मऊ में शिक्षा विभाग हुआ सख्त
मऊ: यूपी के मऊ में ‘PDA की पाठशाला’ के नाम पर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इस पर शिक्षा विभाग कठोर हो गया है। आज शहर कोतवाली में एक सपा के नेता के विरुद्ध केस दर्ज कराया गया। पाठशाला को अनुमति के बिना लगाने, लोगों की भावनाएं भड़काने और सार्वजनिक शांति भंग करने के इल्जाम में मुकदमा दर्ज किया है। इस पर सपा के घोसी से विधायक सुधाकर सिंह का विवादित बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उनका बोलना है कि केस तो नेताओं का गहना होता है। आइए जानते हैं पूरा मामला…

‘M फॉर मुलायम’ बोलने वाले समाजवादी पार्टी नेता पर ‘एम फॉर मुकदमा’
समाजवादी पार्टी के विद्यार्थी सभा के जिला अध्यक्ष अखिलेश भारती पर शिक्षा विभाग ने गंभीर इल्जाम लगाते हुए केस दर्ज कराया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें अखिलेश भारती सपा की लाल टोपी पहने हुए कुछ स्कूली बच्चों को ‘PDA की पाठशाला’ के अनुसार पढ़ाते नजर आए। वीडियो में वह अंग्रेजी के अक्षर M को M for मुलायम बताते दिखे, जिससे यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ गया। वीडियो वायरल होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग हरकत में आया।
जिलाधिकारी के निर्देश पर खंड शिक्षा अधिकारी ने मऊ शहर कोतवाली में देर रात FIR दर्ज करवाई। एफआईआर में बोला गया कि अखिलेश कुमार भारती ने निजामुद्दीनपुरा नगरक्षेत्र में पीडीए पाठशाला का संचालन किया, जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 का घोर उलंघन है। शिक्षा विभाग द्वारा बिना अनुमति के किसी भी प्रकार का कोई पाठशाला संचालित नही किया जा सकता। अखिलेश द्वारा किए गए उक्त कृत्य से बच्चों के मौलिक अधिकार का हनन और सियासी दुरूपयोग हुआ है साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से विभाग की छवि भी धूमिल की गयी है। अखिलेश द्वारा विद्यालय बंद होने की अफवाह भी फैलाई गई एवं परिसर के आस- पास सियासी गतिविधि संचालित की गई, जो क्राइम की श्रेणी में आता है।
क्या कहे विधायक सुधाकर?
अब इस पूरे मुद्दे पर विधायक सुधाकर सिंह ने कहा, ‘मुकदमा नेताओं का गहना होता है। यदि किसी नेता पर केस नहीं है तो उसका क्या वजूद? केस हो जाने से कुछ नहीं होता है, गवर्नमेंट जितना चाहे केस कर ले। हम डरने वाले नहीं हैं।’ उन्होंने यह भी बोला कि जिन मुद्दों को लेकर PDA की पाठशाला चलाई जा रही है, वे जनहित से जुड़े हैं और गवर्नमेंट इससे घबरा रही है, इसलिए दबाव में आकर मुकदमे कर रही है।
सुधाकर सिंह के इस बयान को सत्ता पक्ष ने गैरजिम्मेदाराना कहा है। वहीं, पुलिस का बोलना है कि PDA की पाठशाला कार्यक्रम के आयोजकों ने न तो किसी प्रकार की अनुमति ली थी और न ही भीड़ नियंत्रण या सुरक्षा की कोई प्रबंध की थी। साथ ही कार्यक्रम में कुछ ऐसे बयान दिए गए जिनसे सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ने की संभावना बनी। इस पूरे मुद्दे ने अब सियासी रंग ले लिया है। एक ओर जहां विपक्ष इसे लोकतंत्र की आवाज दबाने की प्रयास बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे कानून प्रबंध के विरुद्ध षड्यंत्र करार दे रहा है। PDA की पाठशाला लगातार गवर्नमेंट की नीतियों की आलोचना करती रही है और अब इस पर दर्ज केस तथा विधायक का विवादास्पद बयान, दोनों ही आने वाले दिनों में जिले की राजनीति को गर्मा सकते हैं।

