जानें, आखिर कौन हैं UP के राज्य सूचना आयुक्त…
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश की कहानी बहुत ही दिलचस्प है। इनका जन्म 15 अप्रैल 1963 को उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद में हुआ। स्वतंत्र प्रकाश की पढ़ाई स्नातक तक बदायूं जनपद से ही हुई। इसके बाद इन्होंने बरेली कॉलेज से अपनी विधि की पढ़ाई पूरी की। स्वतंत्र प्रकाश ने मात्र 20 वर्ष की उम्र में ही विधि की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी। इसके बाद इन्होंने 39 वर्षों तक जिला एवं सत्र कोर्ट बदायूं में वकालत की।

बेटे की कामयाबी में पिता का रहा मुख्य योगदान
स्वतंत्र प्रकाश ने लोकल 18 से बात करते हुए कहा कि हम सबके जीवन में पिता का बहुत बड़ा सहयोग होता है। स्वतंत्र प्रकाश के जीवन में भी उनके पिता सुदर्शन लाल का बहुत बड़ा सहयोग रहा है। पिता ने संघर्ष कर बेटे को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। स्वतंत्र प्रकाश ने कहा कि पिता का उनके जीवन में एक पिता जैसा नहीं बल्कि एक दोस्त जैसा संबंध रहा है। इनके जीवन में पिता ने जीवन की हर हालात में एक दोस्त जैसा साथ दिया।
प्रतिभा के चलते बनाए गए राज्य सूचना आयुक्त
स्वतंत्र प्रकाश एक अनुभवी विधिवेत्ता हैं। इनकी इसी प्रतिभा के चलते इनका चयन यूपी के राज्य सूचना आयुक्त के रूप में मार्च 2024 हुआ। यूपी के राज्य सूचना आयुक्त के पद पर रहते हुए यह अपने विधि ज्ञान का पूरा फायदा आयोग को दे रहे हैं। उन्होंने बोला कि आदमी छोटी स्थान और सामान्य परिस्थितियों में पैदा होकर भी असाधारण रिज़ल्ट दे सकता है।
‘जौ जिला बदाऊं है’ पुस्तक बटोर रही सुर्खियां
स्वतंत्र प्रकाश की आरंभ से ही पढ़ने लिखने में काफी रुचि रही है। इनके लेख और संपादकीय अक्सर विभिन्न अखबारों में प्रकाशित होते रहते हैं। इन्होंने ‘जौ जिला बदाऊं है’ नामक मशहूर पुस्तक भी लिखी है, जो कि इस समय बाजार में बहुत धड़ल्ले से सुर्खियां बटोर रही है। इस पुस्तक में ऐसे प्रसंग उठाए गए हैं, जिन पर पढ़ने को बहुत कम मिलता है।
इस पुस्तक में जैसे चबूतरों पर होने वाली बातें, जेबकतरे तथा सट्टेबाजी में प्रयोग होने वाले शब्द। जैसे- रमूश आदि लिखे गए हैं। ‘जौ जिला बदाऊं’ नामक पुस्तक में ग्रामीण परिदृश्य का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। इसमें ग्रामीण परिदृश्य का भोलापन, परंपरा आदि अचंभित कर देती है। इस पुस्तक में परसोना की तवायफ नामक कहानी, अवध की नवाबी शैली के साथ जोड़कर बदायूं को जीवंत करती है।

