अमेठी के डूड़ी गांव में किसान रामानंद ने की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू
अमेठी जिले के हैरिंग्टनगंज ब्लॉक के ग्राम पंचायत मलेथू बुजुर्ग के पूरे डूड़ी गांव में किसान रामानंद ने एक बहुत महत्वपूर्ण मांग को लेकर शुक्रवार से अनिश्चितकालीन भूख स्ट्राइक प्रारम्भ कर दी है. उनकी मांग है कि गांव में खंडजा (ईंट की पक्की सड़क) का निर्माण कराया जाए, ताकि गांव की बदहाल सड़क और जलभराव की परेशानी से छुटकारा मिल सके.

गांव वालों के मुताबिक, रामानंद को भूखे 20 घंटे से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है. रामानंद का बोलना है कि वे बीते एक वर्ष से लगातार पत्राचार कर रहे हैं. खंड विकास अधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक कई बार गुहार लगाई गई है, लेकिन सुनवाई के नाम पर केवल आश्वासन ही मिला.
एक वर्ष में दर्जनों पत्र, फिर भी नहीं बना खंडजा रामानंद ने कहा कि करीब डेढ़ महीने पहले ऑफिसरों ने एक महीने में काम प्रारम्भ कराने का वादा किया था, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. गांव के रास्ते की हालत इतनी खराब है कि जरा सी बारिश में घुटनों तक पानी भर जाता है. बच्चे विद्यालय नहीं जा पाते, और बीमार लोगों को चारपाई पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है.
कागजों पर हुआ काम गांव वालों ने कहा कि साल 2012 में करीब 100 मीटर तक मिट्टी डालकर रास्ता बनाया गया था. फिर 2022-23 में 250 मीटर खंडजा के लिए 1.11 लाख रुपए का बोर्ड लगाया गया, लेकिन हकीकत में कोई काम नहीं हुआ. न तो मिट्टी की पिटाई हुई और न ही खंडजा डाला गया. ग्रामीणों का इल्जाम है कि यह केवल कागजों तक सीमित “घोषणाएं” हैं, जिनका जमीन पर कोई असर नहीं है.
बच्चों ने भी थामा अनशन का रास्ता अब रामानंद के साथ गांव के विद्यालय जाने वाले बच्चे भी भूख स्ट्राइक पर बैठ गए हैं. हालांकि रामानंद बच्चों को मनाने की प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बच्चे अपनी जिद पर अड़े हुए हैं. उनका बोलना है कि जब तक सड़क नहीं बनती, वे विद्यालय नहीं जाएंगे. यह दृश्य प्रशासन की संवेदनहीनता की पोल खोलता है.
प्रधान और बीडीओ के भिन्न-भिन्न तर्क ग्राम प्रधान प्रतिनिधि आदित्य यादव का बोलना है कि गांव में आपसी टकराव के कारण काम रुका हुआ है. उनका बोलना है कि जब लोग आपसी मनमुटाव छोड़ेंगे, तब ही निर्माण कार्य कराया जाएगा. वहीं, खंड विकास अधिकारी अखिलेश कुमार मिश्र का बोलना है कि मौसम अनुकूल होते ही खंडजा का कार्य प्रारम्भ करा दिया जाएगा.
रामानंद ने दी चेतावनी रामानंद का बोलना है कि वह अभी भी प्रशासन से इन्साफ की आशा कर रहे हैं, लेकिन यदि जल्द ही निवारण नहीं निकला, तो वह खुदकुशी जैसे सख्त कदम उठाने को विवश हो जाएंगे. यह मुद्दा न सिर्फ़ एक सड़क की मांग का है, बल्कि गांव के एक आम नागरिक के आत्मसम्मान और ज़िम्मेदार शासन प्रशासन की परीक्षा का भी है.

