उत्तर प्रदेश

Mathura Famous Peda : जानें सफेद पेड़े को बनाते समय किन बातों का रखना चाहिए ध्यान…

मथुरा: आपने मथुरा के पेड़े तो जरूर खाए होंगे, लेकिन हम जिस पेड़े की बात कर रहे हैं, वह थोड़ा खास है. मथुरा की एक विशेष दुकान पर आपको ब्राउन नहीं, बल्कि सफेद रंग के पेड़े चखने को मिलेंगे. इन पेड़ों की विशेषता और इन्हें बनाने की विधि बहुत खास है. आइए जानते हैं कि इस सफेद पेड़े को कैसे बनाया जाता है और इसे बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

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25 वर्ष पुराना है सफेद पेड़ों का व्यापार
मथुरा के पेड़े न सिर्फ़ हिंदुस्तान में, बल्कि विदेशों में भी मशहूर हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु इनका स्वाद चखना नहीं भूलते. कई बार अपने साथ पेड़े पार्सल भी कराते हैं. मथुरा के पेड़ों की मिठास की चर्चा पूरे विश्व में है. हालांकि, आपने ब्राउन रंग के पेड़े तो कई बार खाए होंगे, लेकिन आज हम जिस सफेद पेड़े की बात कर रहे हैं, वो विशेष है. इसका स्वाद इतना खास है कि इसे चखने के बाद आप ब्राउन पेड़े को भूल जाएंगे. इस पेड़े को आम और खास, दोनों लोग खा सकते हैं और इसे व्रत वाला पेड़ा भी बोला जाता है.

450 रुपये के अंदर मिलते हैं पेड़े
दुकान की मालकिन हेमा ने लोकल 18 से वार्ता में कहा कि उनकी दुकान करीब 25 वर्ष पुरानी है. वे पिछले ढाई दशकों से पेड़े का व्यापार कर रही हैं. हेमा ने कहा कि उनकी दुकान पर दो तरह के पेड़े मिलते हैं – ब्राउन और सफेद. ब्राउन पेड़े की मूल्य 400 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि सफेद पेड़े की मूल्य 440 रुपये प्रति किलोग्राम है.

व्रत के लिए पेड़े कैसे बनाए जाते हैं?
दुकान स्वामी हेमा ने पेड़े बनाने की प्रक्रिया के बारे में कहा कि एक पेड़ा बनाने में लगभग 1 घंटा लगता है. सबसे पहले दूध से बना मावा लाया जाता है. मावा को मामूली आंच पर कढ़ाई में पकाया जाता है और फिर ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है. जब मावा ठंडा हो जाता है, तो उसे कढ़ाई से निकालकर ट्रे में रखा जाता है. इसके बाद, मावा में चीनी और पिस्ता मिलाया जाता है. इस प्रक्रिया के बाद सफेद पेड़े तैयार होते हैं, जिन्हें व्रत के लिए खासतौर पर बनाया जाता है. व्रत रखने वाले लोग भी इस पेड़े का सेवन कर सकते हैं.

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