Hathras stampede: अब तक 121 की मौत
भूखी और प्यासी उर्मिला देवी (60) मंगलवार देर रात तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सांस रोककर खड़ी रही. उन्हें हाथरस में हुई भगदड़ में अपनी पोती खुशबू (16) का हाल जानने का प्रतीक्षा था. उनकी पोती खुशबू हाथरस में सत्संग में मची भगदड़ के बाद लापता हो गई थी. इस हादसे में अबतक 121 लोगों की मृत्यु हो गई है.

हादसे में घायलों और मृतकों के शवों को पहले केंद्र ले जाया गया, जहां 96 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया. हादसे में 40 अन्य घायलों को भिन्न-भिन्न अस्पतालों में रेफर कर दिया गया. उल्लेखनीय है कि उर्मिला उन कुछ परेशान संबंधियों में शामिल हैं, जो लगातार हॉस्पिटल में कर्मचारियों से ये पूछ रही है कि उनके प्रियजन जीवित हैं या नहीं.
“मैं और मेरी पोती सत्संग में गए थे. भगदड़ के बाद मैं किसी तरह मौके से बाहर निकल आई लेकिन खुशबू मुझे नहीं मिली. अलीगढ़ के अतरौली की निवासी उर्मिला ने कहा, “मैं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आई थी, क्योंकि पुलिस ने मुझे मृतकों और घायलों की सूची में उसका नाम खोजने के लिए बोला था.” उर्मिला तब भी प्रतीक्षा करती रही जब सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया और घायलों को अन्य स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में भेज दिया गया.
वहीं वृंदावन निवासी सचिन कुमार ने भी अपनी लापता मां 45 वर्षीय गायत्री देवी का पता लगाने के लिए अस्पतालों और पुलिस थानों के चक्कर लगाए. “वह मंगलवार की सुबह कुछ पड़ोसियों के साथ सत्संग के लिए घर से निकली थी. हाथरस के जिला हॉस्पिटल में कुमार ने बताया, “शाम तक सभी पड़ोसी घर लौट आए, लेकिन मेरी मां नहीं लौटीं… उन्हें मेरी लापता मां के बारे में कोई सुराग नहीं मिला. उनका नाम मृतकों की सूची में नहीं है.”
जिला हॉस्पिटल के एक अधिकारी ने कहा कि 10 घायलों और 38 शवों को जिला हॉस्पिटल लाया गया. “लगभग 99% मृतशरीर स्त्रियों के थे.” अधिकारी ने कहा कि श्रद्धालु ईश्वर की एक झलक पाने की प्रयास कर रहे थे, तभी भगदड़ मचने से उनमें से कई फिसल गए. “पीछे से आ रहे अन्य लोग उन्हें कुचलकर चले गए और उन्हें मृत छोड़ गए. शवों को पोस्टमार्टम के लिए एटा, कासगंज, अलीगढ़, आगरा और हाथरस ले जाया गया.”

