उत्तर प्रदेश

UP: बिजली दरों के निर्धारण के लिए आठ जुलाई से होगी सुनवाई

उत्तर प्रदेश में बिजली दरों को लेकर आठ जुलाई से 20 जुलाई के बीच सुनवाई होगी. विद्युत वितरण निगमों में सुनवाई पूरी करने के बाद नियामक आयोग दरें तय करेगा. सुनवाई की तिथि घोषित होते ही उपभोक्ता परिषद ने भी अपनी तैयारी प्रारम्भ कर दी है. परिषद का बोलना है कि कई वर्ष से कंज़्यूमरों का वितरण निगमों पर 33122 करोड़ का बकाया लौटाया जाए, उसके बाद बिजली रेट बढ़ाने पर विचार किया जाए.

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प्रदेश के विद्युत वितरण निगमों की ओर से पावर काॅरपोरेशन ने नियामक आयोग में साल 2024-25 के लिए 101784 करोड़ का वार्षिक राजस्व जरूरत (एआरआर) दाखिल किया है. आयोग ने सभी वितरण निगमों को पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने का निर्देश दिया. अब सुनवाई की तैयारी प्रारम्भ हो गई है. इस सुनवाई में वितरण निगमों और कंज़्यूमरों का पक्ष सुना जाएगा.

नियामक आयोग के अनुसार 8 जुलाई को केस्को की सुनवाई कानपुर में, 10 जुलाई को यूपीपीसीएल और एसएलडीसी की सुनवाई लखनऊ में, 11 जुलाई को मध्यांचल की सुनवाई लखनऊ विद्युत नियामक आयोग बैठक भवन में, 16 जुलाई को पूर्वांचल की सुनवाई वाराणसी में, 18 जुलाई को दक्षिणांचल की सुनवाई आगरा में, 19 जुलाई को नोएडा पावर कंपनी की सुनवाई ग्रेटर नोएडा में और 20 जुलाई को पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम की सुनवाई मेरठ में होगी. इसमें प्रदेश के आम उपभोक्ता सुनवाई में पहुंचकर बिजली रेट पर अपनी बात रख सकते हैं. सुनवाई के बाद नियामक आयोग नयी दरें लागू करेगा.

उपभोक्ता परिषद में फैसला लिया है कि परिषद अध्यक्ष सभी सुनवाई में भाग लेंगे. निगमों ने सीधे बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन वैकल्पिक रास्ते अपनाते हुए 40 प्रतिशत से अलग बढ़ोतरी का रास्ता चुना है. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सीएम और ऊर्जा मंत्री से अपील की है कि बिजली रेट बढ़ाने पर विचार करने से पहले कंज़्यूमरों का बकाया लौटाया जाए, क्योंकि कंज़्यूमरों का करीब 33122 करोड़ विद्युत वितरण निगमों पर बकाया चल रहा है. उन्होंने कहा कि सुनवाई के बाद गवर्नमेंट विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के अनुसार कंज़्यूमरों को राहत दे सकती है.

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