ब्रह्मोस की फर्स्ट बैच तैयार, राजनाथ सिंह आज करेंगे रवाना

योगी गवर्नमेंट ने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट के लिए 80 एकड़ जमीन मुफ़्त आवंटित की थी। इस इकाई की आधारशिला दिसंबर 2021 में रखी गई थी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 11 मई 2025 को इसका औपचारिक शुरुआत किया था।
ब्रह्मोस यूनिट से हर वर्ष 80 से 100 मिसाइलों के निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है। इस यूनिट के प्रारम्भ होने से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि क्षेत्रीय उद्योगों और तकनीकी अनुसंधान को भी बल मिलेगा। दुनिया की सबसे शक्तिशाली सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में गिनी जाने वाली ब्रह्मोस को जमीन, हवा और पानी से लॉन्च किया जा सकता है। इसकी गति डंबी 2.8 से 3 तक है और यह 400 से 800 किलोमीटर की दूरी तक परफेक्ट निशाना साधने में सक्षम है। आज का यह आयोजन हिंदुस्तान की रक्षा तकनीक में ‘मेक इन इंडिया’ की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया जा रहा है।
यह परियोजना न केवल क्षेत्रीय रोजगार उत्पन्न करेगी बल्कि रक्षा क्षेत्र में आयात प्रतिस्थापन और टेक्नोलॉजी-आधारित उद्योग के विकास को भी गति देगी। ब्रह्मोस यूनिट के निर्मित होने से उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर राष्ट्रीय रक्षा विनिर्माण की एक प्रमुख हब बनकर उभर सकता है।
क्या है ब्रह्मोस की खासियत
मिसाइल में फायर-एंड-फॉरगेट क्षमता है: एक बार लॉन्च होने के बाद यह अतिरिक्त इनपुट के बिना ही लक्ष्य को हिट कर सकती है। इसकी प्रारम्भिक रेंज लगभग 290 किमी है; अपग्रेडेड वर्जन 400–500 किमी तक और नवीनतम संस्करणों में लगभग 800 किमी तक पहुंचने की क्षमता बताई जाती है। ब्रह्मोस में स्टेल्थ विशेषताएँ भी हैं, जिससे यह दुश्मन राडार से बचते हुए कारगर धावा कर सकती है। इसको रोकना आसान नहीं होता. यह मिसाइल Su-30MKI जैसे विमानों से भी दागी जा सकती है और पारंपरिक या न्यूक्लियर प्रकार के 200–300 किग्रा तक के वारहेड उठाने में सक्षम है।

