उत्तर प्रदेश

मुस्लिम पक्ष ने केस ट्रांसफर करने का विरोध

Gyanvapi Case: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ज्ञानवापी टकराव में दो वर्ष से चल रहे मुसलमान पक्ष के एक मुकदमा को निर्णय से पहले चीफ जस्टिस सिंगल न्यायधीश की बेंच से छीनकर अपनी न्यायालय में ट्रांसफर कर लिया चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर ने अपने आदेश में बोला है कि सिंगल बेंच के न्यायधीश न्‍यायामूर्ति प्रकाश पाडिया बिना अधिकार क्षेत्र के इस मुद्दे की सुनवाई कर रहे थे जो न्‍यायिक शुचिता के हिसाब से ठीक नहीं था मुसलमान पक्ष ने मुकदमा ट्रांसफर करने का विरोध किया लेकिन चीफ जस्टिस ने न्‍यायिक अनुशासन का हवाला देकर इस दलील को खारिज कर दिया चीफ जस्टिस को 12 सितम्‍बर को इस मुद्दे की पहली सुनवाई करनी थी लेकिन वकीलों की स्ट्राइक की वजह से मंगलावर को सुनवाई नहीं हो सकी अगली तारीख 18 सितंबर तय की गई हैNewsexpress24. Com download 2023 09 13t105407. 753

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एकल-न्यायाधीश पीठ से मुकदमा वापस लिए जाने को मुनासिब ठहराते हुए मुख्य न्यायाधीश ने अब इसकी वजह बताई है हाल में अपलोड किए गए 28 अगस्‍त के आदेश में चीफ जस्टिस ने बोला है कि न्यायिक औचित्य, न्यायिक अनुशासन, मामलों की सूची में पारदर्शिता के भलाई में प्रशासनिक पक्ष पर यह फैसला लिया गया था

न्‍यायमूर्ति दिवाकर ने इसे ‘न्‍यायिक अनुचितता’ का उदाहरण बताया उन्‍होंने पाया कि, ‘एकल न्यायाधीश ने इन मामलों की सुनवाई दो वर्ष से अधिक समय तक जारी रखी, जबकि रोस्टर के हिसाब से उनके पास इस मुद्दे में कोई क्षेत्राधिकार नहीं था’ बता दें कि इन मामलों में अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद-ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन- की याचिकाएं शामिल थीं, जिसमें हिंदू पक्षों द्वारा वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद वाले जगह पर ईश्वर विश्वेश्वर मंदिर की बहाली की मांग करने वाले मुकदमे की स्थिरता को चुनौती दी गई थी ज्ञानवापी मस्जिद का एएसआई सर्वेक्षण करने के लिए 2021 में वाराणसी की न्यायालय के निर्देश को चुनौती देने वाली एक अन्य याचिका को भी एआईएम याचिका के साथ जोड़ दिया गया है

सीजेआई ने यह भी कहा कि टकराव के एक पक्ष द्वारा 27 जुलाई को कम्पलेन दर्ज की थी जिसके चलते उन्हें इस तरह की अनुचितता पर ध्यान देना पड़ा 28 अगस्त के आदेश में बोला गया है, ’27 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश के सामने प्रशासनिक पक्ष की ओर से की गई कम्पलेन के बिना, ऊपर देखी गई क्षेत्राधिकार संबंधी अनौचित्यता का पता नहीं चल पाता’ 28 अगस्त के आदेश में, मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा था कि 12 सितम्‍बर से मुद्दे की नए सिरे से सुनवाई की जाएगी हालांकि उत्तर प्रदेश में वकीलों की स्ट्राइक की वजह से मंगलावर को सुनवाई नहीं हो सकी न तो याचिकाकर्ता और न नहीं बचाव पक्ष की ओर से कोई वकील न्यायालय में पेश हुआ इस मुद्दे में सुनवाई की अगली तारीख 18 सितंबर तय की गई है

मुस्लिम पक्ष ने दाखिल की है ये याचिका 
मुस्लिम पक्ष की ओर से उच्च न्यायालय में दाखिल वाद में वाराणसी की न्यायालय में दाखिल वाद की पोषणीयता को इलाहाबाद चुनौती दी गई है बता दें कि मूल वाद में उस स्थान पर मंदिर बहाल करने की मांग की गई है जहां वर्तमान में ज्ञानवापी मस्जिद उपस्थित है अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल याचिका में 2021 में एक अधिवक्ता की अध्यक्षता वाले आयोग की तरफ से ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वेक्षण करने के वाराणसी की न्यायालय के निर्देश को भी चुनौती दी गई है

28 अगस्त को जब इस मुद्दे में सुनवाई चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की न्यायालय में प्रारम्भ हुई थी, तो अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने यह बात उठाई कि उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने इस मुद्दे में सुनवाई पूरी कर ली थी और निर्णय सुरक्षित रख लिया था इस स्थिति में एकल पीठ की ओर से निर्णय दिया जाना चाहिए हालांकि चीफ जस्टिस ने उनकी दलील को खारिज करते हुए बोला था कि उच्च न्यायालय के नियमों के मुताबिक जब किसी मुद्दे में सुनवाई पूरी होने के बाद भी निर्णय नहीं दिया जाता है तो मुख्य न्यायाधीश के पास उस मुद्दे को किसी अन्य पीठ के पास भेजने या स्वयं उस पर सुनवाई करने का अधिकार होता है

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