गोवंश संरक्षण के लिए उठाया जा रहा है यह बड़ा कदम, जानें विस्तार में…
प्रदेश गवर्नमेंट ने गोवंश संरक्षण की दिशा में एक जरूरी कदम उठाया है. गवर्नमेंट ने फैसला लिया है कि राज्य में उपस्थित दुश्मन संपत्तियों का इस्तेमाल अब आवारा पशुओं के संरक्षण और चारा विकास फार्म के लिए किया जाएगा.

इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए सभी जिला मजिस्ट्रेट को तहसील स्तर पर दुश्मन संपत्तियों का स्थलीय सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है. जिलाधिकारी चंद्र विजय सिंह के अनुसार, सभी ऑफिसरों को तीन दिन के भीतर अपनी तहसील की दुश्मन संपत्तियों का विवरण प्रस्तुत करना होगा.
योजना के अनुसार इन संपत्तियों पर चारा उत्पादन केंद्र और पशु संरक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे. जमीन केंद्र गवर्नमेंट प्रदान करेगी, जबकि जरूरी सुविधाओं का विकास राज्य गवर्नमेंट करेगी. अयोध्या में वर्तमान में 86 गो आश्रय स्थलों में 16 हजार गोवंश हैं, जहां हरे चारे की कमी की परेशानी है.
शत्रु संपत्तियां वे संपत्तियां हैं जो भारत-पाकिस्तान विभाजन और 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद पाक या चीन चले गए लोगों द्वारा छोड़ी गई थीं. गवर्नमेंट ने इन संपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले लिया है. यदि इन चिह्नित संपत्तियों पर कोई कब्ज़ा पाया जाता है, तो उसे खाली कराया जाएगा.
यह पहल न सिर्फ़ आवारा पशुओं को संरक्षण प्रदान करेगी, बल्कि दुश्मन संपत्तियों का सार्थक इस्तेमाल भी सुनिश्चित करेगी. साथ ही, इससे गोवंश की देखभाल और चारे की उपलब्धता में भी वृद्धि होगी.
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी अयोध्या शिव मूर्ति प्रसाद ने कहा कि दुश्मन संपत्तियों को प्रशासन कब्जे में लेकर गौशाला में रहने वाले पशुओं के लिए हरा चारा उगायेगी. हरा चारा मवेशियों को नहीं मिल पा रहा है इन्हीं सब समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा उठाया गया है.

