आजमगढ़ जिले में राष्ट्रीय लोक अदालत का किया गया आयोजन
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नयी दिल्ली और यूपी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देश पर आजमगढ़ जिले में राष्ट्रीय लोक न्यायालय का आयोजन किया गया. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायाधीश जयप्रकाश पांडे की अध्यक्षता में आयोजित लोक न्यायालय में
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जनपद न्यायाधीश ने बोला कि लोक न्यायालय आम आदमी के लिए उपलब्धि जरूरी वैकल्पिक टकराव निवारण तंत्र है. जिसके माध्यम से टकराव का निपटारा मुफ़्त और त्वरित किया जाता है.
लोगों की न्यायालय में दिया गया निर्णय आखिरी होता है. उसके विरुद्ध किसी ऊपरी कोर्ट में अपील नहीं होती है. लोक न्यायालय में दिए गए निर्णय सुलह समझौते के आधार पर होते हैं. इसलिए पक्षकारों के बीच मतभेद भी खत्म हो जाते हैं. इनमें न कोई जीतता है और ना ही कोई हारता है.
97192 मामलों का हुआ निस्तारण
लोक न्यायालय में निस्तारण हेतु कुल 116273 वाद चिन्हित किये गये थे. जिसमें कुल 97192 वाद निस्तारित हुए तथा 82323217 रकम का समझौता हुआ. प्रीलिटिगेशन स्तर पर 83500 तथा न्यायालय से 13692 दीवानी और फौजदारी वाद, राष्ट्रीय लोक न्यायालय में निस्तारित हुए.
जनपद न्यायाधीश द्वारा 2 वादों का निस्तारण किया गया. अजय कुमार शाही, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय नं।-1 द्वारा कुल 1 वाद का, कमला पति-1 विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट द्वारा 8 वादों का, अजय श्रीवास्तव, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय नं०- 3 द्वारा 2 वादों का, विजय कुमार वर्मा, विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट द्वारा कुल 102 वादों का, शैलजा राठी, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट द्वारा कुल 9 वादों का, संतोष कुमार यादव, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय नं0-6 द्वारा 8 वादों का निस्तारण किया गया.
जैनुद्दीन अंसारी ने प्रभारी पीठासीन अधिकारी कोर्ट मोटर हादसा दावा अधिकरण के रूप में 28 वादों का और अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी-1 के रूप में 3 वादों का निस्तारण किया. अमर सिंह-1, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी-2 द्वारा 3 वादों का निस्तारण किया गया.
सत्यवीर सिंह मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 5004 वादों का निस्तारण किया गया, वहीं पारिवारिक कोर्ट से अहसानुल्लाह खान, प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक कोर्ट द्वारा 37 वादों का, संदीपा यादव, अपर प्रधान न्यायाधीश कोर्ट संख्या-2 द्वारा 40 वादों का, प्रेम शंकर, अपर प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक कोर्ट संख्या-1 द्वारा 50 वादों का निस्तारण किया गया.
इस प्रकार पारिवारिक कोर्ट द्वारा कुल 127 वादों का निस्तारण किया गया, जिनमें 19 दम्पत्तियों ने एक दूसरे को माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर एक साथ जाने का फैसला लिया.

