जहां से निकले देश के तमाम स्वतंत्रता सेनानी, वहीं प्रारंभ हुआ तीन दिन का सत्याग्रह…
फिरोजाबाद के गुदाऊं गांव में स्वतंत्रता सेनानियों की याद में स्मृति द्वार बनवाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने तीन दिवसीय सत्याग्रह प्रारम्भ किया है. गांव के 28 स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में प्रवेश द्वार बनाने की मांग पिछले पांच सालों से की जा रही है.

गुदऊं गांव का स्वतंत्रता संग्राम में विशेष सहयोग रहा है. यह गांव यमुना नदी के किनारे स्थित है. गांव के बाहर एक शाला थी, जहां आजादी की योजनाएं बनाई जाती थीं. इन्हीं योजनाओं के अनुसार हिरनगांव रेलवे स्टेशन को जलाया गया था.
वर्ष 1900 से 1947 तक हुए चार आंदोलनों में गांव के लोगों ने एक्टिव भागीदारी की. हिरनगांव रेलवे स्टेशन की घटना के बाद हैदराबाद से एक हजार सैनिकों की बटालियन ने गांव को घेर लिया था. ग्रामीणों ने स्मृति द्वार के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया है. गांव के कृष्ण कुमार कनक ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में अब तक कोई स्मारक नहीं बना है.
छक्कूराम, विशाल यादव, धर्मेंद्र यादव, जेपी यादव समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने इस अभियान में हस्ताक्षर किए हैं. ग्रामीणों का बोलना है कि राष्ट्र की आजादी में गांव के लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, लेकिन आज तक उनकी याद में कोई स्मारक नहीं बनाया गया. ऑफिसरों द्वारा इस मांग की लगातार अनदेखी की जा रही है.
इन्होंने किए हस्ताक्षर छक्कूराम, विशाल यादव, धर्मेंद्र यादव, जेपी यादव, राजकुमार, सत्यवीर, दीपक यादव, सनी यादव, आशीष यादव, निखिल यादव, प्रमोद, सनी यादव, श्रीभगवान, विवेक, मोहर सिंह, विपिन यादव सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने हस्ताक्षर किए.
ये थे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी छविराम सिंह यादव, जौम सिंह वाल्मीकि, एवरन सिंह यादव, भूपत सिंह यादव, महाराज सिंह यादव, धनवंत सिंह यादव, श्रीयुत श्रीराम यादव, तेजपाल निषाद, किशनलाल यादव, मोतीराम यादव, बालकराम यादव, पोखलाल यादव, श्रीकुमार जी लाल यादव, पातीराम यादव, सुम्मेर सिंह जाटव, लीलाधर बघेल, दीपचंद्र यादव, हिंदुस्तान सिंह यादव, हरि ज्ञान सिंह यादव, गुलजारी लाल यादव, ग्याप्रसाद यादव, गंभर्व सिंह यादव, पंडित रामरक्षपाल शर्मा, गीतम सिंह यादव, मथुरा प्रसाद यादव आदि हैं.

