Gorakhpur News : सावधान! आपकी दिवाली की मिठाई खतरे में, FSD ने चीनी के खिलौनों का किया पर्दाफाश
दीपावली और अन्य त्योहारों पर बाजारों में रंग-बिरंगे चीनी से बने हाथी-घोड़े, शेर, मीनार, मछली, मुर्गा, झोपड़ी और ताजमहल जैसी मिठाइयों की धूम रहती है। इन मीठे खिलौनों को देखकर बच्चों के साथ-साथ बड़े भी ललच उठते हैं। दशहरा से लेकर छठ महापर्व तक इसकी डिमांड तेजी से बढ़ जाती है। ग्रामीण मेलों में तो इनका व्यापार सबसे अधिक देखने को मिलता है। लेकिन मिठास की इस परंपरा के पीछे स्वास्थ्य के लिए खतरे भी छिपे हैं। कारोबारियों ने अधिक बिक्री और आकर्षण बढ़ाने के लिए इन खिलौनों में ऐसे रंग मिलाने प्रारम्भ कर दिए हैं जो घातक साबित हो सकता है। वहीं खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) विभाग बार-बार चेतावनी दे रहा है कि, ये रंग स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक हैं। जानकारों के अनुसार, ये रंग पेट में जाने के बाद बाहर नहीं निकलते और आंतों में जमा होकर कैंसर, लिवर डैमेज जैसी गंभीर रोंगों का कारण बन सकते हैं।

गौरतलब है कि पहले के समय में ये खिलौने सिर्फ़ चीनी और प्राकृतिक खाद्य रंगों से बनाए जाते थे। उस दौर में लोग अधिक शारीरिक श्रम करते थे, इसलिए इन्हें खाने के बाद कोई हानि नहीं होता था। लेकिन आजकल सस्ते और नकली रंगों के प्रयोग से यह मिठाई स्वास्थ्य के लिए जोखिम बन चुकी है।
मिठाई बनाने की प्रक्रिया
जानकारों के अनुसार, 10 किलो चीनी से लगभग 9 किलो खिलौने बनते हैं। पहले चीनी की गाढ़ी चाशनी तैयार की जाती है, फिर इसे लकड़ी के सांचों में भरा जाता है। ठंडा होने के बाद सांचा खोलते ही खिलौना तैयार हो जाता है। यह मिठाई कुरकुरी, बहुत मीठी और बच्चों के बीच खास पसंद की जाती है। दिवाली पर देवी-देवताओं के पूजन में भी इन्हें प्रसाद के रूप में चढ़ाने की परंपरा रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी
खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त ‘डा। सुधीर कुमार सिंह’ ने बतया कि ये रंग खाने की चीज नहीं होती। गाढ़े रंगों से बनी मिठाई और भी घातक होती है। लोग सिर्फ़ सुरक्षित और प्रमाणित खाद्य पदार्थों का ही सेवन करें। दिखने में अच्छा लगने वाला हर पदार्थ खाने योग्य नहीं होता। विभाग जल्द ही चीनी के खिलौनों के सैंपल लेकर जांच करेगा। त्योहारों पर स्वाद और परंपरा को निभाने के साथ-साथ स्वास्थ्य की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि मिठाई का रंग अधिक गाढ़ा दिखे तो उससे परहेज करना ही बेहतर है। आखिर त्योहार की वास्तविक मिठास स्वास्थ्य वर्धक मुस्कान में ही है।

