कुत्तों ने बच्चों को बनाया शिकार, दहशत में घरों में दुबके लोग
यूपी के सहारनपुर में आवारा कुत्ते लगातार छोटे बच्चों को अपना निवाला बना रहे हैं। सहारनपुर में आधा दर्जन से अधिक बच्चों को आवारा कुत्तों ने अपना शिकार बना चुके हैं। आवारा कुत्तों के चलते लोग भय में हैं और अपने बच्चों को घरों से बाहर जाने से रोकने लगे हैं। जबकि नगर निगम द्वारा आवारा कुत्तों की जनसंख्या पर रोक लगाने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर भी खोला गया है। जहां पर कुत्तों की नसबंदी की जाती है, लेकिन उसके बावजूद भी लगातार आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ रही है और वह खूंखार नजर आ रहे हैं।

बच्चों को निवाला बना रहे हैं कुत्ते
सहारनपुर में इससे पहले आवारा कुत्तों ने कई बच्चों को अपना निवाला बना चुके हैं। कुत्तों के इन हमलों में 18 फरवरी 2023 में गंगोह के गांव बिलासपुर में रहने वाले विकास गुर्जर का 7 वर्ष का बेटा कान्हा घर के पीछे ही खेलते हुए अपने खेत में चला गया। जहां 7-8 कुत्तों के झुंड ने नोच-नोच कर उसको मार डाला। 20 सितंबर 2024 को रामपुर मनिहारान के गांव मजरा काजीपुरा के विनय का 4 वर्ष का बेटा विशांत खेत में खेल रहा था। कुत्तों के झुंड ने विशांत पर धावा कर मृत्यु के घाट उतार दिया।
वहीं, 8 दिसंबर 2023 गंगोह के मोहल्ला कुरैशियान के रहने वाले अब्दुर्रहमान के घर में आवारा कुत्तों ने एक बकरे एवं बकरी को नोच-नोचकर मार डाला था। 7 नवंबर 2024 गंगोह के सांगाठेडा गांव की जैनब (6), सुमैया (4), सादाना (5) और नबिया (6) मदरसे में पढ़ने गई थीं। वह पढ़कर लौट रही थीं तभी आवारा कुत्तों की छोड़ने सभी पर धावा कर उन्हें घायल कर दिया था।
कुत्तों के हमलों से परिजन परेशान
सहारनपुर के जेजे पुरम निवासी अनिल कटारिया बताते हैं कि उनके 2 छोटे-छोटे बच्चे हैं। जिनको बाहर खेलने जाने से रोक दिया गया है। क्योंकि लगातार आवारा कुत्तों के द्वारा छोटे बच्चों पर धावा कर उनको मृत्यु के घाट उतार देने की घटनाएं देखी जा रही है, जिससे वह लोग भी भय में है। अब प्रशासन को खूंखार होते इन कुत्तों के बारे में कुछ ठोस कदम उठाना होगा।
वहीं, अनिल कटारिया बताते हैं कि जिन मां-बाप ने अपने बच्चों को खो दिया है। उनके दर्द को कोई बाट नहीं सकता है। कुछ लोग आवारा कुत्तों को निवाला डालकर पाल लेते हैं और जब उनको कुछ खाने को नहीं मिलता तो वह बच्चों को नोच-नोच कर खाते हैं। ऐसे लोगों पर कार्रवाई होने चाहिए।
जानें कुत्ते क्यों हो जाते हैं खूंखार
सहारनपुर के पशु डॉक्टर चिकित्सक नीरज राजपूत ने लोकल 18 से कहा कि सड़कों पर घूमने वाले कुत्ते आदमी पर तब धावा करते हैं। जब उनको खाने के लिए भोजन नहीं मिलता है। साथ ही 1 वर्ष का कुत्ता होने जाने पर उसकी नसबंदी जरूर करा देनी चाहिए। साथ ही यदि फीमेल डॉग की बात की जाए तो अपने बच्चों को देने के बाद फीमेल डॉग के अंदर एक अटैकिंग स्थिति पनप जाती है। ऐसे में यदि आवारा कुत्तों को किसी विशेष आदमी के द्वारा खाने में चिकन दिया जा रहा है और उसको चिकन मिलना बंद हो गया है तब भी वह आदमी पर धावा कर देता है।
जानें पशु डॉक्टर ने क्या कहा
पशु डॉक्टर ने कहा कि आवारा कुत्तों को खाने के लिए सादा खाना देते रहना चाहिए, जिससे कि वह भूखे ना रहें और बच्चों पर धावा न करें। साथ ही आवारा कुत्तों को पीटना, मारना नहीं चाहिए। चिकित्सक नीरज ने कहा कि समय-समय पर आवारा कुत्तों की नसबंदी होना बहुत महत्वपूर्ण है, जिससे कि उनके अंदर पनपने वाले हारमोंस समाप्त होते रहें और वह शांत रहें।

