ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी कर रही है किसानों को मुआवजा दिलाने की दिशा में काम
सरकारें कई बार सड़क, हाइवे और फैक्ट्री आदि के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण करते हैं। इसके बदले किसानों को मुआवजा दिया जाता है लेकिन, किसानों की एक बड़ी विरोध मुआवजे की राशि को लेकर होती है। किसानों का बोलना होता है कि उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया जाता। हालांकि, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी इस दिशा में काम कर रही है कि किसानों को उनकी जमीन के बदले उचित मुआवजा दिया जा सके।

आपको बता दें कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण खेती की जमीन का दर बढ़ाने पर विचार कर रहा है। अब किसानों को यहां की जमीन की बढ़ी हुई कीमतें मिलेगी। ग्रेटर नोएडा के रहने वाले किसानों के लिए प्राधिकरण की तरफ से बड़ा प्लान तैयार किया गया हैं। प्राधिकरण के निर्णय से 21 गांवों के किसानों को फायदा मिलेगा। गांव के किसान पुरानी रेट 41,25 रुपए प्रति स्क्वायर मीटर के हिसाब से अपनी जमीन बेचने से इंकार कर चुके हैं। इसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की तरफ से अगली बोर्ड बैठक में जमीन की दरों में होने वाली बढ़ोतरी तय की जाएगी। हालांकि अभी तक बैठक की तारीख तय नहीं की गई है।
प्राधिकरण की तरफ से जारी किया गया था नोटिस
जानकारी के मुताबिक नोएडा प्राधिकरण की तरफ से एक नोटिस जारी किया गया था। जिसमें औद्योगिक परियोजनाओं के लिए 21 गांव से लगभग 600 हेक्टेयर जमीन खरीदने का इरादा जताया गया था। क्योंकि ग्रेटर नोएडा के जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की वजह से निवेशक इस क्षेत्र में घर, मकान, दुकान फैक्ट्री आदि लगाने में इंट्रेस्ट दिखा रहे हैं। इसके लिए प्राधिकरण लगातार जमीन खरीद रहा है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार एनजी ने कहा कि प्राधिकरण की तरफ से जमीन खरीदने के लिए नियमित रूप से दरों में बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसकी वजह प्राधिकरण की रेट और बाजार की दरों में काफी अंतर देखा जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि गौतम बुद्ध नगर के मजिस्ट्रेट से इस संबंध में सहायता के लिए बोला गया है ताकि किसानों को उचित मूल्य दिया जा सके।
सस्ते दामों में ली जाती है किसानों की जमीन
प्राधिकरण के उत्तरदायी ऑफिसरों ने कहा कि वर्तमान में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण 4,125 वर्ग मीटर की रेट से किसानों से जमीन खरीद रहा है। जबकि बाजार रेट करीब 15,000 से 20,000 प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से बिक रहा है। इसलिए किसानों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को जमीन देने से इंकार कर दिया है।
इसे लेकर किसानों से वार्ता की गई तो उन्होंने कहा कि बाजार में जमीन की कीमतें बहुत अधिक हैं। इसलिए हम अपनी जमीन 4,125 प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से प्राधिकरण को क्यों देंगे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को इस पूरे मुद्दे पर सोच विचार करना चाहिए कि हर वर्ष कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को भी दरों में जोड़ा जाना चाहिए।
अगर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण 600 हेक्टेयर की जमीन के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों में जमीन खरीदने का विकल्प ढूंढ रहा है तो किसान पूरी तरह से अपनी जमीन बेचने से इनकार कर रहे हैं और इन क्षेत्रों को विकसित करने के लिए बुनियादी ढांचों का निर्माण करने में कठिनाई हो रही है। मौजूदा रेट पर यहां के किसान अपनी जमीन बेचने को तैयार नही हैं। इसलिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की तरफ से मूल्य बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

