मोहन भागवत, होसबाले और जोशी ने शांति और एकता पर दिया जोर

होसबाले ने कन्नड़ साप्ताहिक मीडिया विक्रम को दिए एक साक्षात्कार में बोला कि यदि हम बाकी सभी मस्जिदों और इमारतों की बात करें, तो क्या हमें 30,000 मस्जिदों को खोदना प्रारम्भ कर देना चाहिए और इतिहास को बदलने की प्रयास करनी चाहिए? क्या इससे समाज में और नफरत और तनाव नहीं बढ़ेगा? हमें समाज के तौर पर आगे बढ़ना चाहिए या अतीत में अटके रहना चाहिए? हम इतिहास में कितना पीछे जाएंगे? उनका बोलना था कि इस तरह के कदम से समाज में शांति और एकता को हानि पहुंचेगा।
मोहन भागवत भी रख चुके हैं अपनी राय
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पहले भी इस मामले पर अपनी राय रख चुके हैं। होसबाले ने उनकी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला कि मस्जिदों के विवादित स्थानों पर कब्जे की मांग समाज के लिए बहुत भारी पड़ सकती है। उन्होंने बोला कि समाज की दूसरी महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं जैसे छुआछूत को समाप्त करना और युवाओं में अच्छे मूल्यों का विकास करना पीछे छूट सकता है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि हम लगातार ऐसा करते रहें, तो समाज के बाकी महत्वपूर्ण बदलावों पर कब ध्यान देंगे? छुआछूत को समाप्त करने का काम कब होगा? युवाओं में मूल्यों को कैसे स्थापित करेंगे?
होसबाले ने यह भी बोला कि इस तरह के आंदोलन से संस्कृति और भाषा को बचाने, धर्मांतरण, गोहत्या और लव जिहाद जैसे मुद्दों पर ध्यान कम हो सकता है, जो आरएसएस के लिए हमेशा से अहम रहे हैं। उनका बोलना था कि संघ ने कभी नहीं बोला कि इन मुद्दों को नजरअंदाज करना चाहिए या इन पर काम नहीं करना चाहिए। लेकिन उनका बल इस बात पर था कि मस्जिदों को लेकर बड़े पैमाने पर आंदोलन ठीक दिशा में नहीं है।
मंदिर का मतलब क्या?
टाइम्स ऑफ इण्डिया ने होसबोले के बयान पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। उन्होंने मंदिर की अवधारणा पर भी अपनी बात रखी। होसबाले ने बोला कि मंदिर का मतलब क्या है? क्या कोई मंदिर, जो मस्जिद में बदल गया, अब भी पवित्र जगह है? क्या हमें हिंदुत्व को पत्थर की इमारतों के अवशेषों में ढूंढना चाहिए या उन लोगों के दिलों में हिंदुत्व को जगाना चाहिए जो इससे दूर हो गए हैं? यदि हम पत्थर की इमारतों में हिंदू धरोहर की खोज करने की बजाय लोगों और उनके समुदायों में हिंदू जड़ों को फिर से जागृत करें तो मस्जिद का मामला अपने आप हल हो जाएगा।
इससे पहले आरएसएस के वरिष्ठ नेता भैय्या जी जोशी ने भी इसी तरह के विचार रखे थे। उन्होंने बोला था कि इतिहास को बार-बार खोदने से समाज में केवल तनाव बढ़ेगा और हमें वर्तमान और भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। होसबाले और जोशी, दोनों के बयानों से साफ है कि आरएसएस मंदिर-मस्जिद टकराव को बढ़ाने के बजाय समाज में सकारात्मक परिवर्तन और एकता पर बल देना चाहता है। उनका मानना है कि अतीत के झगड़ों में उलझने से बेहतर है कि हम आज के समाज को मजबूत करें और आगे बढ़ें।

