के दर्शन करके ही नवरात्रि की आरंभ करते हैं.

मंदिर की ऐतिहासिक मान्यता और महिमा

धर्मशास्त्रों और पुराणों में बड़ी देवकाली मंदिर का महत्व विस्तार से वर्णित है. माना जाता है कि यहां की गई पूजा-अर्चना से सभी गुनाह और विघ्न दूर हो जाते हैं. यह भी मान्यता है कि मंदिर के दर्शन मात्र से जीवन की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

इतिहासकार बताते हैं कि यह मंदिर कई आक्रमणों और आपदाओं के बावजूद आज भी वैभवशाली खड़ा है. यह अयोध्या की प्राचीन संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है.

भक्ति, परंपरा और उत्सव का संगम

नवरात्र के दिनों में बड़ी देवकाली मंदिर सिर्फ़ पूजा-अर्चना का जगह नहीं रह जाता बल्कि यहां भक्ति और उत्सव का संगम दिखाई देता है. मंदिर के चारों ओर बाजार सजे रहते हैं, जहां से भक्त पूजन सामग्री खरीदते हैं. मंदिर की ओर जाते हुए रास्ते पर भजन-कीर्तन की ध्वनि गूंजती है.

बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग – सभी अपनी आस्था में लीन होकर मां के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते हैं.

नवरात्र और अयोध्या की पहचान

रामनगरी अयोध्या का नाम भगवान राम और उनके मंदिर से जुड़ा हुआ है, लेकिन यहां की पहचान देवी मंदिरों से भी है. बड़ी देवकाली मंदिर उन्हीं में प्रमुख है. हर वर्ष चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां लाखों भक्त पहुंचते हैं और यह परंपरा सदियों से चली आ रही है.

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