हाथरस : जानें भोले बाबा का 2000 वाला कांड…
हाथरस। नारायण साकर विश्व हरि या ‘भोले बाबा’ के अनुयायी उन्हें पूजते हैं। उनका मानना है कि वह एक चिकित्सक हैं जो उपचार करते हैं। वह एक भूत भगाने वाले हैं जो बुरी आत्माओं से छुटकारा दिलाते हैं। ‘भोले बाबा’ के अनुयायी मानते हैं कि वह एक जादुई शक्तियों वाले ईश्वर हैं जो उनकी इच्छाएं पूरी कर सकते हैं। क्षेत्रीय धर्मगुरु ‘भोले बाबा’ ने हाथरस में ‘सत्संग’ को संबोधित किया था। जहां मंगलवार को भगदड़ मची थी। जिसमें बुधवार तक मरने वालों की संख्या 121 हो गई। वास्तव में जादुई शक्तियों के उनके कथित दावे के कारण उन्हें 2000 में आगरा में अरैस्ट भी किया गया था।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार ‘भोले बाबा’ ने तब कथित तौर पर एक 16 वर्ष की लड़की के मृतशरीर को उसके परिवार से जबरन छीन लिया था। उन्होंने यह दावा किया था कि वह उसे वापस जीवित कर देंगे। बाद में यह मुद्दा बंद कर दिया गया था। 1990 के दशक में यूपी पुलिस से कांस्टेबल सूरज पाल के रूप में कासगंज से सेवा छोड़कर स्वयंभू धार्मिक उपदेशक बनने के बाद, अब दो दशक से भी अधिक समय में उन्होंने काफी संख्या में अनुयायी जुटा लिए हैं। जिनमें से अधिकांश कम आय वाले दलित परिवार हैं। जहां पुरुष मजदूर, राजमिस्त्री, खेतिहर मजदूर, सफाई कर्मचारी, बढ़ई या कालीन बेचने का काम करते हैं। इनमें से कई उनकी बढ़ती लोकप्रियता के गवाह हैं।
‘भोले बाबा’ दलित परिवार से हैं
कई लोगों ने बोला कि उन्हें ‘भोले बाबा’ की ओर आकर्षित करने वाली बात यह थी कि वे भी दलित परिवार से थे। वे कोई प्रसाद भी नहीं मांगते थे। अपनी बहन तारामती के साथ सत्संग में आई उर्मिला देवी ने बोला कि बाबा कुछ भी नहीं लेते या मांगते हैं। अपने सत्संग में वे हमें असत्य नहीं बोलने और मांस, मछली, अंडा और शराब नहीं खाने के लिए कहते थे। विधवा तारामती भी घायलों में शामिल हैं। दोनों बहनें मथुरा की रहने वाली हैं।
ज्यादातर स्त्री भक्त 40-70 साल की
यह चौथी बार था जब तारामती ‘भोले बाबा’ के सत्संग में भाग ले रही थी, और उसने अपनी बहन को इस बार शामिल होने के लिए बोला था। दोनों बहनों की तरह भोले बाबा के ज्यादातर स्त्री भक्त 40-70 साल की उम्र वर्ग की हैं। तारामती ने हॉस्पिटल के बिस्तर से बोला कि जब सत्संग समाप्त हो रहा था, तब भोले बाबा ने बोला कि ‘आज प्रलय आएगी, और फिर प्रलय आ गई।’

