उत्तर प्रदेश

मुसलमानों के मुद्दे पर जज साहब ने दिया विवादित बयान

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायधीश शेखर कुमार यादव ने बोला कि उन्हें यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि ‘हिंदुस्तान, राष्ट्र में रहने वाले बहुसंख्यक लोगों की ख़्वाहिश के मुताबिक चलेगा. यह कानून है… हकीकत में कानून बहुसंख्यकों के अनुसार काम करता है. इसे परिवार या समाज के संदर्भ में देखें… केवल वही स्वीकार किया जाएगा जो बहुसंख्यकों के कल्याण और खुशी के लिए फायदेमंद हो.‘ जस्टिस यादव का यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाओं को दौर प्रारम्भ हो गया.

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तीन तलाक और हलाला अस्वीकार्य

बताया जा रहा है कि जस्टिस यादव को प्रयागराज में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के एक कार्यक्रम बोल रहे थे. इस मौके पर उन्होंने मुसलमान समुदाय का नाम लिए बिना जस्टिस ने बोला कि कई पत्नियां रखना, तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाएं ‘अस्वीकार्य”‘हैं. उन्होंने कहा,’अगर आप कहते हैं कि हमारा पर्सनल लॉ इसकी अनुमति देता है, तो इसे कबूल नहीं किया जाएगा. आप उस स्त्री का अपमान नहीं कर सकते जिसे हमारे शास्त्रों और वेदों में देवी के रूप में मान्यता दी गई है.

4 पत्नियों पर भी दिया बड़ा 

जस्टिस यादव ने आगे कहा,’आप चार पत्नियां रखने, हलाला करने या तीन तलाक़ का अधिकार नहीं मांग सकते. आप कहते हैं, ‘हमें तीन तलाक़ का अधिकार है और स्त्रियों को भरण-पोषण नहीं देना है’ लेकिन यह अधिकार काम नहीं करेगा. यूसीसी ऐसी चीज़ नहीं है जिसकी वकालत वीएचपी, आरएसएस या हिंदू धर्म करते हैं. राष्ट्र की शीर्ष न्यायालय भी इसके बारे में बात करती है.

समान संस्कृति के पालन की अपेक्षा नहीं लेकिन…

न्यायाधीश ने कबूल किया कि हिंदू धर्म में बाल शादी और सती जैसी सामाजिक बुराइयां थीं, लेकिन राम मोहन राय जैसे सुधारकों ने इन प्रथाओं को समाप्त करने के लिए संघर्ष किया. उन्होंने यह भी बोला कि हिंदू अन्य समुदायों से समान संस्कृति और परंपराओं का पालन करने की अपेक्षा नहीं करते हैं, लेकिन उनसे “निश्चित रूप से इस राष्ट्र की संस्कृति, महान शख़्सियतों और इस भूमि के भगवान का अपमान न करने की अपेक्षा की जाती है. उन्होंने बोला कि हमारे राष्ट्र में हमें सिखाया जाता है कि छोटे से छोटे जानवर को भी हानि न पहुंचाएं, चींटियों को न मारें और यह सीख हमारे अंदर समाई हुई है. शायद इसीलिए हम सहिष्णु और दयालु हैं; जब दूसरे पीड़ित होते हैं तो हमें दर्द होता है लेकिन आपकी संस्कृति में, छोटी उम्र से ही बच्चों को जानवरों के वध के बारे में कहा जाता है. आप उनसे कैसे आशा कर सकते हैं कि वे सहिष्णु और दयालु होंगे?’

एक राष्ट्र एक कानून होना चाहिए

राष्ट्रव्यापी समान नागरिक संहिता की आशा जताते हुए उन्होंने बोला कि अयोध्या में राम मंदिर बनाने में समय लगा, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब यह साफ हो जाएगा कि यदि एक राष्ट्र है, तो एक कानून और एक दंडात्मक कानून होना चाहिए. जो लोग विश्वासघात देने या अपना एजेंडा चलाने की प्रयास करते हैं वे लंबे समय तक नहीं टिकेंगे.

‘कठमुल्ला’ पर भी कही बड़ी बात

जज ने कई विवादित बयान दिए, जिसमें ‘कठमुल्ला’ शब्द का इस्तेमाल करना भी शामिल है. चरमपंथियों को “कठमुल्ला” कहते हुए उन्होंने बोला कि राष्ट्र को उनके बारे में सावधान रहना चाहिए. न्यायधीश ने कहा,’ये जो कठमुल्लाह है जो… ये ठीक शब्द नहीं है… लेकिन कहने में परहेज नहीं है क्योंकि वो राष्ट्र के लिए बुरा है… राष्ट्र के लिए घातक है, खिलाफ़ है, जनता को भड़काने वाले लोग हैं… राष्ट्र आगे ना बढ़े इस तरह के लोग हैं… उन्हें सावधान रहने की आवश्यकता है (लेकिन ये) कठमुल्ला… शब्द नहीं हो सकता… लेकिन मैं इसे कहने में संकोच नहीं करूंगा क्योंकि वे राष्ट्र के लिए नुकसानदायक हैं. देश के विरुद्ध हैं और जो लोग जनता को भड़काते हैं, वे ऐसे लोग हैं जो नहीं चाहते कि राष्ट्र प्रगति करे और हमें उनसे सावधान रहने की आवश्यकता है.

गाय को लेकर भी दे चुके हैं बड़ा बयान

यह पहली बार नहीं है जब जस्टिस शेखर कुमार यादव ने विवादित टिप्पणी की है. सितंबर 2021 में भी उन्होंने यह देखकर सुर्खियां बटोरीं कि ‘वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि गाय एकमात्र ऐसा जानवर है जो ऑक्सीजन छोड़ता है.‘ उन्होंने संसद से गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने और गोरक्षा को ‘हिंदुओं का मौलिक अधिकार’ घोषित करने का भी बात कही थी.

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