अब विकास को लगेंगे पंख, बन गई यूपी की पहली जीरो डंप सिटी

नगर निगम की तरफ से ज्योति इनवायरोटेक को कूड़े को प्रोसेस करने का ठेका दिया गया था। लेकिन वेस्ट मैनेजमेंट में ज्योति इनवायरोटेक फेल हो गई। इसके बाद नगर निगम ने वर्ष 2017 में चीन की कंपनी ईकोग्रीन एजर्नी को इसका ठेका दिया था, जिसमें कुल तीन पक्ष थे। एक पक्ष नगर निगम, दूसरा पक्ष नगर विकास विभाग (शासन) की ओर से सीएंडडीएस जल निगम और तीसरा पक्ष ईकोग्रीन कंपनी थी। चीन की इस कंपनी ने प्रारम्भ के करीब 2 वर्ष तक ठीक काम किया, लेकिन बाद में ढिलाई सामने आने लगी। इससे प्लांट में कूड़े का पहाड़ बन गया।
कंपनी ने डोर टू डोर कलेक्शन में भी धांधली की। कूड़े का पहाड़ बनने पर कंपनी पर करीब 40 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया। इसके बाद फिर से नए सिरे से कूड़ा प्रोसेस का काम प्रारम्भ किया गया। इसके बाद मुद्दा एनजीटी में गया। एनजीटी के आदेश के बाद 2023 में लखनऊ नगर निगम ने स्वच्छ हिंदुस्तान मिशन से 96 करोड़ की परियोजना प्रारम्भ की। पुणे की कंपनी भूमि ग्रीन एनर्जी को जनवरी 2024 में इसकी जिम्मेदारी दी। इसके बाद माइक्रोबियल कल्चर से कचरे की बदबू और जहरीले तरल (लीचेट) को कम किया गया। कचरे को हवा देकर सुखाया गया, जिससे इसकी मात्रा कम हुई और इसे प्रोसेस करना आसान हो गया। इसके बाद इसे प्रोसेस करने का काम किया गया।

