जिला अस्पताल ने खास कैदियों के लिए बढ़ाई सुरक्षा, बनाया गया 2 बेड का अलग वार्ड
बदायूं में कारावास से आने वाले बीमार बंदी और कैदियों के लिए अलग से वार्ड बनाया गया है. सात बेड के इस वार्ड को विशेष नज़र में रखा जाएगा. जबकि कुख्यात बंदियों को दो बेड का सेपरेट वार्ड भी बना है. यह प्रक्रिया इसलिए अपनाई गई है, ताकि कोई बंदी या कैदी कस्टडी से फरार न होने पाए.
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जिला हॉस्पिटल में पुलिस कस्टडी से 17 अगस्त को बंदी फरार हुआ था. फरार होने वाला बंदी धीरेंद्र इस्लामनगर थाना पुलिस ने एनकाउंटर के बाद पकड़ा था. उसकी टांग में गोली लगी थी. एक्सरे रिपोर्ट के अभाव में उसे कारावास से वापस हॉस्पिटल भेजा गया और सुरक्षा में लगे पुलिसवालों की ढिलाई से वो फरार हो गया.
धीरेंद्र फरारी के चंद घंटों बाद दोबारा पकड़ा गया, लेकिन उसके भागने के बाद से पूरे सिस्टम पर प्रश्न उठना लाजिमी था. जहां पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली कठघरे में आई, वहीं हॉस्पिटल प्रशासन की लापरवाही भी कहीं न कहीं उजागर हुई. ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न होने पाए, इसके लिए यहां अलग से वार्ड तैयार किया गया है.
ऐसा है बंदियों का वार्ड आपातकालीन वार्ड के बरामदे में बंदियों का वार्ड बनाया गया है. कुख्यात बंदियों के लिए दो बेड का वार्ड है. इसमें लोहे का दरवाजा और खिड़की है. खिड़की भी उस स्थान खुलती है, जहां हॉस्पिटल की सुरक्षा में तैनात सेवानिवृत्त मिलिट्री पर्सन का केबिन है. एक बेड पर बंदी रहेगा तो दूसरे पर उसकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी. यहां पंखा, आक्सीजन लाइन की प्रबंध भी है.
वहीं इसके ठीक बाहर पांच बेड का अलग से वार्ड है. ताकि एक से अधिक बंदी या कैदी होने पर उन्हें भी भर्ती किया जा सके. वार्ड का गेट आपातकालीन के कमरे में खुलता है लेकिन इसे सुरक्षा के लिहाज से बाहर से बंद रखने का निर्देश स्टाफ को हॉस्पिटल के ऑफिसरों ने दिया है. पुलिसवालों के कहने पर ही यह गेट खुलेगा. इसके लिए खिड़की अलग से बनाई गई है.

