गोरखपुर में खाद-बीज व्यापारियों ने किया हल्लाबोल! जानें क्या है गुस्से का कारण…
खाद और बीज के फुटकर दुकानदारों ने मंगलवार को दुकानें बंद रखीं. उन्होंने साथी पोर्टल और ओवररेटिंग के विरोध में डीएम को ज्ञापन सौंपा. खाद और बीज के फुटकर विक्रेताओं ने पहली बार संगठन बनाकर गोरखपुर में प्रदर्शन किया है. कुछ दिन पहले ही गोरखपुर बीज उर्वरक व्यापार संघ का गठन किया है. मंगलवार को 500 से अधिक व्यापारी एकत्र हुए और प्रदर्शन किया. दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी के

साथी पोर्टल वापस लेने के लिए जमकर की नारेबाजी
संघ के अध्यक्ष श्रद्धानंद तिवारी उर्फ उत्तम बाबा के नेतृत्व में व्यापारी सुबह से ही पंत पार्क में जुटने लगे थे. सभी अपनी दुकानें बंद करके आए थे. व्यापारियों में इसको लेकर काफी आक्रोश था. वे नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचे. व्यापारी साथी पोर्टल की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग कर रहे थे. उनका बोलना है कि इसका प्रशिक्षण दिया गया है. प्रशिक्षण में काफी व्यावहारिक दिक्कतें समझ में आयी हैं.
ओवररेटिंग का मुद्दा भी उठा उर्वरक बेचने वाले व्यापारियों ने ओवररेटिंग का मुद्दा उठाया. इसको लेकर वे काफी आक्रोशित थे. उन्होंने बोला कि जिले में 5 से 6 थोक व्यवसायी हैं. वे टेलीफोन पर बात कर तय दर से अधिक मूल्य पर हमें खाद देते हैं. उर्वरक के व्यापारी सुमित जायसवाल ने कहा कि थोक व्यवसायी से हमें अधिक मूल्य पर खाद मिलती है. लेकिन जब किसानों को उस मूल्य पर दी जाती है तो हमारा गला पकड़ा जाता है. हमारे ऊपर एफआईआर कराई जाती है. थोक कारोबारियों को ओवररेटिंग से रोकना होगा. जिलाधिकारी दीपक मीणा ने ओवररेटिंग के मुद्दे में व्यापारियों, थोक कारोबारियों, खाद कंपनियों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है.
अब जानिए व्यापारियों ने क्या समस्याएं गिनाईं – एक साथ दो भिन्न-भिन्न डिजिटल प्लेटफार्म का संचालन छोटे व्यापारियों के लिए अत्यंत मुश्किल है. – ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की अस्थितरता के कारण पोर्टल का सुचारू संचालन संभव नहीं है. – हर लेन-देन में अतिरिक्त समय लग रहा है, जिससे किसानों को भी कठिनाई हो रही है. – साथी पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने के बाद भी कई बार मैनुअल रिकार्ड की मांग की जाती है. – हर बार आधार प्रमाणीकरण की मांग से किसान असहज होता है. कई बार तकनीकी कारणों से लेन-देन रुक जाता है.
किसानों को अधिक परेशानी संघ के अध्यक्ष श्रद्धानंद तिवारी ने बोला कि इस प्रबंध से किसानों को काफी कठिनाई आ रही है. हर जिले स्तर से इसका विरोध हो रहा है. जिस किसान को खाद दें, उसका आधार कार्ड लें. उसे साथी एप पर अपलोड करना होगा. एक बोरा यूरिया के लिए उसे परेशान होना पड़ रहा है.

